Thinker, Writer, Anchor

February 18, 2018

क्या मृतक परिवारों का दर्द बांटेगा खरबपति श्री सीमेंट प्रबंधन !

श्री सीमेंट के नाम खुला पत्र

बांगड़ परिवार

श्रीमान, ब्यावर शहर जिसने आप को बहुत कुछ दिया आज इसी शहर की धरती पर इतिहास का सबसे बड़ा हादसा घटित हुआ है। प्रत्येक शहरवासी की आँखें नम और ह्रदय में दर्द है। हर हाथ मदद को तैयार। ऐसी विकट परिस्थिति में मेरा निवेदन है कि श्री संकटमोचन हनुमान मंदिर के वार्षिकोत्सव पर होने वाले भव्य आयोजन को सूक्ष्म और सादगी पूर्ण तरीके से किया जाए और इसमें खर्च होने वाली अथाह धनराशि ना केवल पीड़ित परिवार बल्कि उन परिवारों पर खर्च की जाए जिनके सपनों के आशियाने टूट गए हैं। मेरी यह भावपूर्ण विनती है आपसे और ऐसा निवेदन समर्थ व्यक्ति से ही किया जाता है। संकटमोचन राम भक्त हनुमान आपके इस कदम से विगत वर्षों की तुलना में अधिक प्रसन्न होंगें।
मुझे ये भी विदित है कि आपकी तरफ से मृतकों के लिए एक-एक लाख रुपए सहायता की घोषणा की जा चुकी है। पर यह सर्व विदित है कि इतने रुपए में तो एक कमरा भी मुश्किल से बन पाता है। मेरा निवेदन है कि मन्दिर वार्षिकोत्सव में होने वाले व्यर्थ खर्च को रोक कर ब्यावर के नाम खर्च किया जाए। आपका पूरा ब्यावर सदैव ऋणी रहेगा क्योंकि यह हादसा किसी एक परिवार के साथ नहीं बल्कि ब्यावर के साथ हुआ है। ना केवल मैं बल्कि ब्यावर का हर वासी आज दुखी मन से आपसे यह विन्रम निवेदन करता है।

परोपकाराय फलन्ति वृक्षाः परोपकाराय वहन्ति नद्यः।
परोपकाराय दुहन्ति गावः परोपकारार्थ मिदं शरीरम्॥
परोपकार के लिए वृक्ष फल देते हैं, नदियाँ परोपकार के लिए ही बहती है और गाय परोपकार के लिए दूध देती हैं। अर्थात् यह शरीर भी परोपकार के लिए ही है।

निवेदक
पंडित कृष्ण वल्लब शर्मा
(9414009285)
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दिल का दर्द : भगवान तू जालिम क्यों बन गया! | Human Story

✍ Sumit Saraswat 'SP'
हेमंत और रितु ने कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा कि उनकी शादी ऐसे गमगीन माहौल में होगी। उन्होंने क्या, किसी ने भी नहीं सोचा होगा कि कोई शादी ऐसी दर्दनाक भी होगी। जहां खुशियों की शहनाई बजनी थी वहां मातमी सन्नाटा पसरा था। जीवनसाथी के साथ जन्मों का रिश्ता जोड़ने के लिए अग्नि के सात फेरे लेते वक्त उत्साह की बजाय उदास हेमंत के पैर लड़खड़ा रहे थे। मांग भरते वक्त हाथ कांप रहे थे। मुस्कुराने की बजाय रितु रो रही थी। यह पता लगने पर आज मैं रो रहा हूं। जब से इनके विवाह की तस्वीरें देखी और जानकारी हुई तब से हृदय विचलित है। रोंगटे खड़े हो गए। दिल भर आया। नम आंखों से उस भगवान को कोसने के लिए यह लिख रहा हूं जिसकी जिम्मेदारी थी इस विवाह को आनंदमय बनाने की। यह शिकायत सिर्फ और सिर्फ उस दिव्यात्मा के लिए है जिसे हम परमात्मा कहते हैं। जिससे उम्मीद करते हैं कि हमारे संकट में वो काम आएगा।


अरे निर्दयी, हमने सोचा नहीं था कि तू खुशियों के बीच ऐसा दर्द देगा। इतना नाराज क्यों हो गया, अगर वो परिवार गजानंद को मनाना भूल गया। क्या हो गया अगर हलवाई ने चूल्हा जलाने से पहले अग्नि को भोग नहीं लगाया। क्या फर्क पड़ गया तूझे अगर मायरा रस्म से पहले तेरे लिए कपड़े नहीं निकाले। 
जालिम न जाने कौनसी बात तुझे अखर गई कि तूने रक्षाबंधन पर सुख और सुरक्षा के वादे करने वाले भाई-बहनों को भी नहीं बख्शा। दोनों भाई अपने भांजे की शादी में बहन को चुनरी ओढ़ाने आए थे। उन्होंने सपने में भी कल्पना नहीं की होगी कि मायरे में जो चुनरी वो बहन को ओढ़ा रहे हैं वो कफन बन जाएगी। बहन की मौत के बाद भाई पीहर की चुनर ओढ़ाते हैं तूने तो जीते जी आखिरी चुनरी ओढ़वा दी। बेशर्म थोड़ी तो शर्म करता।
कहर बरपाने से पहले एक पल सोच तो लेता कि क्या बीतेगी इस परिवार पर। शेरवानी पहनकर शादी करने वाले दूल्हे ने आंखों में आंसू लेकर सामान्य शर्ट और जींस में नंगे पैर शादी की। घोड़ी पर सवार होकर शादी के लिए आने वाले शहजादे को देखने का सपना संजोए दुल्हन की दिली ख्वाहिश धमाके में धूमिल हो गई। यह नवविवाहित जोड़ा अपनी शादी में हुआ मौत का मंजर कभी भुला नहीं पाएगा। जो मां निकासी के वक्त घोड़े पर बैठे बेटे की बलाइयां लेती उसी मां की अर्थी को बेटा कंधों पर लेकर श्मशान जाएगा। जब भी इस जोड़े की वैवाहिक वर्षगांठ होगी तब यह खुशियां नहीं मनाएगा बल्कि इस हादसे को याद करते हुए कांपेगा।
ध्यान है हमें कि कलयुग चल रहा है और तेरी ऐसी हरकतों से ही तो लोगों को कलयुग का एहसास होगा। बड़ा शातिर है रे तू। हलवाई को मौत का माध्यम बनाकर बदनाम कर दिया। उन नेताओं को नजरअंदाज कर दिया जिन्होंने आबादी क्षेत्र में ऐसी व्यावसायिक गतिविधियों को अनदेखा किया। समाज सेवा के नाम पर चांदी कूटने वालों को चर्चा में ही नहीं आने दिया। उन अधिकारियों को भी चतुराई से बचा लिया जिनकी जिम्मेदारी है इन घटनाओं को रोकना। और तो और घटना के बाद अगर मलबे में दबा कोई जीव जिंदा हो तो उसे बचा न सकें इसलिए संसाधन भी उपलब्ध नहीं होने दिए। खाली हाथ भेज दिया बचाने वालों को। क्या गजब खेल रचाया! तालियां बजानी चाहिए तेरे इस खेल पर। लेकिन नहीं बजा पा रहे। रो रहे हैं उन लाशों को देखकर जो एक के बाद एक मलबे से निकलती जा रही है। कल जब एक मजदूर हाथों में मासूम से बच्चे की लाश उठाकर लाया तब सभी देखने वाले भावुक हो गए। छोटे-छोटे हाथों से उसकी मासूमियत को महसूस कर लिया। हम लोग कहते हैं कि बच्चे भगवान का रूप होते हैं, तू उनको तो बख्श देता पापी। सुन, अगर इस तरह की मौत देने के लिए धरती पर भेजा है ना, तो नहीं चाहिए ऐसी जिंदगी। अगर तेरे पास कमी पड़ गई थी और मौत देकर इंसानों को बुलाना था तो कोई और जरिया अपना लेता। शादी में आकर जो तांड़व किया, वो अच्छा नहीं।
पता है उस क्षेत्र में कई मकान क्षतिग्रस्त हो गए। उन घरों में रहने वाले परिवार इधर-उधर छुपे हैं। भोजन-पानी भी मुश्किल से नसीब हो रहा है। अंधेरे में रातें गुजारनी पड़ रही है। बुजुर्गों का तो दम भरने लगा है। कुछ तो सांसों को सुचारू रखने के लिए अस्पताल पहुंच गए हैं। कई लोग अपनों की आस लगाए तलाश में भटक रहे हैं। कितने और शव मलबे में दबे हैं किसी को खबर नहीं। शादी वाले घरों में मातम छाया हुआ है। जो खिलखिलाते चेहरे शादी के एलबम में आने थे उनकी तस्वीरें अब माला के साथ दीवारों पर टंग गई है। पूरा प्रदेश हिल गया तेरी इस हरकत से। ब्यावर, अजमेर, जोधपुर, पीपाड़ सिटी में तो हर शख्स की जुबां पर सिर्फ इसी घटना की चर्चा है। चुनावी साल में नेताओं को राजनीतिक मसाला भी मिल गया। वो मौत के मुआवजे पर चटकारे ले रहे हैं। मृतकों और घायलों के परिवार का क्या हाल है, किसी को मतलब नहीं। खैर, तूझे क्यों पता होगा। तू तो तमाशबीन बना ऊपर से देख रहा होगा उन लोगों की तरह जो मौके पर मातमी मंजर को मनोरंजन समझकर देखने उमड़े हैं। -सुमित सारस्वत, सामाजिक चिंतक, मो.09462737273

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February 17, 2018

सीएम राजे ब्यावर आकर करेंगी देवी और शंकर के दर्शन | CM Raje in Beawar

सूबे की मुखिया श्रीमति वसुंधरा राजे का होली बाद ब्यावर आना प्रस्तावित है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री राजे आगामी 18 मार्च को ब्यावर आ सकती हैं। उन्होंने यह संकेत कर दिए हैं। वे यहां आमजन से मुलाकात कर विशाल जनसभा को संबोधित करेंगी। साथ ही नीलकंठ तीर्थस्थल पर जाकर भगवान शंकर और माता वैष्णोदेवी के दर्शन भी करेंगी। हालांकि सीएम के दौरे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। मुख्यमंत्री के ब्यावर आगमन पर जिले की घोषणा होना अभी तय नहीं है। गौरतलब है कि बीते कुछ समय में ब्यावर से जयपुर गए भाजपा नेता व कार्यकर्ता मुख्यमंत्री से ब्यावर आगमन के लिए कई बार आग्रह कर चुके हैं। जन भावनाओं को ध्यान में रखते हुए संवेदनशील सीएम ने ब्यावर आने का मन बनाया है। -सुमित सारस्वत, मो.09462737273

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February 13, 2018

धूमधाम से मनाएंगें बाबा श्याम का नवां रंगीला फागण महोत्सव

श्री श्याम मंदिर में 21 से 27 फरवरी तक होंगे कई आयोजन

ब्यावर में श्री श्याम परिवार की ओर से नवां रंगीला फागण महोत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा। महोत्सव आयोजन को लेकर फतेहपुरिया चौपड़ स्थित श्री श्याम मंदिर में सुनील कौशिक की अध्यक्षता में बैठक हुई। इसमें सुमित सारस्वत ने तीन दिवसीय उत्सव को सात दिवसीय महोत्सव के रूप में आयोजित करने का प्रस्ताव रखा। इस पर सभी ने सहमति देते हुए हर्ष जताया।


सारस्वत ने बताया कि इस बार बाबा श्याम का नवां रंगीला फागण महोत्सव आगामी 21 से 27 फरवरी तक मनाया जाएगा। सात दिन तक मंदिर प्रांगण में कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। ग्यारस के दिन नगर में बाबा की भव्य शोभायात्रा व विशाल फाग महोत्सव का विशेष आयोजन होगा। इसके अलावा सुंदरकांड पाठ, भजन संध्या, श्याम ज्योत अखंड पाठ, पंचामृत अभिषेक, महाआरती, श्याम संकीर्तन, होली रसिया जैसे कार्यक्रम भी होंगे। महोत्सव के लिए शहर के सभी धार्मिक मंडलों व संस्थाओं को आमंत्रित किया जाएगा। मंदिर को सतरंगी रोशनी व पर्दों से आकर्षक रूप में सजाया जाएगा। बाबा को प्रतिदिन विशेष प्रसाद का भोग लगेगा।


आयोजन की भव्यता के लिए परिवार के सदस्यों को जिम्मेदारियां सौंपी गई है। बैठक में मुकेश गर्ग, दिलीप खत्री, श्याम सिंहल, राधेश्याम प्रजापति, निशांत मंगल, विकास शर्मा, विनेश कौशिक, मनोज शर्मा, गौरव गर्ग, चर्चित मंगल, अंकुर मित्तल, पुलकित सिंहल, विजय मंडोरा, मयंक सिंहल, संस्कार मंगल, मनोज अग्रवाल, सुनील सिंहल, मुकेश गुप्ता, अशोक गोयल, चिराग गर्ग व अन्य सदस्य शामिल थे।


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February 11, 2018

फागण आयो रंगीलो रंग डालो श्यामजी.. | Fag Utsav in Bankebihari Temple

बांकेबिहारी मंदिर में कान्हा संग झूमी किशोरी

राधा-रासबिहारी का दरबार, होली के रसिया गीत, फागण की मस्ती, फूलों की बौछार और कान्हा संग झूमती किशोरी। यह नजारा दिखा रविवार को श्री बांकेबिहारी मंदिर में आयोजित ‘होली के रंग, कान्हा किशोरी संग’ कार्यक्रम में। यहां विजया एकादशी के मौके पर किशोरी सखी मंडल की ओर से फाग महोत्सव का आयोजन किया गया।


भजन गायिका कांता सोमानी ने मच रही रणत भंवर में होली खेले गणपति महाराज.. भजन से कार्यक्रम की शुरूआत की। इसके बाद आनंदी सोनी ने रंग मत डाले रे सांवरिया.., अंजू गर्ग ने दिल दिया मैंने उस सांवरे को.., रेखा सोनी ने कानूड़ा को दिल लुट ले गई गुजरी.., लता शर्मा ने फागण आयो रंगीलो रंग डालो श्यामजी.., आरती सोमानी ने कान्हा थारी होली मैं खेलूंगी रंग गुलाल से.., नीलम चौहान ने मेरो टूट गयो बाजूबंद श्याम थारी होली में.., लता शर्मा ने ग्यारस फागण की आई.., स्वाति मेहता ने भागा रे नंदलाला राधा ने पकड़ा रंग डाला.. जैसे मधुर भजनों की प्रस्तुति दी।
श्री बांकेबिहारी मंदिर में फागण के भजनों की प्रस्तुति देते गायक।
मधु सोलीवाल व तनीषा सोलीवाल ने श्याम रंग मन भायो मेरे.., सुमित सारस्वत ने प्यारा सांवरिया थारा ठाठ देखकर मन हरषावे.., भागचंद चौहान ने आज बिरज में होली रे रसिया.. भजन के साथ धमाल गीत गाए तो सभी भक्त झूम उठे। 
फागण के भजनों पर घुंघट के साथ प्रस्तुति देती किशोरी सखी मंडल सदस्य।
भक्तों ने फाग रसिया का आनंद लेते हुए फूलों की होली खेली। पंडित जितेंद्र दाधीच, लक्ष्मीप्रकाश आकोलावाला, महेश सिंहल ने ठाकुरजी का श्रृंगार कर सुंदर दरबार सजाया। 
विजया एकादशी के मौके पर सुसज्जित श्री बांकेबिहारीजी व राधारानी।
कार्यक्रम में विमला शर्मा, मीनाक्षी भारद्वाज, वंदना शर्मा, प्रिया शर्मा, साधना सारस्वत, शालू सोमानी, राधा चतुर्वेदी, उषा गर्ग, पिंकी शर्मा, दीपिका सिंहल, अंजू पांडे, कीर्ति मालपानी, सारिका यादव, राममूर्ति शर्मा, कौशल्या फतेहपुरिया, मीनू शर्मा, कंचन अरोड़ा, सरला शर्मा, मधु हेमलानी, संध्या प्रजापति, रजनी शर्मा, रिंकू माहेश्वरी, चंचल सोनी, कविता शर्मा, सुलेखा झा, भारती कुमावत, कोमल चतुर्वेदी, गौरांशी, राधेश्याम डाणी, जितेंद्र सोनी, महेंद्र सलेमाबादी, सतीश गर्ग, विजय अनुरोध, अशोक गोयल, लोकेश पाराशर, मुकेश चौहान सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने आनंद लिया। महाआरती के बाद प्रसाद वितरण किया गया।
बिहारीजी के दरबार में किशोरी सखी मंडल व पारिवारिक सदस्य।

देखिए : बांकेबिहारी मंदिर में भजन




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February 5, 2018

सांवरिया आपा होली तो खेलां जी, फागणियो आ गयो.. | Holi Bhajan

फाल्गुन का महीना, श्रीजी बाबा का चित्ताकर्षक दरबार, फूलों की झमाझम बौछार और गोपाल के भजनों पर झूमते रसिया। मन को आनंदित कर देने वाला यह नजारा दिखाई दिया ब्यावर के श्री विहार स्थित सतलज में। यहां रसिकों के रसिया रास बिहारी ठाकुर का छठा विशाल फाग महोत्सव आयोजित किया गया। इसमें श्री श्यामा श्याम वंदना परिवार की ओर से मधुर भजनों की मंदाकिनी बहाई गई।


गायक गोपाल वर्मा ने भगवान गणेश व हनुमान वंदना के साथ कार्यक्रम की शुरूआत की। इसके बाद शब्द रूपी रंग बिखेरते हुए सांवरिया आपा होली तो खेलां जी.., आज बिरज में होली रे रसिया.., रंग मत डाले रे सांवरिया.., रोज-रोज नहीं आना यह फागुण.., होली का रसिया.., खेलन सखियन सो फाग मेरो लाला जावे सासरिए.. जैसे होली भजनों की सुमधुर प्रस्तुति देकर फाग की मस्ती लुटाई। ढोल और चंग की थाप के साथ घूमर और धमाल की धुनों पर भक्त झूम उठे। करीब चार घंटे तक लगातार रंग-बिरंगे फूल बरसते रहे। कार्यक्रम में पहुंचा हर भक्त अपनी उम्र और ओहदे को भूलकर झूमता हुआ फाग के रंग में रंगा नजर आया। आयोजक राकेश शर्मा ने आत्मीयता के साथ सभी का स्वागत किया।
कार्यक्रम में नवनीत हेड़ा, एन.के. मिश्रा, एस.के. सोनी, सुमित सारस्वत, एम.एम. राठी, पंकज शर्मा, रवि शर्मा, अनुराग जैन, के.के. जैन, सुनील गुप्ता, अंजू हेड़ा, प्रीति शर्मा, विजेता तिवारी, खूशबू जैन, उर्मिला भाटी, शालिनी शर्मा, चंचल सोनी, संगीता पसारी, तारा सोनी, रेनु मिश्रा, सुनीता शर्मा, विनीता जैन, मोनू अरोड़ा, विजय तंवर, अनिरुद्ध शर्मा, राहुल अग्रवाल, हेमंत शर्मा, गौतम सोलीवाल, अशोक पसारी, सतीश गर्ग, विक्रम सोलीवाल, मनमोहन पाराशर, मनीष तिवारी, मदनमोहन जोशी, नीलू रावत, सुरेंद्र, गिरिजाशंकर, मुरली मनोहर, राजेंद्र, विजय, दीनदयाल, कंचन, अलका, पिंकी, सुनीता, उषा, कीर्ति, रेणु, प्रिंसी, रितिका सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिकों ने धर्मलाभ लिया। -सुमित सारस्वत, मो.09462737273


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February 2, 2018

ब्रज में बिखरने लगे होली के रंग | Holi Festival Celebration in Mathura

ब्रज के विश्वप्रसिद्ध द्वारिकाधीश मंदिर में भगवान द्वारिकाधीश को अबीर गुलाल लगाकर 40 दिन चलने वाले होली महोत्सव की शुरुआत हो गई है। श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर बसंत पंचमी से होली मनाई जा रही है। यहां मंदिर में रोजाना राजभोग आरती के समय सुबह 10 से 11 बजे तक होली के रसिया का गायन हो रहा है। भक्त उत्साह के साथ होली मना रहे हैं। हम ठाकुरजी की नगरी से खास आपके लिए लाएं हैं मन को आनंदित कर देने वाली यह तस्वीरें। आप देख सकते हैं भक्त ठाकुरजी के रंग में रंगने को किस तरह बेताब हैं। इस रंग के लिए यहां देश-विदेश से भक्त आते हैं। हर तरफ मंदिरों में होली के गीत गूंज रहे हैं। ठाकुरजी को ढपली की थाप के साथ ही होली के गीत और रसिया सुनाए जा रहे हैं। 24 फरवरी को बरसाना में ऐतिहासिक लठमार होली खेली जाएगी। इस बार ब्रज की यह होली यादगार होगी। पूरे मथुरा को रंग बिरंगी रोशनी से सजाया जाएगा। सभी पांच हजार मंदिरों में होली की धूम रहेगी। ब्रज के बरसाना गांव की होली के संबंध में मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण और राधा ने भी यहां होली खेली थी। होली की इस परंपरा का चलन आज भी उसी प्रकार जारी है। यही वजह है कि यहां मंदिरों में होली के रंग सबसे पहले उड़ते हैं। राधा-कृष्ण के चरणों में गुलाल अर्पित की जाती है। उसके बाद ही होली के त्योहार की धूम होती है। ब्रज भूमि से सुमित सारस्वत की रिपोर्ट।




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