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December 31, 2017

राजा बने रघुरइया, अवध में बाजे बधइया..

प्रभु की बगिया में आयोजित रामकथा का रविवार को विराम हुआ। विराम सत्र में संत उमाशंकर महाराज ने राज्याभिषेक का प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि यदि रामचरित मानस की एक चौपाई भी मनुष्य अपने जीवन में उतार ले तो उसका जीवन सार्थक हो जाता है।



राज्याभिषेक करते हुए संत ने कहा कि कोई संपत्ति अपने बेटों को देता है तो कोई बेटी, बहू को देता है। संपत्ति देना और लेना तो ठीक है परंतु उस संपत्ति का सही उपयोग हो तभी देना और लेना उचित है। यही जीवन का प्रथम राज्याभिषेक है। राम को वनवास होना और फिर अवध का राजा बनना यह संदेश देता है कि जीवन में सुख और दुख आते हैं मगर हर परिस्थिति में प्रसन्न रहना चाहिए। कथा में चिया उपाध्याय, प्रान्वी शर्मा, श्रेया उपाध्याय, नमन दगदी, कुमकुम दगदी, सपना दगदी, खुशी परिहार ने श्रीराम राज्याभिषेक प्रसंग का सजीव मंचन किया। भगवान के अवध लौटने पर सभी ने पुष्प वर्षा के बीच उत्सव मनाया।
कथा में अंकुर उपाध्याय, अभय शर्मा, जी.के. श्रीवास्तव, अरूण गर्ग, गोपाल वर्मा, सत्यनारायण अग्रवाल, सुमित सारस्वत, अजय शर्मा, दिनेश चतुर्वेदी, बुधराज चौहान, मोहन दगदी, मृदुला उपाध्याय, अर्चना शर्मा, वंदना शर्मा, रजनी शर्मा, साधना सारस्वत, ज्योति अग्रवाल, प्रिया शर्मा, मधु शर्मा, सुमित्रा जैथल्या, कृपाली तंवर, नीतू दगदी, सीमा टांक, डी.के. व्यास, आर.के. गुप्ता, हरी तंवर, अजय गोला, आशीष, हर्षुल गर्ग, चिरायु गर्ग, जय तंवर, रमेश शर्मा, श्याम शर्मा, माणक डाणी, दिलीप सेन, नरेंद्र बोहरा सहित सैंकड़ों श्रद्धालुओं ने धर्मलाभ लिया। सोमवार को हवन व पूर्णाहुति होगी।   -सुमित सारस्वत, मो.09462737273

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December 30, 2017

सच्चे भक्त पर ऐसे बरसती है प्रभु कृपा

ब्यावर स्थित प्रभु की बगिया में आयोजित रामकथा में संत उमाशंकर महाराज ने शबरी प्रसंग की कथा सुनाकर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। कथा में शबरी के राम के अगाध प्रेम को विस्तारपूर्वक बताया कि युगों-युगों तक ऐसा प्रेम का उदाहरण कहीं और नहीं मिलता।



कथावाचक ने भगवान राम के वनवास की कथा सुनाते हुए कहा कि वनगमन के समय प्रभु की अन्नय भक्त शबरी अपनी कुटिया में अपनी पलकें बिछाकर प्रेम से झूठे बेर चखकर रखती थी। आज भगवान कुटिया की तरफ से पधार रहे हैं। यह करते-करते भगवान के आने की प्रतीक्षा में वर्षों बीत जाता है। फिर भी शबरी हार नहीं मानती, आखिर भगवान अपनी संगिनी सीता की तलाश में वन के रास्ते शबरी की कुटिया में पहुंचते हैं। प्रभु को पाकर माता शबरी धन्य हो जाती है। अपने चखे हुए झूठे बेर को बड़े ही प्रेम भाव से भगवान को खिलाती है।
संत ने कहा कि नारायण प्रेम के भूखे हैं। जो भी भक्त प्रभु को सच्चे मन से याद करता है उन पर प्रभु की कृपा अपने आप बरसती है। भगवान स्वयं शबरी के पास आए क्योंकि शबरी का मन और कर्म निर्मल था। निर्मल कर्म वालों के पास भगवान स्वयं आते हैं। कथा में शबरी प्रसंग एवं राम-हनुमान मिलन का सजीव मंचन किया गया।
महाराज ने मुख्य यजमान दामोदर अग्रवाल, सत्यनारायण अग्रवाल, ज्योति अग्रवाल, जगन्नाथ गोला, अजय गोला, आर.के. गुप्ता, आगरा से आए आनंद शर्मा, कोटा से अजय शर्मा, वंदना शर्मा, विनोद शर्मा, अर्चना शर्मा, गुड़गांव से शकुंतला शर्मा, धौलपुर से सत्यनारायण, जयपुर से महेंद्र कटारा, सत्यदेव भारद्वाज, रामअवतार तिवारी, डॉ.आनंद शर्मा को दुपट्टा पहनाकर आशीष दिया।


कथा में शोभा तिवारी, दीपा शर्मा, रमा शर्मा, जी.के. श्रीवास्तव, अरूण गर्ग, बुधराज चौहान, मोहन दगदी, गोपाल वर्मा, सुमित सारस्वत, मृदृला उपाध्याय, साधना सारस्वत, शकुंतला शर्मा, रमा शर्मा, सुमन शर्मा, मंजू शर्मा, सुमन पालड़िया, सुमित्रा जैथल्या, नीता, सपना, दिनेश चतुर्वेदी, रमेश शर्मा, रामप्रसाद मित्तल, ओमप्रकाश दगदी, मुकुट बिहारी गोयल, मोहन सिंह रावत, दिलीप सेन सहित सहित सैंकड़ों श्रद्धालुओं ने धर्मलाभ लिया। अंकुर उपाध्याय ने बताया कि रविवार को अशोक वाटिका में हनुमान-सीता संवाद व राम राज्याभिषेक प्रसंग का सजीव मंचन किया जाएगा। -सुमित सारस्वत, मो.09462737273

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December 29, 2017

प्रभु सेवा से उत्पन्न होता है प्रेम, सच्चा हुआ तो दोनों तरफ रहेगा

ब्यावर स्थित प्रभु की बगिया में आयोजित श्रीराम कथा में संत उमाशंकर महाराज ने रामहि केवल प्रेम अधारा.. चौपाई सुनाते हुए कहा कि ठाकुरजी केवल प्रेम के भूखे हैं। उन्हें सिर्फ भक्त का प्रेम चाहिए। प्रेम सेवा से उत्पन्न होता है। ठाकुरजी की सेवा करोगे तो प्रेम स्वतः ही उत्पन्न हो जाएगा। उन्होंने कहा कि मांगने से जो मिलता है उससे तृप्ति नहीं हो सकती है। बिना मांगे जो मिलता है उससे ही तृप्ति होती है। शब्द नहीं, भाव को समझना चाहिए।


कथावाचक ने कहा कि सच्चा प्रेम होगा तो वो दोनों तरफ रहेगा। ठाकुरजी को प्रेम करोगे तो निश्चित ही वो भी आपको प्रेम करेंगे। भक्ति का प्रदर्शन नहीं, दर्शन होना चाहिए। जहां भी भक्ति में दिखावा होगा, प्रदर्शन होगा, वहां भक्ति में विक्षेप आएगा। मृत्यु ऐसी हो कि रुदन हो। जिसके लिए जगत रोए वो ही वास्तविक मृत्यु है। अच्छे कर्म से ही व्यक्ति को याद किया जाता है।
महाराज ने भरत प्रसंग सुनाते हुए कहा कि भरत का चरित्र समुद्र की भांति अगाध है। बुद्धि की सीमा से परे है। लोक-आदर्श का ऐसा अदभुत सम्मिश्रण अन्यत्र मिलना कठिन है। भ्रातृ प्रेम की तो ये सजीव मूर्ति थे। ननिहाल से अयोध्या लौटने पर जब इन्हें माता से अपने पिता के स्वर्गवास का समाचार मिलता है, तब वे शोक से व्याकुल होकर कहते हैं- मैंने तो सोचा था कि पिताजी, श्रीराम का अभिषेक करके यज्ञ की दीक्षा लेंगे, किन्तु मैं कितना बड़ा अभागा हूं कि वे मुझे बड़े भैया श्रीराम को सौंपे बिना स्वर्ग सिधार गए। अब श्रीराम ही मेरे पिता और बड़े भाई हैं, जिनका मैं परम प्रिय दास हूं। उन्हें मेरे आने की शीघ्र सूचना दें। मैं उनके चरणों में प्रणाम करूंगा। अब वे ही मेरे एकमात्र आश्रय हैं। जब कैकेयी ने भरत को श्रीराम के वनवास की बात बताई तब वे महान दुख से संतप्त हो गए। उन्होंने कैकेयी से कहा कि मैं समझता हूं, लोभ के वशीभूत होने के कारण अब तक यह न जान सकी कि मेरा श्रीरामचन्द्र के साथ भाव कैसा है। इसी कारण राज्य के लिए इतना बड़ा अनर्थ कर डाला।
राम भक्त ले चला राम की निशानी, शीष पे खड़ाऊ अंखियों में पानी.. भजन पर श्रोता भावुक हो गए। तनीश उपाध्याय ने राम, श्रेया उपाध्याय ने सीता, माहिन शर्मा ने भरत, केशव शर्मा ने लक्ष्मण के रूप में वन गमन व भरत चरित्र प्रसंग का सजीव मंचन किया। गोपाल वर्मा, सुमित सारस्वत, बबलू अग्रवाल ने सुंदर झांकी सजाई।


कथा में प्रसन्न गणपति मंदिर के महंत फतेहगिरी, आर.के. गुप्ता, जी.के. श्रीवास्तव, दिनेश चतुर्वेदी, मृदुला उपाध्याय, साधना सारस्वत, ज्योति अग्रवाल, सुमित्रा जैथल्या, ललिता भाटी, अर्चना शर्मा, वंदना शर्मा, सीमा टांक, प्रिया शर्मा, कंचन तंवर, प्रमिला शर्मा, मोहन दगदी, बुधराज चौहान, अरूण गर्ग, हर्षुल, रजनी शर्मा, मधु शर्मा सहित सैंकड़ों श्रद्धालुओं ने धर्मलाभ लिया। शनिवार को शबरी। प्रसंग व सीता अन्वेषण प्रसंग का सजीव मंचन किया जाएगा।  -सुमित सारस्वत, मो.09462737273

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गीता, गुरु ग्रंथ, बाइबिल और कुरान को साक्षी मानकर 1922 जांबाजों ने ली राष्ट्र रक्षा की शपथ

गीता, गुरु ग्रंथ, बाइबिल और कुरान को साक्षी मानकर केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के 1922 रंगरूटों ने देश की आंतरिक और औद्योगिक सुरक्षा की शपथ ली। मौका था शुक्रवार को सीआईएसएफ के राजस्थान के देवली स्थित प्रशिक्षण केन्द्र में आयोजित भव्य दीक्षान्त परेड का। अपर महानिदेशक एमए गणपति और उप महानिरीक्षक डॉ. एसके मल्लिक की मौजूदगी में ये सभी जवान केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल जैसे गौरवशाली संगठन का हिस्सा बनकर देश की सुरक्षा के लिए निकले। इनमें देश के सभी राज्यों  के जांबाज शामिल थे।


करीब 5400 रंगरूटों को एक साथ प्रशिक्षण देने के कारण लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में इस ट्रेनिंग सेंटर का नाम दर्ज है। देश के विभिन्न राज्यों से यहां रंगरूट प्रशिक्षण लेने आते हैं और देश के लिए मर-मिटने की भावना से समर्पित होने के साथ सभी क्षमताओं में परिपूर्ण होकर निकलते हैं।

मुख्यमंत्री राजे ने दी बधाई
मुख्यमंत्री श्रीमती वसुन्धरा राजे ने इन सभी बहादुर जवानों को बधाई और शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि जिस जज्बे और अनुशासन के साथ ये सभी नौजवान राष्ट्र सेवा के लिए समर्पित हो रहे हैं वह हमारे लिए गर्व का विषय है। हम सबको इन जांबाजों से प्रेरणा लेनी चाहिए।
हर चुनौती को तैयार जवान
मुख्य अतिथि अपर महानिदेशक गणपति ने केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल को राष्ट्रीय सुरक्षा की महत्वपूर्ण कड़ी बताते हुए कहा कि बल के जवान हर चुनौती का सामना करने के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं। उन्होंने जवानों से आव्हान किया कि वे अपनी क्षमताओं का निरन्तर विकास करें और देश की सुरक्षा के लिए हमेशा अपना सर्वस्व न्यौछावर करने के लिए तैयार रहें। उन्होंने परेड का निरीक्षण कर मार्च पास्ट की सलामी ली। परेड में शामिल बहादुर जवानों का उपस्थित जनसमूह ने करतल ध्वनि से उत्साह बढ़ाया।

अब तक की सबसे बड़ी दीक्षान्त परेड
प्रशिक्षण केन्द्र के प्राचार्य एवं डीआईजी डॉ. एसके मल्लिक ने कहा कि 55 वीं दीक्षान्त परेड अब तक की सबसे बडी दीक्षंात परेड है। उन्होंने कहा कि 1984 से स्थापित यह केन्द्र अब तक 50 हजार आरक्षकों को प्रशिक्षण दे चुका है। आरक्षक एवं जीडी के पद पर नियुक्त युवाओं को 39 सप्ताह का प्रशिक्षण दिया गया है। सभी आरक्षक देश की आंतरिक एवं औद्योगिक सुरक्षा के लिए पूरी तरह तैयार हैं। इन्हें आधुनिक हथियारों के साथ विभिन्न परिस्थितियों में चुनौतियों का सामना करने के लिए दक्षता के साथ तैयार किया गया है।
जांबाजों का रोमाचंक प्रदर्शन
परेड़ के दौरान जांबाजों की हैरतअंगेज प्रस्तुतियों की सभी ने सराहना की। कार्यक्रम में केरल का करेली मार्शल आर्ट, साईलेंट ड्रिल, मल्लखम्भ, मार्शल आर्ट काता, चाइनीज मार्शल आर्ट, झारखण्ड एवं पश्चिमी बंगाल का प्रसिद्ध छांउ नृत्य एवं आकर्षक कलाओं का प्रदर्शन किया गया।
उत्कृष्ट आरक्षक विशिष्ट मैडल से सम्मानित
प्रशिक्षण के दौरान उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले जवानों आरक्षक रोहित सिंधे, उम्मेदसिंह, गणेश सिंह राजपूत, विनय कुमार, हेमंगा सोनवाल, राकेश भाल, मनोज कुमार मकवाना, परेश कुमार, इस्लावद भरत, रविकुमार माण्डलिया को इस अवसर पर विशिष्ट मैडल से सम्मानित किया गया। परेड़ का नेतृत्व आरक्षक रविकुमार माण्डलिया ने किया और कमाण्डेंट भूपेन्द्रसिंह ने सभी का आभार व्यक्त किया।
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December 28, 2017

कथा ही मिटाती है मन की व्यथा : डॉ. देवर्षिदास महाराज

ब्यावर स्थित प्रभु की बगिया में आयोजित श्रीराम कथा में पाली के जानकीनाथ मंदिर आश्रम से पधारे 108 वर्षीय स्वामी रामाशंकरदास महाराज व बर के सिद्ध आश्रम से पधारे डॉ. देवर्षिदास महाराज ने आशीर्वचन दिया।
उन्होंने कहा कि कथा ही व्यथा मिटाती है। कथा कोई भी हो उसे सुनकर जीवन की सारी व्यथा मिट जाती है। कथा हरि दर्शन करवाती है। अवध के संत उमाशंकर महाराज, मोहन दगदी, बुधराज चौहान, अरूण गर्ग, बबलू अग्रवाल, जी.के. श्रीवास्तव, डी.के. व्यास, दिनेश चतुर्वेदी, मृदुला उपाध्याय, अर्चना शर्मा, मोहन सिंह रावत ने संतों का स्वागत किया। मंच संचालन सुमित सारस्वत ने किया। कथा में पी.पी. शर्मा, नटवर अरोड़ा, उम्मेद शर्मा, हेमंत भाटी, कांता सोमानी, सीता अग्रवाल, प्रिया शर्मा, मनीषा गर्ग, अंकुर उपाध्याय सहित सैंकड़ों श्रद्धालुओं ने धर्मलाभ लिया। -सुमित सारस्वत, मो.09462737273



भजन सुनें : सांवरिया तेरी याद में..

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अवध के संत बोले, अब तंबू में नहीं रहेंगे राम

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अवध के संत बोले, अब तंबू में नहीं रहेंगे राम


अवध के संत उमाशंकर महाराज ने ब्यावर में आयोजित श्रीराम कथा में कहा कि अब अयोध्या में भगवान श्रीराम को तंबू में नहीं रहना पड़ेगा। अब अच्छे दिन आ गए हैं। जल्द ही भगवान राम के लिए भव्य मंदिर निर्माण होगा और भक्त वहां बैठकर रामकथा करेंगे।


कथावाचक ने कहा कि भगवान श्रीराम का वर्चस्व सर्वत्र होना चाहिए। उनकी कीर्ति चहुंओर फैले ये विचार करके ही कैकयी मां ने राजा दशरथ से राम के लिए चौदह वर्ष का वनवास मांगा। मंथरा चाहती थी कि राम का वनवास आजीवन होना चाहिए मगर कैकयी की इच्छा से चौदह वर्ष का वनवास हुआ। उनकी इच्छा थी कि भगवान राम चौदह सोपान चढ़कर विजय प्राप्त करेंगे तो ही विश्व में राम राज्य स्थापित होगा। राम राज्य में आवास, अन्न, वस्त्र की प्रचुरता हो और अवधवासी निर्भिक होकर रहें।
संत ने कहा कि मन ही सुख-दुख का कारण होता है। मन के अनूकूल वातावरण हो तो सुखी रहते हैं और मन के प्रतिकूल वातावरण होगा तो दुखी रहेंगे। सुख की प्राप्ति भीतर से होती है और दुख बाहर से आता है। इच्छाओं की पूर्ति नहीं होती तो दुखी होते हैं। मन में कोई इच्छा नहीं होगी तो ही सुख मिल सकता है।
कथा में पाली के जानकीनाथ मंदिर आश्रम से पधारे 108 वर्षीय स्वामी रामाशंकरदास महाराज व बर के सिद्ध आश्रम से पधारे डॉ. देवर्षिदास महाराज ने भी आशीर्वचन दिया। कथा में पी.पी. शर्मा, नटवर अरोड़ा, उम्मेद शर्मा, हेमंत भाटी, कांता सोमानी, सीता अग्रवाल, प्रिया शर्मा, मनीषा गर्ग, अंकुर उपाध्याय, मोहन दगदी, बुधराज चौहान, अरूण गर्ग, बबलू अग्रवाल, जी.के. श्रीवास्तव, डी.के. व्यास, दिनेश चतुर्वेदी, मृदुला उपाध्याय, अर्चना शर्मा, मोहन सिंह रावत सहित सैंकड़ों श्रद्धालुओं ने धर्मलाभ लिया। मंच संचालन सुमित सारस्वत ने किया। शुक्रवार को भरत चरित्र व शबरी प्रसंग सुनाया जाएगा। राम के वन गमन का सजीव मंचन किया जाएगा। -सुमित सारस्वत, मो.09462737273

भजन सुनें : सांवरिया तेरी याद में..

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December 27, 2017

प्रभु की बगिया में भगवान राम-जानकी विवाह देखने उमड़ा सैलाब

प्रभु की बगिया में आयोजित श्रीराम कथा के पंचम दिवस संत उमाशंकर महाराज ने श्रीराम व जानकी का विवाह प्रसंग सुनाते हुए कहा कि जीव का परमात्मा से मिलन ही विवाह है। गृहस्थ जीवन को सुखमय बनाने के लिए पति-पत्नी में तालमेल व प्रेम जरूरी है। प्रेम से रहने वाला घर स्वर्ग है।


संत ने दहेज को महापाप बताते हुए कुप्रथा का विरोध किया। उन्होंने कहा कि शिक्षित समाज में आज भी दहेज की परंपरा समाप्त नहीं हुई है। बहु को लक्ष्मी मानोगे तो घर में धन की कमी नहीं रहेगी। दहेज प्रताड़ना से धन समाप्त होता है। उन्होंने कहा कि जीवन में संतोष, शांति व प्रेम ही सच्चा सुख है। हरिकथा सुखी और प्रेम से रहने का संदेश देती है।
बुधवार को कथा में भगवान श्रीराम व जानकी का विवाह उत्सव धूमधाम से मनाया गया। चिया उपाध्याय ने श्रीराम व प्रान्वी शर्मा ने सीता का रूप धरकर विवाह की रस्म निभाई। सपना दगदी, कुमकुम दगदी, श्रेया उपाध्याय ने विवाह का सजीव मंचन किया। आज सिया राम की शादी है.. भजन पर पूरा पांडाल झूम उठा। महाराज ने मुख्य यजमान जी.के. श्रीवास्तव, डी.के. व्यास, पं. मुकुंदशरण दाधीच, हंसराज शर्मा, बृजवल्लभ पाराशर, राजेंद्र अग्रवाल, राधेलाल गोयल, शकुंतला गोयल, अंजलि शर्मा, प्रतिभा शर्मा, संध्या अग्रवाल, पुष्पा पाराशर, सुमित्रा जैथल्या, चंचल सोनी, ममता गुप्ता, मंजू काबरा, रमेश शर्मा, सतीश गर्ग, सत्यनारायण झंवर, सुशील गोयल, अशोक गोयल को दुपट्टा पहनाकर आशीष दिया।
कथा में घनश्याम तंवर, मनीषा गर्ग, अंकुर उपाध्याय, मृदुला उपाध्याय, अभय शर्मा, अर्चना शर्मा, वंदना शर्मा, प्रिया शर्मा, अरूण गर्ग, गोपाल वर्मा, बबलू अग्रवाल, सुमित सारस्वत, रजनी शर्मा, मधु शर्मा, साधना सारस्वत, रामलाल लालनेचा, हनुमान चौधरी, भरत शर्मा, धर्मीचंद शर्मा, रामप्रसाद मित्तल, मुकुटबिहारी गोयल सहित सैंकड़ों श्रद्धालुओं ने धर्मलाभ लिया। -सुमित सारस्वत, मो.09462737273

भजन सुनें : सांवरिया तेरी याद में..

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राम कथा में हुआ दो संतों का मिलन

अवध के संत उमाशंकर महाराज ने कहा कि गाय भगवान को प्रिय है। जो व्यक्ति इनसे प्रेम करता है उस पर भगवान प्रसन्न होते हैं। गायों की सेवा सबसे बड़ा पुण्य का कार्य है। वे ब्यावर स्थित प्रभु की बगिया में आयोजित श्रीराम कथा के चतुर्थ दिवस प्रवचन दे रहे थे।
कथावाचक ने कहा कि परमात्मा की प्राप्ति के लिए मन की शुद्धता आवश्यक है। आध्यात्म का मार्ग मन और आत्मा को शुद्ध करने का माध्यम है। व्यक्ति को पाप कर्म करने से बचकर खाली समय का प्रयोग ईश्वर की आराधना में लगाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भगवान का नाम कल्पवृक्ष है। नाम जपने से भक्त की सभी भावना पूर्ण होती हैं। भगवान व्यक्ति के मन तथा भावनाओं को देखते हैं।

कथा में पधारे संत अर्जुनराम महाराज ने कहा कि रामचरितमानस पुस्तक नहीं, मस्तक है। इसमें पांच चरित्र समाहित है। भगवान शिव, भगवान म, भक्त भरत, हनुमान व काक भुसुंडी का चरित्र हमें जीवन जीना सीखाता है। ज्ञानेंद्र श्रीवास्तव, बुधराज भाटी, गोपाल वर्मा, बबलू अग्रवाल, सुमित सारस्वत, मोनू अरोड़ा ने संत का स्वागत किया। कथा यजमान बुधराज भाटी, राकेश सोलंकी, परबत सिंह, सुमित्रा जैथल्या को महाराज ने दुपट्टा पहनाकर आशीष दिया।

कथा में नरनारायण मोठ, दलपत राठौड़, अरूण गर्ग, रामप्रसाद मित्तल, मुकुटबिहारी गोयल, ओमप्रकाश दगदी, मृदुला उपाध्याय, साधना सारस्वत, गीता जासू, कंचन तंवर, कृपाली तंवर, अर्चना शर्मा, वंदना शर्मा सहित कई श्रद्धालु शामिल हुए। अंकुर उपाध्याय ने बताया कि कथा प्रतिदिन दोपहर 1 बजे से सायं 5 बजे तक हो रही है।


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December 25, 2017

पंडित रविशंकर ने दिया बेटी बचाने का संदेश, कहा- कन्या जन्म पर मनाएं खुशी

श्री बालाजी व जानकी महिला मंडल की ओर से ब्यावर में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के विश्राम सत्र में पंडित रविशंकर शास्त्री ने बेटी बचाने का संदेश देते हुए कहा कि देश में घटता लिंगानुपात सभ्य समाज के लिए चिंताजनक है। कोख में बेटी का कत्ल नहीं करें। कन्या भ्रूण हत्या महापाप है। कन्या की हत्या करने वालों को करोड़ों जन्म तक पुनः मनुष्य जीवन प्राप्त नहीं होता है।
कथावाचक ने सुदामा का चरित्र सुनाते हुए कहा कि कृष्ण व सुदामा मित्रता की मिसाल है। विपरित परिस्थिति में साथ निभाए वही सच्चा मित्र है। भागवत सभी वेदों का सार है। भागवत श्रवण से मनुष्य के विचार शुभ होते हैं। सकारात्मक विचारों से ही जीवन सुखमय होता है। अच्छे विचारों से विश्व अच्छा बनेगा। भागवत कथा औषधि के समान है। जो सभी पापों का नाश करती है। उन्होंने कहा कि वस्तु संसार के लिए है और चित्त परमात्मा के लिए। नाम संकीर्तन में सच्चा सुख है। सत्संग करते हुए मन को निर्मल व छल-कपट रहित रखें। सत्संगी के प्रति स्नेह रखें। कर्म और धर्म के प्रति अगाढ़ श्रद्धा होनी चाहिए। प्रवक्ता सुमित सारस्वत ने बताया कि कथा में वृंदा गोयल ने श्रीकृष्ण, कीर्ति गर्ग ने रूक्मणि व केशव गोयल ने सुदामा के रूप में सुदामा प्रसंग का सजीव मंचन किया।


कथा प्रारंभ होने से पूर्व मुख्य यजमान राधेलाल गोयल, शकुंतला गोयल, संदेश गोयल, पल्लवी गोयल, रमेश शर्मा, ललिता शर्मा, गोविंद प्रसाद, स्नेहलता गोयल, स्नेहलता शर्मा, सत्यनारायण शर्मा, साधना सारस्वत, प्रभा शर्मा, अरविंद शर्मा, राधेश्याम डाणी, जानकी गर्ग, मुकुट बिहारी गोयल, रामप्रसाद मित्तल का दुपट्टा पहनाकर स्वागत किया गया।


महिला मंडल की ओर से कथा आयोजक राधेलाल गोयल व शकुंतला गोयल को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। मंच संचालक सुमित सारस्वत ने स्वरचित रचना पाठ किया। प्रबंध समिति अध्यक्ष माणक डाणी व संयोजक केदार गर्ग ने सभी का आभार जताया। कथा में स्वामी अक्षयानंद, महंत फतेहगिरी, चेतनप्रकाश जोशी, सूर्यकुमार गर्ग, विनोद गोयल, ओमप्रकाश रायपुरिया, कांतिलाल डाणी, घनश्याम तंवर, सुनील कौशिक, सुभाष गर्ग, चेतन गर्ग, दामोदर सर्राफ, कमल सिंहल, पार्वती गोयल, स्नेहलता गोयल, सुनीता यादव, प्रभा नवाल, कुसुम डाणी, मधु डाणी, शोभा चौटिया, कविता शर्मा, मीना खंडेलवाल, प्रभा शर्मा, गंगा गर्ग, सुनीता गुप्ता, वंदना खंडेलवाल, चित्रा गोयल, खुशबू सिंहल, नीलू चौधरी, किरण अग्रवाल, कांता सोमानी, कौशल्या फतेहपुरिया सहित सैंकड़ों श्रद्धालुओं ने धर्मलाभ लिया। -सुमित सारस्वत, मो.09462737273


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प्रकट भये रघुराई कौशल्या मैया दे दो बधाई..

धर्मधरा ब्यावर स्थित प्रभु की बगिया में आयोजित श्रीराम कथा में अयोध्या के मानस मर्मज्ञ संत उमाशंकर महाराज ने कहा कि जप-तप-आराधना एवं पुण्य कर्म करने पर ही अच्छी सद्गुणी संतान प्राप्त होती है। 'बड़े भाग मानुस तन पाया।।' श्लोक से समझाया कि मनुष्य जन्म भाग्य से मिला है। जीवन में सदैव प्रभु का नाम स्मरण करें। इससे समस्त सुखों की प्राप्ति हो सकती है। कथा में शिव विवाह व राम अवतार प्रसंग का विस्तृत विवेचन सुनाया गया। श्रीराम जन्मोत्सव पर बधाई बांटी गई। गायक गोपाल वर्मा ने 'प्रकट भये रघुराई, कौशल्या मैया दे दो बधाई..' भजन गाया तो भक्त भावमय होकर झूमने लगे।
कथा में आए उद्घोषक सुमित सारस्वत ने अपने संबोधन में कहा कि आज बड़ा दिन यानि 25 दिसम्बर ब्यावर वासियों के लिए वास्तव में बड़ा हो गया है क्योंकि कथाओं के त्रिवेणी संगम के साथ आज तीन धर्मों के आराध्य का जन्मोत्सव मनाया जा रहा है। ईसाई धर्म में प्रभु यीशु मसीह का जन्मोत्सव, सिख धर्म के गुरु गोविंदसिंहजी का प्रकाश पर्व और हिन्दू कथा में भगवान श्रीराम का जन्मोत्सव। सारस्वत ने कहा कि  इस दिव्य रामकथा के आयोजक स्वयं हनुमानजी महाराज हैं जो भक्तों को यह रामकथा सुनने के लिए आमंत्रित कर रहे हैं। अन्य आयोजन में कथा वाचक और आयोजक हनुमानजी महाराज को को आमंत्रण देते हैं। उन्होंने इस दिव्य रामकथा आयोजन को अदभुत एवं अनूठा बताते हुए हर्ष जताया।

सोमवार को कथा के मुख्य यजमान अरुण गर्ग थे। कथा में चमनचक्षु जुगल राजस्थानी, पार्षद हनुमान चौधरी, संपति बोहरा, जीके श्रीवास्तव, मोहन दगदी, सत्यनारायण शर्मा, नवनीत हेड़ा, बबलू अग्रवाल, मृदुला उपाध्याय, साधना सारस्वत, अंजू हेड़ा, बुद्धराज चौहान, संदीप खंडेलवाल, आरके अग्रवाल, राधेश्याम शर्मा, विनोद शर्मा सहित अनेक श्रद्धालु मौजूद थे।

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जीवात्मा और परमात्मा का मिलन ही रास

जीवात्मा रूपी बीज का रोपण करने के लिए गोपियों ने परमात्मा के हृदय में स्थान मांगा। जीवात्मा और परमात्मा का मिलन ही रास है। ठाकुरजी सर्वत्र हैं। इन्हें कण-कण में महसूस कीजिए। पंडित रविशंकर शास्त्री ने कहा श्री बालाजी व जानकी महिला मंडल की ओर से आयोजित श्रीमद् भागवत कथा में यह प्रवचन दिए।

कथावाचक ने कहा कि लौकिक संबंध प्रभु से जोड़ लो तो श्रेष्ठ बन जाओगे। गोपियों ने संसार को परमात्मा से प्रेम करना सीखाया। सच्चा प्रेम परमात्मा से ही संभव है। वर्तमान में प्रेम की जगह आसक्ति आ गई है। प्रेम सदैव बढ़ता है जबकि आसक्ति निरंतर घटती है। परमात्मा से प्रेम आनंद व सुख देता है। मनुष्य से आसक्ति विरह और विलाप की वजह बनती है।
शास्त्री ने श्रीकृष्ण व रूक्मणि विवाह प्रसंग सुनाते हुए कहा कि गृहस्थ जीवन को सुखमय बनाने के लिए पति-पत्नी में तालमेल व प्रेम जरूरी है। जीवन में संतोष, शांति व प्रेम ही सच्चा सुख है। हरिकथा सुखी और प्रेम से रहने का संदेश देती है। प्रेम से रहने वाला घर स्वर्ग है। कथा में संदेश गोयल ने श्रीकृष्ण व पल्लवी गोयल ने रूक्मणि के रूप में विवाह प्रसंग का सजीव मंचन किया। कथा में श्री निम्बार्क पीठ के जगद्गुरु निम्बार्काचार्य श्रीजी महाराज भी पधारे।

पढ़ें : ब्यावर में क्या बोले श्रीजी

कथा प्रारंभ होने से पूर्व यजमान केदार गर्ग, प्रेम गर्ग, विकास गर्ग, निशा गर्ग, विनोद गोयल, पार्वती गोयल, वृंदा गोयल, प्रकाश खेतावत, प्रेम खेतावत, लीलाधर झा, सुलेखा झा, राकेश खेतावत, वंदना खेतावत, नीलू राजानी, गणेशप्रसाद बुधिया, अजमेर से आए अनिल गोयल, अनुराधा गोयल का दुपट्टा पहनाकर स्वागत किया गया। कथा में राधेलाल गोयल, शकुंतला गोयल, पार्वती गोयल, शोभा चौटिया, कविता शर्मा, साधना सारस्वत, ललिता शर्मा, मोनिका कौशिक, सुनीता यादव, कांता सोमानी, प्रमिला शर्मा, संतोष सर्राफ, खुशबू सिंहल सहित सैंकड़ों महिला-पुरुष श्रोता शामिल हुए। -सुमित सारस्वत, मो.09462737273

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जगद्गुरु श्रीजी ने इस भूमि को बताया पवित्र और पूजनीय

श्री निम्बार्क पीठ के जगद्गुरु निम्बार्काचार्य श्रीजी महाराज ने कहा कि भगवान की कथा अमृत स्वरूप है। कथा पान करने से सभी समस्याएं समाप्त हो जाती है। धर्म का प्रचार, दुष्टों का नाश और गौ रक्षा के लिए भगवान श्रीकृष्ण का अवतार हुआ। वे धार्मिक नगरी ब्यावर में श्री बालाजी व जानकी महिला मंडल की ओर से आयोजित श्रीमद् भागवत कथा में आशीर्वचन दे रहे थे।
श्रीजी महाराज ने कहा कि गौ सेवा से हरि प्रसन्न होते हैं। भगवद् भक्ति, संतों का संग और नाम संकीर्तन वैष्णवजन का प्रथम कर्त्तव्य है। उन्होंने कहा कि ब्यावर की पवित्र भूमि पूजनीय है। सनातन धर्म की रक्षा में ब्यावर का अहम योगदान है। आचार्यश्री के आगमन पर कथावाचक पंडित रविशंकर शास्त्री ने नमन कर स्वागत किया। मंच संचालन सुमित सारस्वत ने किया। कथा आयोजक राधेलाल गोयल, शकुंतला गोयल, माणक डाणी, केदार गर्ग, पं.मुकुंदशरण दाधीच, चेतन प्रकाश जोशी, हेमलता जोशी, दामोदर सर्राफ, राधेश्याम डाणी, ओमप्रकाश रायपुरिया, कांतिलाल डाणी, रमेश शर्मा, विनोद गोयल, सूर्यकुमार गर्ग, हंसराज शर्मा, बृजवल्लभ पाराशर, राजेंद्र अग्रवाल, राजेश सावलानी, विष्णु चौटिया, बसंती जोशी, मधु जोशी, कीर्ति गर्ग, किरण अग्रवाल, संतोष सर्राफ सहित कई शहरवासियों ने श्रीजी महाराज को वंदन कर आशीष लिया।
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मन को पवित्र करती है कथा : संत उमाशंकर

श्रीमद भागवत कथा हो या श्रीराम कथा या अन्य कोई कथा ये सभी भगवत प्राप्ति करवाती है। कथा सुनने से मन को सुख मिलता है और मन पवित्र हो जाता है। यह विचार संत उमाशंकर महाराज ने प्रभु बगिया में आयोजित श्रीराम कथा में व्यक्त किए।
कथावाचक ने कहा कि अन्न का कण, संत का क्षण कभी बर्बाद नहीं करना चाहिए है। भगवत कथा चाहे जो भी हो अवश्य श्रवण करना चाहिए। श्रीराम कथा का उद्गम ही त्रिवेणी संगम से होता है और वर्तमान में ब्यावर की धर्म भूमि पर यह दिव्य योग बना है। कथा के दौरान शिव विवाह में भोले बाबा की बारात का प्रसंग सुनाया गया।  शिव विवाह उत्सव में सभी भक्त भाव विभोर होकर नृत्य करने लगे।

भजन सुनें : ठाकुर पधारया म्हारे आंगणा

कथा में सभापति बबीता चौहान, आयुक्त दिनेश राय, पार्षद सीमा शर्मा, संपति बोहरा, नरेश कनोजिया, ईश्वर तंवर, नरेन्द्र चौहान, भरत शर्मा, रमेश बंसल, नवनीत हेड़ा, अंकुर उपाध्याय, गोपाल वर्मा, बबलू अग्रवाल, उर्मिला भाटी, अंजू हेड़ा, सीमा टांक, कंचन तंवर, सुमन पालड़िया, ममता गुप्ता, मंजू काबरा, मृदुला उपाध्याय सहित कई भक्त उपस्थित थे।


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December 23, 2017

कृष्ण ने उठाया गोवर्धन तो झूम उठी गोपियां

श्री बालाजी व जानकी महिला मंडल की ओर से ब्यावर में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा में पंडित रविशंकर शास्त्री ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की लीलाएं आनंद देने वाली है। प्रभु कथा श्रवण करने वाला मनुष्य तनाव मुक्त हो जाता है। जो मनुष्य परमात्मा की पूजा करता है उस भक्त का प्रभु ध्यान रखते हैं। जीवन को आनंदित बनाने के लिए सत्संग करें। जितना आनंद व सुख राधाकृष्ण की सेवा में है उतना किसी और सांसारिक वस्तु में नहीं। सच्चा भक्त बनने के लिए भक्ति को पुष्ट करना होगा।
कथावाचक ने कहा कि कभी सोने की चिडिय़ा कहलाने वाले भारत में संस्कार और संस्कृति नष्ट हो रही है। भारत को पुनः विश्व गुरु बनाने के लिए संस्कार और संस्कृति को कायम रखना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि गोपियों ने संसार को परमात्मा से प्रेम करना सीखाया। सच्चा प्रेम परमात्मा से ही संभव है। वर्तमान में प्रेम की जगह आसक्ति आ गई है। प्रेम सदैव बढ़ता है जबकि आसक्ति निरंतर घटती है। परमात्मा से प्रेम आनंद व सुख देता है। मनुष्य से आसक्ति विरह और विलाप की वजह बनती है।


शनिवार को कृष्ण लीलाओं व गिरीराज धरण प्रसंग के मौके पर छप्पन भोग की झांकी सजाई गई। रानी शर्मा, परी शर्मा, खुशी गर्ग, परी सिंहल, देवेश यादव, केशव गोयल ने कृष्ण, राधा व गोपियों का रूप धरकर गोवर्धन लीला का सजीव मंचन किया। कथा प्रारंभ होने से पूर्व यजमान ओमप्रकाश रायपुरिया, सरस्वती अग्रवाल, पुरूषोत्तम अग्रवाल, कमलेश यादव, ललित गोयल, चित्रा गोयल, घनश्याम तंवर, कौशल्या तंवर, सावित्री कुमावत, स्नेहलता शर्मा, लीला सिंहल, रेखा जिंदल, पं.मुकुंदशरण दाधीच, मुंबई से आए सुभाष गर्ग, कीर्ति गर्ग, बिजयनगर से आए जगदीश गर्ग, इंद्रा गर्ग, अजमेर से आए नरेंद्र गोयल, रमेश अग्रवाल, पुष्पा अग्रवाल, अमरचंद कुमावत का दुपट्टा पहनाकर स्वागत किया गया।

भजन सुनें : ठाकुर पधारया म्हारे आंगणा

कथा में सभापति बबीता चौहान, उपसभापति सुनील मूंदड़ा, आयुक्त दिनेश राय, मंडल प्रमुख शकुंतला गोयल, राधेलाल गोयल, माणक डाणी, केदार गर्ग, चेतन गर्ग, रमेश शर्मा, विनोद गोयल, कांतिलाल डाणी, चेतन प्रकाश जोशी, राधेश्याम डाणी, विजय तंवर, ललिता शर्मा, मोनिका कौशिक, साधना सारस्वत, सुनीता यादव, प्रभा नवाल, कुसुम डाणी, शोभा चौटिया, कविता शर्मा, सुनीता यादव, खुशबू सिंहल, रामप्रसाद मित्तल, मुकुटबिहारी गोयल, ओमप्रकाश दगदी, धर्मीचंद शर्मा, गोकुल श्याम सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।


रविवार को कथा में पधारेंगे जगद्गुरु
निम्बार्क पीठ के जगद्गुरु निम्बार्काचार्य श्यामशरणदेव श्रीजी महाराज रविवार को भागवत कथा में पधारेंगे। वे जगद्गुरु बनने के बाद ब्यावर में पहली बार सार्वजनिक कार्यक्रम में षिरकत करेंगे और अपने मुखारबिंद से भक्तों को आशीर्वचन देंगे। उनके सानिध्य में श्रीराम-जानकी विवाह उत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा।

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प्रभु की बगिया में रामकथा का शुभारंभ

धार्मिक नगरी ब्यावर में शनिवार से संगीतमय श्रीराम कथा का शुभारंभ हुआ। प्रभु की बगिया में शुरू हुई कथा के प्रथम दिन मानस मर्मज्ञ संत उमाशंकर महाराज ने कथा महात्म्य बताया। उन्होंने कहा कि रामकथा जीवन जीने की मर्यादा सिखाती है। राम नाम जपने से सद्गति मिलती है।
कथा प्रारंभ होने से पूर्व सांवरिया सेठ मंदिर से कलश व शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा में 141 महिलाएं सिर पर कलश धारण कर शामिल हुई। श्री पोथीजी को माेहनलाल दगदी अपने सिर पर धारण कर कथास्थल तक पहुंचाया। विजय तंवर व गोपाल वर्मा ने नाम संकीर्तन किया। शोभायात्रा में शामिल महिला व पुरूष श्रद्धालु जयकारे लगा रहे थे। अयोध्या से पधारे कथावाचक सुसज्जित रथ में सवार थे। जुगल राजस्थानी, अंकुर उपाध्याय, बबलू अग्रवाल, लक्ष्मीकांत शर्मा, मृदुला उपाध्याय, वंदना शर्मा, कौशल्या गहलोत, ललिता भाटी, संपति बोहरा, ज्योति अग्रवाल, कंचन तंवर, रमेश शर्मा, बुधराज गहलोत, अरूण गर्ग, शक्तिराज भाटी, जय तंवर, अभय शर्मा, आर.के.गुप्ता, अर्जुन सिंह सहित कई श्रद्धालुओं ने धर्मलाभ लिया। यह कथा 31 दिसंबर तक प्रतिदिन दोपहर 1 बजे से सायं 5 बजे तक होगी। कथा में प्रसंग अनुसार शिव विवाह, श्रीराम जन्मोत्सव, श्रीराम-सीता विवाह, वन गमन, भारत चरित्र, श्रीराम राज्याभिषेक के प्रसंग व उत्सव होंगे। -सुमित सारस्वत, मो.09462737273

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