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October 4, 2025

संत प्रेमानंद महाराज का स्वास्थ्य खराब, अनिश्चित काल के लिए बंद हुई पदयात्रा - Sant Premanand Maharaj

भगवान श्री कृष्ण की प्राणप्रिय श्री राधारानी के परम भक्त संत प्रेमानंद महाराज (Sant Premanand Maharaj) का स्वास्थ्य फिर खराब हो गया है. तबियत बिगड़ने के कारण सुबह 4 बजे निकलने वाली पदयात्रा अनिश्चित काल के लिए बंद कर दी गई है. इस सूचना से भक्तों में मायूसी छा गई है. उनका दर्शन करने वृंदावन (Vrindavan) पहुंचे श्रद्धालु भी उदास मन से लौट गए हैं. वहीं देशभर में संतश्री के उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु के लिए प्रार्थना की जा रही है.

दोनों किडनियां हैं फेल
गौरतलब कि संत प्रेमानंद महाराज लंबे समय से किडनी की समस्या से जूझ रहे हैं. करीब 20 साल से उनकी दोनों किडनियां फेल है. पहले हफ्ते में तीन बार डायलिसिस होता था, लेकिन अब समस्या बढ़ने के कारण सप्ताह में 4 से 5 बार डायलिसिस हो रहा है. इससे पहले भी स्‍वास्‍थ्‍य कारणों से उनकी यह पदयात्रा कई बार रोकी गई थी. कई सेलेब्स और भक्तों ने बाबा को अपनी किडनी ऑफर की लेकिन उन्होंने मना कर दिया. उनका मानना है कि भगवान ने जितना जीवन दिया है उसे कोई नहीं छीन सकता. अब भगवान के भक्त प्रार्थना कर रहे हैं कि महाराज शीघ्र ही स्वस्थ होकर भक्तों के बीच आकर राधारानी का गुणगान करें.

कई सेलेब्स आते हैं केलिकुंज आश्रम
संत प्रेमानंद महाराज के संदेशों को देश-दुनिया में करोड़ों लोग सुनते हैं. नेता, अभिनेता, क्रिकेटर व अन्य कई सेलेब्स इनके दीवाने हैं. क्रिकेटर विराट कोहली, अभिनेत्री अनुष्का शर्मा, शिल्पा शेट्टी, हेमा मालिनी, अभिनेता आशुतोष राणा, गायक हंसराज रघुवंशी, कन्हैया मित्तल, स्वस्ति जैन समेत कई सेलेब्स वृंदावन के राधा केली कुंज आश्रम में महाराज से आशीर्वाद और मार्गदर्शन लेने आते हैं. ©सुमित सारस्वत
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June 2, 2025

श्री वृंदावन महिमामृतम कथा आज से, गोवर्धन में इंद्रेश उपाध्याय सुनाएंगे महिमा - Govardhan Katha

 

✍🏻 सुमित सारस्वत
ब्रज क्षेत्र के गोवर्धन धाम में 2 जून से श्री वृंदावन महिमामृतम कथा आयोजित होगी. सात दिवसीय कथा में वृंदावन (Vrindavan) के विख्यात कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय (Indresh Upadhyay) ठाकुरजी की महिमा का गुणानुवाद करेंगे.

गंगा दशहरा (Ganga Dussehra) के अवसर पर परम पूज्य दादा गुरुदेव बाबा गोविंद शरण शास्त्री महाराज के पावन स्मृति महोत्सव के तहत गोवर्धन (Govardhan) के श्री राधा गोल्फ बड़ी परिक्रमा मार्ग पर स्थित आश्रम श्री रसिक शरणम में यह कथा 8 जून तक शाम 5 बजे से होगी. परम पूज्य स्वामी किशोरदास देव जू महाराज के सानिध्य में होने वाली इस कथा में जगद्गुरु निम्बार्काचार्य श्यामशरण देवाचार्य महाराज, गीता मनीषी महामंडलेश्वर स्वामी ज्ञानानंद महाराज, अग्रमलुक पीठाधीश्वर जगद्गुरु राजेंद्रदास देवाचार्य महाराज, संत विजय कौशल महाराज, रंगीली सखी संत राधामोहन भक्तमाली महाराज समेत अनेक संत-महात्मा पधारेंगे.

आयोजक रसिक संत बाबा चित्र विचित्र (Chitra Vichitra) बिहारी दास महाराज और ब्रज किंकिरी साध्वी पूर्णिमा दीदी (Purnima Didi) ने सभी हरिभक्तों से इस सरस महोत्सव में पधारकर धर्मलाभ प्राप्त करने का आग्रह किया है. जो भक्त गोवर्धन धाम नहीं पधार सकते वे घर बैठे भी ब्रज भाव और सीवीएम म्यूजिक यूट्यूब चैनल पर सीधा प्रसारण के माध्यम से कथा सुन सकते हैं. इस कथा में शामिल होने के लिए उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, दिल्ली, राजस्थान व अन्य क्षेत्रों से बड़ी संख्या में संत, रसिक, वैष्णववृंद भक्त वृंदावन पहुंचे हैं.
©सुमित सारस्वत

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September 28, 2024

कृष्ण नगरी में मिल गई गीता !, जानें क्या थी घर छोड़कर वृंदावन जाने की वजह - Laapataa Ladies Found

✍🏻 सुमित सारस्वत

इन दिनों फेमस हिंदी फिल्म 'लापता लेडीज' की चर्चाओं के बीच कल शनिवार सुबह ब्यावर (Beawar) से लापता हुई गीता चौहान का पता लग गया है. परिजन का कहना है कि, गीता ने आज रविवार सुबह अपनी बेटी रानू को कॉल कर खुद के वृंदावन (Vrindavan) में सुरक्षित होने की बात कही है. उन्होंने बेटी से कहा कि 'परेशान मत होना, मैं कल घर लौट आऊंगी.'

शुक्र है कि गीता (Geeta) सुरक्षित हैं लेकिन उनके इस तरह बिना बताए चले जाने से पूरे शहर के साथ उनके परिजनों और रिश्तेदारों को काफी परेशानी हुई. सभी ने अपने-अपने वाहनों और साधनों की सहायता से उन्हें कई शहरों में तलाश किया. ब्यावर के लगभग हर व्हाट्सएप ग्रुप में कल कई कई बार उनकी तस्वीरें वायरल कर लोगों ने उनका पता लगाने का प्रयास किया.

यह सभी को पता है कि गीता भक्ति भाव से जुड़ी हैं. अगर उन्हें कहीं जाना ही था तो परिवार को बताकर चले जाते, लेकिन मानसिक तनाव में मनुष्य ऐसा नहीं सोचता. गीता की व्यक्तिगत पहचान के कारण उनका यह मामला पूरे शहर में चर्चा का विषय बन गया, इसलिए यह जानना जरूरी है कि भजन-कीर्तन करने वाली गीता को आखिर किस बात का तनाव हो गया? इस सवाल के जवाब में परिजन ने बताया कि कुछ समय से उनकी बेटी के वैवाहिक रिश्ते की बात चल रही है. परिवार को मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) का एक लड़का पसंद आया लेकिन गीता अपनी लाड़ली को इतना दूर नहीं भेजना चाहती. बस, इतनी सी बात पर परिवार में सहमति नहीं बनी और बेटी के दूर चले जाने की सोच से गीता कुछ दिन से तनाव में थी. हालांकि अभी बेटी का रिश्ता तय नहीं हुआ था. लेकिन यह तय है कि इस घटना से सबक लेकर परिवार अब गीता के विचारों का आदर करते हुए सर्व सहमति से ही कोई फैसला करेगा.

वर्तमान वक्त में लगभग हर घर में किसी न किसी बात का तनाव है. कहीं स्वास्थ्य को लेकर, तो कहीं व्यापार में मंदी. कहीं पति-पत्नी में अनबन, तो कहीं बच्चों की हरकतों से परेशानी. कहीं कर्ज से तनाव, तो कहीं जॉबलेस होने की चिंता. ऐसे नकारात्मक माहौल में भी मनुष्य को सकारात्मक रहने की बेहद आवश्यकता है. सभी को पता है कि कोरोना काल (Corona Pandemic) के बाद इम्युनिटी सिस्टम कमजोर हो गया है. आए दिन हार्ट अटैक के मामले सामने आ रहे हैं. जरूरी है कि घर-परिवार को तनावमुक्त रखें. खुश रहें और प्रत्येक व्यक्ति की खुशी का ख्याल रखें. -सुमित सारस्वत, मो.9462737273

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September 5, 2024

True Love Story: अगाध प्रेम की अनूठी मिसाल है यह प्रेमी युगल, एक ही दिन हुआ था दोनों का जन्म

भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी श्री कृष्ण जन्माष्टमी (Krishna Janmashtami) कहलाती है और भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी राधा अष्टमी (Radha Ashtami) के नाम से विख्यात है. क्या यह एक अदभुत संयोग नहीं है कि श्रीकृष्ण जी का जन्म भी अष्टमी को हुआ था और उनकी प्राणप्रिया राधाजी भी अष्टमी को ही अवतरित हुई थी.

राधा रानी के प्रति श्रीकृष्ण के अगाध आत्मीय प्रेम की यह बड़ी और जीवंत मिसाल है. एक और खास बात यह है कि राधा का जन्म दिन में 12 बजे हुआ और कन्हैया का जन्म रात में 12 बजे हुआ. कृष्ण जन्म के उपलक्ष में जन्माष्टमी मनाई जाती है और राधाजी के जन्म उपलक्ष में राधाष्टमी.
आपको कृष्ण प्रिया श्री राधाजी के जन्म अष्टमी महापर्व की ढेरों बधाई..
©सुमित सारस्वत

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November 19, 2017

गिरीराज धरण की शरण में मोरारी की मानस परिक्रमा पूरी

नौ दिन पूर्व गोवर्धन से आरंभ हुई ब्रज चौरासी कोस परिक्रमा रविवार को पुनः गिरीराज धरण की शरण में पहुंचकर पूरी हुई। आखरी पड़ाव पर अपनी 801वीं रामचरितमानस कथा के विराम से पूर्व संत मोरारी बापू ने परिक्रमा से प्राप्त होने वाले परिणाम पर प्रवचन दिए। उन्होंने कहा कि मानस परिक्रमा से दस फल प्राप्त होते हैं जिसकी जरूरत सभी को है। उत्साह, अनुराग (प्रेम), विराग (वैराग्य), दृढ़ भक्ति, मनोरथ, भवतरण, विजय, विवेक, विभूति (ऐश्वर्य), परम विश्राम।
बापू ने कहा कि रामकथा से उत्साह बढ़ता है। चाहे कितनी भी परेशानी आ जाए, उदास कभी न हों। जीवन में प्रेम होना बेहद जरूरी है। प्रेम में कोेई हित नहीं होना चाहिए। वैराग्य का पात्र अनुराग रूपी अमृत को सुरक्षित रखता है। भक्ति निरंतर बढ़नी चाहिए। मनोरथ पूर्ति होनी चाहिए। कथा श्रवण-भजन जारी रहे। विजय के साथ विवेक जरूरी है। बिना विवेक अहंकार आ जाएगा।

बापू ने कथा प्रसंग सुनाते हुए कहा कि सेतुबंध राम का ईश्वर है जिसने जोड़ने का कार्य किया। समाज में जो जोड़ने का विचार करे वही राम का वैचारिक ईश्वर है। रामायण सुख संपादन करती है। यह तभी संभव है जब समन्वय होगा। दो मिनट का मौन शोक सभा में ही नहीं, श्लोक सभा में भी होना चाहिए। घर में भी शांति रखें। रामकथा प्र्रयोगशाला है। यहां इंसान में परिवर्तन आता है। यह जोड़ने का साधन है। समन्वय हुआ तो सोने तक पहुंच जाओगे। लंका सोने की थी। राम भी सेतु समन्वय से ही सोने की लंका पहुंचे। याद रखें समन्वय वो करता है जिसके ह्रदय में हरि हो। जो ऊंच-नीच, अमीर-गरीब का भेद नहीं करता। बापू ने संदेश दिया कि अंधविश्वास से डरें नहीं। हरिनाम लें, हर शगुन सही होगा। रामचरितमानस से समाज का रावण मरेगा।


बापू ने प्रवाही परंपरा का निर्वहन करते हुए सबके मंगल की कामना की। मानस परिक्रमा कथा भगवान गोवर्धननाथ के चरणों को समर्पित की। जिन चार पंक्तियों के साथ कथा प्रारंभ की थी उन्हीं पंक्तियों को गाकर कथा को विराम दिया। जय श्री राम और हर-हर महादेव का जयघोष हुआ। व्यासपीठ से बापू ने सभी को हाथ जोड़कर कृतज्ञता प्रकट की। कथा में सांसद व अभिनेत्री हेमा मालिनी, संत कृपा सनातन संस्थान के अध्यक्ष मदन पालीवाल, महामंडलेश्वर गुरुशरणानंद महाराज सहित संत-महापुरूष व देशभर से आए हजारों श्रोता शामिल हुए। -सुमित सारस्वत, मो.9462737273


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November 18, 2017

5 हजार साल बाद कृष्ण को याद कर जन्म भूमि मथुरा में रोई हजारों आंखें

भगवान राम की पावन कथा ब्रज चौरासी कोस परिक्रमा करते हुए शनिवार को कृष्ण जन्म भूमि मथुरा पहुंची। यहां मोरारी बापू ने सत्य, प्रेम, करूणा को केंद्र में रखते हुए मानस परिक्रमा कथा कही। उन्होंने कहा कि भरत प्रेम, राम सत्य व शिव करूणा है। प्रेम रूपी भरत ने सत्य रूपी राम की परिक्रमा की। सत्य रूपी राम ने करूणा रूपी शिव की परिक्रमा लगाई। करूणा रूपी शिव प्रेम रूपी भरत की परिक्रमा करते हैं।
बापू ने कहा कि प्रेम बेकसूर है। प्रेत रत्न है। प्रेम परमात्मा है। जीवन में सत्य और करूणा भले ही न हो मगर अवश्य प्रेम होना चाहिए। मासूम गाजियाबादी का शेर ‘आवाज जबकि हमने उसे बार-बार दी, नादान है कश्ती फिर भी भंवर में उतार दी..’ सुनाकर प्रेम की पराकाष्ठा बयां की। ओशो का जिक्र करते हुए प्रेम का संदेश दिया।

कथा में कृष्ण और नंदबाबा का संवाद बापू ने भावुकता भरते शब्दों में सुनाया। उन्होंने कहा, कृष्ण को गए पांच हजार साल हो गए मगर उनकी स्मृति आज भी जवान हो रही है। प्रसंग सुनाते-सुनते पूरा वातावरण भावुक हो गया। कृष्ण विरह को याद करते हुए बापू की आंखों से अनवरत अश्रुधारा बह रही थी। कृष्ण प्रेम में डूबी हजारों श्रोताओं की आंखें भी रो रही थी। लो आ गई उनकी याद, वो नहीं आए.. गीत के जरिए प्रभु को याद करते हुए बापू ने कहा कि स्मृति सदैव अमर रहनी चाहिए। स्मृति बरकरार रखने के लिए सदैव हरिनाम संकीर्तन करें। नानकदेवजी ने भी कहा है, सिमरन कर ले मेरे मना। कथा में काशी नरेश डॉ. अनंत नारायण सिंह व संत संतोष दास सतुआ बाबा सहित संत-महापुरूष व देशभर से आए हजारों श्रोता शामिल हुए। -सुमित सारस्वत, मो.9462737273


तीन वस्तु की परिक्रमा कभी ना करें
बापू ने बताया कि इंसान को तीन वस्तु की परिक्रमा कभी नहीं करनी चाहिए। पहला मोह, विनय पत्रिका में गोस्वामी तुलसीदासजी ने लिखा है कि रावण ने मोह को केंद्र में रखा जो विनाश का कारण बना। दूसरा अहंकार, जो कुंभकर्ण में था। तीसरा काम, जो रावण पुत्र इंद्रजीत में भरा था।

गोवर्धन को लगाया छप्पन भोग
मानस परिक्रमा कथा के विराम से पूर्व भगवान गोवर्धननाथ को छप्पन भोग लगाया गया। बापू सहित देशभर से आए भक्तों ने भोग दर्शन कर धर्मलाभ लिया। रविवार को कथा गोवर्धन में विराम लेगी। कथा का समय प्रातः 9 बजे से दोपहर 12.30 बजे तक रहेगा। कथा के पश्चात सभी भक्तों को छप्पन भोग प्रसाद रूप में वितरित किया जाएगा।

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November 17, 2017

ठाकुर हमरे रमण बिहारी, हम हैं रमण बिहारी के.. | Morari Bapu in Gokul

दिव्य और सेव्य कोई भी परम चेतना को केंद्र में रखकर गुणातीत श्रद्धा भाव से की गई यात्रा परिक्रमा है। हनुमानजी ने लंका में कई मंदिरों की परिक्रमा की, परमतत्व सीता मां की खोज में। परिक्रमा का परिणाम प्यारा होता है। पादुका की परिक्रमा शरणागति को दृढ़ करती है। ग्रंथ परिक्रमा से ग्रंथियों की मुक्ति होती है। पेड़-पौधों की परिक्रमा दूसरों को फल व छाया देने की प्रेरणा देती है। सूर्य की परिक्रमा प्रकाश की सीख देती है। गगन की परिक्रमा विशालता का बोध प्रदान करती है। मूर्ति या मंदिर की परिक्रमा अंतरतम का भाव प्रदान करती है। पहाड़ की परिक्रमा अचलता का बोध देती है। विवाह अग्नि की परिक्रमा पावन करती है। चिता अग्नि की परिक्रमा विवेक व ज्ञान प्रदान करती है। यह गूढ़ रहस्य संत मोरारी बापू ने शुक्रवार को रमणरेती (गोकुल) में मानस परिक्रमा कथा के सातवें दिन बताए।
ब्रज चौरासी कोस में 801वीं रामकथा में बापू ने कहा कि कलयुग समान कोई युग नहीं है। भारत में जन्म लेना पुण्य है। आंसू और आश्रय भक्ति की बहुत बड़ी संपदा है। ‘मैं हूं एक फूल मुझे शाख से ना तोड़ा जाए, मैं जैसा भी हूं मेरे हाल पे छोड़ा जाए..’ शेर सुनाते हुए संदेश दिया कि किसी भक्त की आलोचना न करें। भक्त भगवान की याद में आंसू बहाए या नाचे तो उसकी मजाक ना बनाएं, यह भक्त अपराध है। उन्होंने कहा कि गोकुल तपस्या, भजन, भाव और साक्षात्कार की भूमि है। यहां प्रभु ने कई लीलाएं की है। यहां आनंद आता है। बापू ने ठाकुर के प्रति प्रेम प्रकट करते हुए ‘ठाकुर हमरे रमण बिहारी, हम हैं रमण बिहारी के..’ भजन सुनाया। -सुमित सारस्वत, मो.9462737273


नारी को उद्धार का अधिकार
बापू ने अहिल्या प्रसंग सुनाते हुए नारी सशक्तिकरण का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि नारी को भी उद्धार का अधिकार है। भगवान राम ने अहिल्या का उद्धार किया। आज समाज में उच्चारक, विचारक, सुधारक तो है मगर स्वीकारक नहीं। भगवान राम स्वीकारक है इसलिए गांव-गांव में उनकी पूजा होती है। राम ने शबरी, अहिल्या जैसी कई नारियों का उद्धार किया। गुरु विश्वामित्र से संवाद करते हुए राम ने कहा, एक भक्त ने मुझे पत्थर से प्रकट किया था नृसिंह रूप में, आज मेरा कर्त्तव्य है कि मैं पत्थर से भक्त को प्रकट करूं अहिल्या रूप में। अवध में कौशल्या ने राम को प्रकट किया और वन में राम ने अहिल्या को प्रकट किया। महर्षि गौतम की पत्नी अहिल्या विश्व की सुंदर रचना थी। इंद्र ने उनका शीलहरण किया तो गौतम उन्हें छोड़कर चले गए। गुरु विश्वामित्र ने अहिल्या को बेटी की तरह सम्मान व स्नेह देते हुए गौतम से मिलवाया। बापू ने समाज में हो रहे महिला शोषण पर चिंता जताते हुए कहा कि आज भी समाज के इंद्र महिलाओं का शोषण कर छोड़ देते हैं। आजीविका का इंतजाम भी नहीं करते। यह दर्द बयां करते हुए उन्होंने ‘बनके पत्थर हम पड़े थे सूनी-सूनी राह में..’ गीत सुनाया।


आज नहीं तो कल होगा
बापू ने कहा कि राम नाम चेतन है। पदार्थ व जड़ को पाने के लिए पुरूषार्थ करना पड़ता है और चेतन को पाने के लिए पुकार करनी होती है। परमात्मा को पाना है तो प्रतिदिन नाम सुमिरन करें। कभी अहंकार न करें। कोई प्रशंसा करे तो मान शून्यता रखें। जीवन में निराशा न आने दें। सदैव आशावादी बने रहें। आज नहीं तो कल परमात्मा अवश्य मिलेंगे।

महामंत्र है राम नाम
दशरथ पुत्रों का नामकरण संस्कार प्रसंग सुनाते हुए कहा कि राम नाम महामंत्र है। जिसके नाम से विश्राम मिले वो राम है। भरत दूसरों के पोषण का संदेश देता है। किसी का शोषण न करें। शत्रुघ्न कहता है किसी से शत्रुता न रखें। दुश्मनी खत्म हो। लक्ष्मण का अर्थ आधार है। जीव का आधार बनें। कमाई का दसवां हिस्सा दान करें। माता-पिता व गुरुजन का अभिवादन करें। इससे आयु, विद्या, बल व कीर्ति बढ़ेगी।

मथुरा में होगा छप्पन भोग मनोरथ
मानस परिक्रमा कथा शनिवार को मथुरा में होगी। यहां छप्पन भोग मनोरथ होगा। कथा विराम से पूर्व गोवर्धननाथजी को छप्पन भोग लगाया जाएगा। रविवार को यह भोग सभी भक्तों को प्रसाद रूप में वितरित किया जाएगा।
नया भजन सुनें : तेरे बिना में रोई मोहन

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November 16, 2017

ऐसा प्रेम होगा तो आपके घर भी प्रकटेंगे राम : मोरारी बापू | Morari Bapu in Mansarovar

ब्रज चौरासी कोस में मानस परिक्रमा कथा के छठे दिन मानसरोवर में भगवान राम का जन्म हुआ। कथावाचक मोरारी बापू ने राम जन्म प्रसंग सुनाते हुए दांपत्य को आनंदमय बनाने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि राम का अर्थ विश्राम, विराम व अभिराम है। पति पत्नी से प्रेम करे, पत्नी पति को आदर दे और दोनों मिल कर ठाकुर की सेवा करें तो घर अवध बन जाएगा। यह तीन सूत्रीय फॉर्मूला जहां अपनाया गया वहां राम का जन्म होगा। राजा दशरथ और कौशल्या में प्रेम के कारण भगवान राम प्रकट हुए।

बापू ने कहा कि रामकथा रसमयी व रहस्यमयी कथा है। परमात्मा आज भी लीला कर रहा है। परमात्मा की प्रतीक्षा करें, कृपा की नहीं। परमात्मा आएगा तो कृपा हो जाएगी। परिक्रमा के लिए जहां भी जाओ, परमात्मा साथ है। परिक्रमा प्रवाही परंपरा है। आदि काल में सूर्य से प्रारंभ हुई है। उन्होंने कहा कि जीवन रूपी रथ कृष्ण को सौंप दो। वो चलाएंगे तो मार्ग से नहीं भटकोगे। बीच-बीच में उपदेश देकर मार्गदर्शन भी करेंगे। अपनी लीलाओं से आनंद भी कराएंगे।

बापू ने कहा कि सत्य की राह पर विघ्न आते हैं। प्रेम में बाधा आएगी। करुणा की राह में प्रहार होंगे। भक्ति में विघ्न आना स्वाभाविक है। अगर भक्ति और प्रेम अहेतु है तो विघ्न कुछ नहीं कर पाएंगे। प्रेम निःस्वार्थ हो। इसमें सौदा नहीं होना चाहिए। परमात्मा मिले न मिले, परमात्मा का नाम हर वक्त साथ रखो। साधक को नियम का बंधन और प्रेम की स्वतंत्रता होनी चाहिए। सदा हंसते-मुस्कुराते प्रसन्न रहो। मैं रामकथा के माध्यम से प्रसन्नता बांट रहा हूं। कथा में ‘भये प्रकट कृपाला दीनदयाला..’ गाते हुए राम जन्म उत्सव मनाया गया। शुक्रवार को कथा रमणरेती (गोकुल) में होगी। -सुमित सारस्वत, मो.9462737273


मथुरा में कथाकारों से करेंगे मुलाकात
बापू ने ब्रज के सभी कथाकारों से मुलाकात की इच्छा जाहिर की है। कथा में मन का भाव बताते हुए कहा कि मैं ब्रज के सभी कथाकारों का दर्शन करना चाहता हूं। उनसे मुलाकात कर उनके साथ तस्वीर लेना चाहता हूं। दर्शन मुलाकात के लिए 18 तारीख की शाम सभी कथाकारों को व्यासपीठ से आमंत्रित किया है।
क्लिक करके देखिए : त्रिदेवी अवतार

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November 15, 2017

परिक्रमा से होती है परम तत्व की प्राप्ति : मोरारी बापू | Morari Bapu in Akrur Ghat

ब्रज चौरासी कोस में मानस परिक्रमा कथा बुधवार को अक्रूर घाट पहुंची। यहां कथावाचक मोरारी बापू ने कहा कि परिक्रमा किसी की खोज में की जाती है। परिक्रमा से परम तत्व की प्राप्ति होती है। खुद की परिक्रमा करना आ जाए तो खुदा की परिक्रमा करने की जरूरत नहीं होती। निरंतर आत्म स्मरण से स्वयं की परिक्रमा संभव है। हरि नाम जाप करें। हम परमात्मा के ही अंश हैं। सदैव परमात्मा की स्मृति रखें। ओशो कहते हैं कि जहां से शुरू होते हैं वही हमारा आखरी लक्ष्य होता है मगर इसका पता लौटने पर ही लगता है। महाप्रभु ने हरि दर्शन के लिए पृथ्वी परिक्रमा की।


‘पहले सदके उतारे गए हैं, फिर हम मारे गए हैं’ शेर सुनाते हुए बापू ने कहा कि भक्ति में कई विघ्न आते हैं। विघ्न प्रसन्नता में वृद्धि करता है। विघ्न आए तो चिंतित न होना। यह समझना कि परमात्मा को भक्ति कबूल हो गई। भक्ति रस है। ‘शाखों को तुम क्या छू आए, कांटों से भी खुशबू आए’ शेर सुनाते हुए बोले कि अत्यंत अहंकार जीव को दुष्ट बनाता है। यही कारण है ब्रह्म संबंध नहीं हो पाता। ठाकुरजी और चैतन्य महाप्रभु का प्रसंग सुनाते बताया कि महाप्रभु प्रसन्न होकर जिसे प्रभु के पास भेजते हैं उसे ठाकुर स्वीकार कर लेते हैं। महाप्रभु वैष्णव सेवा और भक्ति से प्रसन्न होते हैं। निःस्वार्थ भाव से सेवा करें। उंच-नीच या जात-पात का भेद न रखें। उन्होंने कहा कि भक्ति नेत्र से विश्व रूप दर्शन करें। विश्व रूप दर्शन से ज्ञान प्राप्ति होती है। माया का मोह छूटता है। अक्रूर घाट से कृष्ण के लौटते वक्त गोपियों की विरह वेदना पर ‘छुप गया कोई रे दिल से पुकार के, दर्द अनोखा हाय दे गया प्यार से’ शेर सुनाते भावुक हुए बोले, चला गया लीला कर के यार। गुरुवार को कथा मानसरोवर में होगी। -सुमित सारस्वत, मो.9462737273


मुस्कुराहट की कुलदेवी प्रसन्नता
बापू ने विनोद करते हुए कहा कि यह कृष्ण की नगरी है यहां आनंद करो। प्रसन्नता मुस्कुराहट की कुलदेवी है। सबके गुरु ब्राह्मण, ब्राह्मण के गुरु संन्यासी, संन्यासी के गुरु अविनाशी, अविनाशी के गुरु ब्रजवासी। यह सुनकर पूरा पांडाल ठहाकों से गूंज उठा। भज मन श्रीराधे.. कीर्तन गाते हुए श्रोता मंत्रमुग्ध होकर झूम उठे।

प्रेम देखकर सगाई करो
भगवान शिव-पार्वती का विवाह प्रसंग सुनाते हुए बापू ने संदेश दिया कि सगाई प्रेम देखकर करो। रिश्ता जोड़ने के लिए परिवार, व्यापार, कुल, रंग, रूप ना देखें। भगवान शिव और माता पार्वती ने भी एक-दूसरे के प्रति प्रेम भाव देखकर सगाई की। प्रेम संबंधों से रिश्ता दूसरों के लिए प्रेरणा बनता है।

धोखा देने वाले पर कब तक भरोसा करें ?
एक भक्त के इस सवाल पर बापू ने कहा कि अगर भरोसा करना हो तो लुट जाना, मिट जाना, हार जाना, मार खाना, गाली सुनना, बदनामी सहन करने की तैयारी करके रखना। भरोसा भजन है। याद रखना जिसके पास विश्वास है उसके पास विश्वनाथ है। ‘था जलाना ही तो किसलिए मेरे गेसूं संवारे गए..’ शेर सुनाते हुए बोले, जिंदगी से कभी शिकायत न करना।

नया भजन सुनें : सांवरिया तेरी याद में

बापू ने सुनाए मासूम गाज़ियाबादी के शेर..
जिंदगी से कोई शिकवा नहीं,
जैसे गुजरी गुजारे गए।
एक तुम थे जो न वापस मुड़े,
एक हम थे जो तुम्हें पुकारे ही गए।
सुनते दीवाने की भी जरा,
आप पत्थर ही मारे गए।

अपने विचार नीचे कमेंट बॉक्स में लिखें..
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November 14, 2017

सात प्रकार से की जाती है परिक्रमा | 7 Types of Parikrama

मानस परिक्रमा में मोरारी बापू ने मानस की सात्विक-तात्विक चर्चा करते हुए बताया कि जामवंत के अनुसार सात प्रकार से परिक्रमा की जाती है। इसे सप्तपदी परिक्रमा भी कहते हैं। जैसे सात सोपान, सात दिवसीय भागवत कथा, ज्ञान की सात भूमिका, आकाश में सप्तऋषि मंडल है, उसी तरह परिक्रमा के भी सात प्रकार हैं। चरण, मन, बुद्धि, चित्त, अहंकार, दर्शन और श्रवण से परिक्रमा कर सकते हैं। परिक्रमा दो घड़ी की भी हो तो जीवन धन्य हो जाता है।

ब्रज चौरासी कोस वृंदावन में आयोजित रामकथा में बापू ने कहा कि चरणों से जो परिक्रमा करे उसके हदय में राम विराजते हैं। तीर्थयात्रा पर भगवान की रज है। चरण परिक्रमा करने पर शायद वो रज मिल जाए जिससे अहिल्या का उद्वार हुआ था। याद रखना प्रभु रज मिलने पर सात जन्म का पाप छूट जाता है। मन से की जाने वाली परिक्रमा में देखा-देखी नहीं करें, यह बाधा बनती है। शरीर स्वस्थ ना हो, मौसम अनुकूल ना हो, आर्थिक स्थिति अच्छी ना हो तो बौद्धिक परिक्रमा करें। चित्त एकाग्रचित हो जाए तो परिक्रमा है। अहंकार मुक्त होना भी परिक्रमा है। परमात्मा ने पलकें इसलिए दी हैं कि जितना देखना हो देखो, फिर पलकें झुका दो। चारों ओर देखो हरि दिखे तो नेत्रों से दर्शन परिक्रमा है। भगवद कथा बार-बार सुनना श्रवण परिक्रमा है। हजारों-लाखों भक्त श्रवण परिक्रमा कर रहे हैं। इसीलिए हर कथाकार की कथा में हजारों श्रोता आते हैं। परिक्रमा अनवरत होनी चाहिए। -सुमित सारस्वत, मो.9462737273


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मोरारी बापू ने बताया सुखद दांपत्य का सूत्र | Morari Bapu in Vrindavan

भगवान बांकेबिहारी के पावन धाम वृंदावन में संत मोरारी बापू ने सुखद दांपत्य का सूत्र बताया। उन्होंने कहा कि राम-सीता, लक्ष्मी-नारायण और शिव-पार्वती का दांपत्य सुखद है। सीता ने वन में राम की सेवा की। लक्ष्मीजी नारायण के चरण दबाती है। पार्वती ने शिव की आज्ञा का पालन किया। इनसे प्रेरणा लेकर दांपत्य सुंदर बनाओ। एक-दूसरे का आदर करो। पति-पत्नी के बीच संबंध मधुर होने चाहिए। बात-बात पर झगड़ा या क्रोध करना उचित नहीं। वे यहां ब्रज चौरासी कोस में आयोजित मानस परिक्रमा कथा के चौथे दिन प्रवचन दे रहे थे।


बापू ने कहा कि रामकथा संजीवनी है। यह जीना सिखाती है। कथा में जीवन जीने का संकल्प लेकर आओ। जीवन के हर पल का आनंद लो। कई बार तो ऐसा लगता है आनंद लेने के लिए जीवन कम है। खुश रहने का कोई लम्हा न छोड़ो। तुलसी मगन भयो, राम गुण गाए के.. गुनगुनाते हुए बापू बोले कि भजन एक महारोग है जिसे लग जाए उसे कोई कामना नहीं रहती। जब तक काम नहीं मिटता तब तक संतोष नहीं मिलता। काम है तब तक सुख नहीं। काम को मिटाने के लिए राम भजन करें। इस संदेश के साथ उन्होंने ‘मुस्कुराते रहो गुनगुनाते रहो, जीवन संगीत है सुर सजाते रहो..’ गीत सुनाया।

‘कल जहां मजहबी जलसा हुआ था, धुआं सा उठ रहा है क्यूं वहां से’ शेर सुनाते हुए बापू ने कहा कि किसी की आलोचना न करें। आलोचना खूबसूरत लिबास में लिपटी निंदा है। निंदा हिंसा समान है। हिंसा अधर्म है। अधर्म का निर्वाण (मोक्ष) करने के लिए अवतार होता है। जो मुनि का मौन और ऋषि की वाणी समझ ले उसका कल्याण है। बुधवार को कथा अक्रूर घाट पर होगी। -सुमित सारस्वत, मो.9462737273


कृष्ण को सुख मिले वो प्रेम
बापू ने चैतन्य महाप्रभु के शब्द ‘कृष्ण सुख वांछा, प्रेम तो प्रबल..’ सुनाते हुए बताया कि काम और प्रेम में अंतर है। काम अंधेरा है और प्रेम उजाला फैलाने वाला भास्कर है। हमें सुख मिले वो काम है और जिससे कृष्ण को सुख मिले वो प्रेम है।

नर बन कमाओ, नारायण बन बांटो
बापू ने गुजराती गजल की पंक्ति सुनाते हुए दान का महत्व बताया। कहा, कमाई का सदुपयोग होना चाहिए। नर बनकर दो हाथों से कमाओ और नारायण बनकर चार हाथों से बांटो। खुदा दे तो बांट दो और न भी दे तो मुस्कुराओ। परमात्मा से प्रार्थना करो, दे तो इतना दे कि संसार के काम आए।
नया भजन सुनें : सांवरिया तेरी याद में

बुजुर्गों की सेवा का संदेश
बापू ने बुजुर्गों की सेवा करने का संदेश देते हुए कहा कि आखरी वक्त में सेवा करे वही सच्चा हितैषी है। हाथ-पैरों में जान रहती है तब तक तो सभी पास रहते हैं मगर अंतिम समय में इंसान अकेला हो जाता है। यह कहते हुए बापू की आंखें नम हो गई।

मानस मंच पर निधिवन का नजारा
मंगलवार को वृंदावन में हुई कथा के मंच पर निधिवन का नजारा दिखाई दिया। बापू ने इसी के बीच बैठकर कथा का अमृतपान करवाया। मंच पर निधिवन का चित्रण सभी का ध्यान आकर्षित कर रहा था। वन के बीच भगवान श्रीकृष्ण राधारानी के साथ प्रेम लीला कर रहे थे। हरियाली से आच्छादित वृक्षों के बीच बैठे मयूर मन को आनंदित कर रहे थे।


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ठाकुर की नगरी में मोरारी बापू ने शायर बन जीता दिल | Shayar Morari Bapu

ब्रज चौरासी कोस में मानस परिक्रमा कथा के चौथे पड़ाव वृंदावन में रामकथा मर्मज्ञ मोरारी बापू ने एक के बाद एक कई शेर सुनाकर श्रोताओं का दिल जीत लिया। प्रवचन के साथ गीत, गजल, गाने गुनगुना कर कथा को आनंदित बनाने वाले बापू ने ठाकुर बांकेबिहारी की नगरी में राज कौशिक, मासूम गाज़ियाबादी जैसे विख्यात शायरों के शेर सुनाकर खूब दाद बटोरी। गहरे राज छुपाए शेर पर कभी गगनभेदी तालियां गूंजी तो कभी माहौल भावुक हो गया। -सुमित सारस्वत, मो.9462737273


अगर साहिब मेरा कद आंकना है,
तो उतर आइए जमीं पर आसमां से।


बड़ों की रंजिशों में क्या बताऊँ,
कई मासूम चले गए अपनी जान से।


कल जहां मजहबी जलसा हुआ था,
धुआं सा उठ रहा है क्यूं वहां से।


सगुण सा लग रहा था वो फकत देखा उसे जब तक,
छुआ जब तब उसे तो मुझे वो निर्गुण लगा।

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November 13, 2017

राधा के बरसाना में मोरारी बापू ने दिया प्रेम का अनूठा संदेश | Message of Love by Morari Bapu

कृष्णप्रिया राधा की नगरी बरसाना में मानस परिक्रमा कथा सुनाते हुए संत मोरारी बापू ने प्रेम का मधुर संदेश दिया। शिवरंजनी राग गाते हुए बापू ने दशरथ के चारों पुत्रों की प्रीति सुनाई। वे बोले, जो मुनियों का परम धन, आश्रितों का सर्वस्व, शिव का प्राण है उस परमतत्व ने बाल लीला के रस में सुख अनुभव किया। लक्ष्मण ने बचपन में ही राम चरण को अपना स्वामी मान लिया था। शत्रुघ्न बड़े भ्राता भरत के सेवक बनकर रहे। हमेशा मौन रहे। बड़े भाईयों के आगे कभी नहीं बोले। हजारों आफतों से वो बच जाता है, जो ज्यादा सुने और कम बोले..’ शेर सुनाकर संकेत किया कि विवादों से बचने के लिए कम बोलें। गुजराती शेर ‘नव बोल्या म्हां नव गुण..’ सुनाते हुए कहा कि जो चुप रहे वो सबसे अधिक गुणवान है। मौन रहना बड़ा तप है। अयोध्या में चारों भाईयों के स्नेह की चर्चा होती थी। चारों बेटों को किसी की नजर ना लगे इसलिए कौशल्या माता तिनका तोड़ती थी।


दांपत्य प्रेम का संदेश देते हुए कहा कि स्वयंवर में भांति-भांति के राजा-महाराजा सीता को निहार रहे थे तो राम व्याकुल हो गए। सीता को किसी की नजर ना लग जाए इसलिए वो तिनका तोड़ना चाहते थे। जनकपुर में इतनी स्वच्छता थी कि तिनका भी नहीं मिला तो राम ने धनुष तोड़ दिया। रिश्ते इतने मधुर और मजबूत होने चाहिए। लो आ गई उनकी याद, वो नहीं आए.. गीत की पंक्ति गुनगुनाते हुए कहा कि प्रेम में प्रतीक्षा होनी चाहिए कि वो आएगा। केवट और शबरी ने प्रतीक्षा की तो राम आ गए। -सुमित सारस्वत, मो.9462737273

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मैं आपकी हेल्प करूं
प्रेम का किस्सा सुनाते हुए बापू बोले, प्रेमी हर वक्त प्रेमिका के पीछे घूमता रहता है। वो जहां जाए वहां उसकी खुशबू लेते हुए पीछे-पीछे पहुंचता रहता है। बस, ट्रेन, हवाई जहाज सबका पता रखता है। पहचाने नहीं फिर भी उससे पूछता है, मैं आपकी क्या हेल्प करूं। बैग उठा लूं आपका। इस व्यंग्य पर पूरा पांडाल ठहाकों से गूंज उठा।

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नींद नहीं आ रही क्या करूं!
बापू ने रुग्ण होते दांपत्य रिश्ते पर भी व्यंग्य किया। पति-पत्नी का व्यंग्य सुनाते हुए कहा कि ‘एक पति को नींद नहीं आ रही थी। पत्नी को कहा कि मुझे नींद नहीं आ रही क्या करूं तो वो बोली रसोई में झूठे बर्तन रखे हैं उन्हें साफ कर दो। यह सुनकर पति तपाक से बोला, मैं तो नींद में बोल रहा था। मुझे तो कब से नींद आ गई।’ यह सुनकर पांडाल में हंसी का फव्वारा फूट पड़ा। बापू ने शादी से पहले चंद्रमुखी, शादी के बाद सूर्यमुखी और तलाक के वक्त ज्वालामुखी का किस्सा भी सुनाया।

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जीवन मोबाइल नहीं, माला के लिए है
बापू ने आधुनिक युग में बढ़ते मोबाइल उपयोग पर चिंता व्यक्त करते हुए दुष्प्रभाव बताए। उन्होंने कहा कि लोग 24 घंटे हर जगह मोबाइल पर लगे रहते हैं। घर-परिवार, पढ़ाई और दफ्तर का काम भूल गए हैं। बापू ने सलाह दी कि मोबाइल से दूर रहें। यह सेहत के लिए हानिकारक है। रात को जब फ्री होकर सोने जाएं तब कुछ समय फेसबुक और व्हाट्सएप देख लो, दिनभर नहीं। मोबाइल भूत है, इसे छोड़ो और भूतनाथ को भजो। जीवन मोबाइल के लिए नहीं, माला के लिए है। परमात्मा का नाम जाप करो।
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मनुष्य को जगाए रखती है ब्रज भूमि : मोरारी बापू | Morari Bapu in Barsana

ब्रज चौरासी कोस में आयोजित मानस परिक्रमा कथा के तीसरे पड़ाव बरसाना में संत मोरारी बापू ने कहा कि ब्रज भूमि मनुष्य को जगाए रखती है। यहां जो सोता है वो खोता है। न जाने कब ठाकुर विचरण करते हुए आपके करीब आ जाए। हर पल का एंजॉय करो। ब्रज के रज-रज में ईश्वर का वास है। भगवान गौरांग की कृपा से श्रीमन प्रभु रूप गोस्वामीजी महाराज को ब्रज मंडल में परमात्मा की लीला का दर्शन होता था। जिस भूमि पर इन महापुरूषों को दर्शन हुए हैं उस भूमि का दर्शन करना भी हमारे लिए बलप्रद है।


बापू ने कहा कि सभी की परिक्रमा अलग-अलग है। परिक्रमा का निषेध और उपेक्षा नहीं है। किसी के प्रति उपेक्षा और किसी का निषेध भजन की बाधा है। हम किसी की उपेक्षा ना करें। निषेध ना करें। फिर भी सामने वाले को लगे की उपेक्षा हुई है तो भजन धारा में बाधा उत्पन्न होती है। धारा को अखण्ड प्रवाहित रखने के लिए बेगुनाह होते हुए भी बुद्ध पुरूष से क्षमा मांग लेना। बापू ने बताया कि भगवान रामानंदी परंपरा की परिक्रमा कामदगिरी है। निम्बार्क परंपरा में परिक्रमा गिरीराज, धर्मशाला मथुरा, कुलदेवी रूकमणी, गोपाल गायत्री, अच्युत गौत्र है। मधुवाचार्य परंपरा में अलखनंदा है। श्रीमन महाप्रभु वल्लभ कुल की परिक्रमा अक्षय वट और जगदगुरु शंकराचार्य की परिक्रमा केदार है। भगवान कृष्ण की परिक्रमा बरसाना। सदैव श्रीराधे के केंद्र में घूमते रहते। मीरा बाई ने गिरधर गोपाल, गंगा सती ने पानबाई, शबरी ने महर्षि मतंग, केवट ने राम चरण की परिक्रमा की। हनुमानजी की परिक्रमा रामकथा है। जहां भी कथा होती है, पहुंच जाते हैं। गांधी बापू ने सत्य, चैतन्य महाप्रभु ने प्रेम और बुद्ध ने करुणा की परिक्रमा कर सत्य, प्रेम, करुणा अपनाने का संदेश दिया।


बापू ने कहा कि सांसारिक प्रतिस्पर्धा में जो जीते उसे मान मिलता है और भक्ति मार्ग में जो हारता है उसे नाम मिलता है। जगत में नाम सुमिरन बढ़ना चाहिए। इससे आत्मा की प्राप्ति हो ना हो मगर परमात्मा की प्राप्ति अवश्य होती है। चैतन्य महाप्रभु को सभी विद्याएं प्राप्त थी मगर वो कहते थे कि भगवत नाम विद्या की सदैव चाह रहती है। वे हर पल हरि नाम सुमिरन करते थे। चौरासी कोस में पग-पग पर भगवद नाम रचा-बसा है। सोमवार को कथा में बापू ने बरसाना की गौशाला को 5 लाख रुपए तुलसी दानपत्र देने की घोषणा की। मंगलवार को कथा वृंदावन में होगी। -सुमित सारस्वत, मो.9462737273


दुनिया कृष्ण की, कृष्ण राधे का
बापू ने कहा कि पूरी दुनिया मुखचंद्र और त्रिभुवन विमोहित मीत की लालायित रहती थी। तीनों जगत जलचर, थलचर, नभचर कृष्ण के अदभुत मधुर रूप में डूबता था मगर कोई ये नहीं पहचान पाया कि ये किसके रूप में डूबा है। तब एक चंद्र ऐसा बरसाने में उगा कि दो नेत्र चकोर बनकर उसकी परिक्रमा करते रहते। इस जगत में सबसे सुंदर राधिका है। कृृष्ण बरसाने की राधा के रूप में डूबे रहते थे। सबसे अधिक सुख रामा में है। रा यानि राधा और मा यानि माधव।


साधु से घबराने लगे लोग
बापू ने कहा कि प्रत्येक साधु को प्रणाम करें। शीलवंत साधु को बार-बार प्रणाम करें। स्पष्ट किया कि साधु वो है जिसके निकट आकर अभय हो जाएं। आजकल साधु ऐसे हो गए कि लोग निकट आने से घबराते हैं। निकट वाले भी भागने लगे हैं।


युवानी में करें प्रभु भक्ति
बापू ने भक्ति का महत्व समझाते हुए कहा कि जब बासी फल परमात्मा को नहीं परोसते तो फिर बासी जीवन परमात्मा को क्यों परोसते हैं। भक्ति जवानी में करें। परमात्मा को याद करने के लिए बुढ़ापे का इंतजार ना करें। परमात्मा आनंद स्वरूप है। हर पल आनंद लो।

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