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October 15, 2025

कांग्रेस ने जलदाय विभाग का घेराव कर बजाई खाली मटकियां, पेयजल किल्लत पर आक्रोश प्रदर्शन - Congress Protest In Rajasthan

✍🏻 सुमित सारस्वत
इस साल देश-प्रदेश में भरपूर बारिश हुई. वर्षा जल से नदी, तालाब, बांध भर गए. इसके बावजूद घरों में पानी के हौद खाली हैं. राजस्थान (Rajasthan) में जलदाय विभाग पूरा पानी नहीं दे रहा. आलम यह है कि इतनी बारिश के बावजूद सर्दी का मौसम आने पर भी लोग पेयजल किल्लत का सामना कर रहे हैं. इसी बात से गुस्साई कांग्रेस (Congress) ने आज ब्यावर (Beawar) जिला मुख्यालय पर दो घंटे तक आक्रोश प्रदर्शन किया.

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दीपावली पर भी पीने का पानी पूरा नहीं
ब्यावर के कांग्रेस कार्यकर्ता बुधवार को हाथों में खाली मटकियां लेकर जलदाय विभाग के दफ्तर पहुंचे. यहां एईएन सुरेंद्र तंवर व सुनील जीनगर का घेराव किया. पेयजल किल्लत को लेकर नाराजगी जताते हुए खाली मटकियां बजाकर विरोध प्रदर्शन किया. सेवादल जिलाध्यक्ष विक्रम सोनी ने बताया कि हिन्दुओं के सबसे बड़े महापर्व दीपावली (Diwali Festival) पर भी जनता को पीने का पानी नसीब नहीं हो रहा है. ब्यावर शहर को 31 एमएलडी पानी की आवश्यकता है लेकिन सरकार 24 एमएलडी पानी ही दे रही है. इससे पेयजल आपूर्ति प्रभावित हो रही है.

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72 से 96 घंटे में हो रही जलापूर्ति
प्रदेश महासचिव सोहन मेवाड़ा ने आरोप लगाया कि विकास के दावे करने वाली सरकार (Government) पीने का पानी भी 72 घंटे से 96 घंटे के अंतराल में दे रही है. त्योहार के वक्त जनता पेयजल किल्लत से परेशान है. उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी दी कि यदि तीन दिन के भीतर व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ और पेयजल सप्लाई 48 घंटे के अंतराल में नहीं की गई तो कांग्रेस पार्टी जनता के साथ सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेगी.

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चीफ इंजीनियर नहीं दे सके जवाब
प्रदर्शन के दौरान पूर्व विधायक माणक डाणी ने अजमेर के चीफ इंजीनियर रामचंद्र से मोबाइल फोन पर बात की. डाणी ने जानना चाहा कि ब्यावर शहर को कितने एमएलडी पानी मिल रहा है और कितने एमएलडी पानी की सप्लाई की जा रही है. इसका जवाब अधिकारी नहीं दे सके. ©सुमित सारस्वत

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यह कार्यकर्ता रहे मौजूद
प्रदर्शन के दौरान प्रदेश सचिव सुलक्षणा शर्मा, संपति बोहरा, उर्मिला कंवरिया, ऋषि लांबा, कैलाश गहलोत, विमल चौहान, माणक बोहरा, ज्योति कंवर, बाबूलाल पंवार, अरविंद माथुर, लोकेश कुमार, भरत भाटी, तुषार महर्षि समेत कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद थे.

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December 12, 2024

श्री सीमेंट ने तोड़ा किसान का घर, कंपनी की तानाशाही के खिलाफ प्रदर्शन - Farmers protest against Shree Cement

✍🏻 सुमित सारस्वत
श्री सीमेंट कंपनी एक बार फिर विवादों में है. इस बार कंपनी पर किसानों के घर तोड़ने का गंभीर आराेप लगा है. मुआवजा नहीं मिलने पर एक किसान ने कंपनी के प्रवेश द्वार पर आत्मदाह का प्रयास किया. बड़ी संख्या में मौके पर मौजूद लाेगों ने श्री सीमेंट (Shree Cement) कंपनी पर तानाशाही करने का आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन किया.

किसान विद्याधर ने दो दिन पहले इच्छा मृत्यु के लिए एसडीएम और कलेक्टर को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन भी दिया था. इत्तला मिलने पर पूर्व मंत्री राजेंद्र गुढ़ा (Rajendra Gudha) भी मौके पर पहुंचे और कंपनी की मनमानी के खिलाफ गेट पर चढ़ गए. गुढ़ा ने किसान का समर्थन करते हुए जमीन का मुआवजा मांगा. मामला झुंझुनूं (Jhunjhunu) के नवलगढ़ (Nawalgarh) का है.

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प्रदर्शन के दौरान पूर्व मंत्री राजेंद्र गुढ़ा ने कंपनी प्रबंधन पर कई गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने आरोप लगाया कि श्री सीमेंट कंपनी ने नियमों को ताक में रखकर नवलगढ़ में प्लांट लगाया है. कंपनी के पास पॉल्यूशन की एनओसी नहीं है. बिना बाउंड्री के माइनिंग और ब्लास्टिंग कर रहे हैं. ब्लास्टिंग से कोई भी हादसा हो सकता है, कोई मर सकता है. गुढ़ा ने दावा किया कि उनके पास कंपनी की 50 कमियां हैं. प्रशासन चोरों की रखवाली कर रहा है. किसान परिवार को न्याय नहीं मिल रहा है और प्रशासनिक अधिकारी कंपनी की पैरवी कर रहे हैं.

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प्रदर्शन के दौरान मौके पर मौजूद एक ग्रामीण ने बताया कि करीब एक महीने पहले श्री सीमेंट कंपनी प्रबंधन ने किसान का घर ताेड़कर उसे बेघर कर दिया. किसान के बच्चे छोटे हैं और वाइफ प्रेगनेंट है. एक अन्य ग्रामीण ने आरोप लगाया कि कंपनी ने बीते 2-3 साल में कई किसानों के घर तोड़ दिए. खेत उजाड़ दिए. अभी उनके पास रहने को छत नहीं है. न कंपनी सुनवाई कर रही है और न ही प्रशासन ने सुध ली है. कंपनी ने इलाके का पर्यावरण संतुलन बिगाड़ दिया है. किसानों (Farmers) की मांग है कि उन्हें जमीन का उचित मुआवजा मिलना चाहिए. साथ ही बेघर हुए परिवार के किसी एक सदस्य को कंपनी में रोजगार दिया जाए.

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इस मामले में कंपनी के यूनिट हैड एचसी गुप्ता ने मीडिया को बताया कि प्रभावित किसानों को 26 लाख रुपए प्रति बीघा का मुआवजा निर्धारित किया गया, वह देने को तैयार हैं. आश्वासन के बाद किसानों ने कंपनी को सात दिन का अल्टीमेटम और चेतावनी दी है कि यदि मांग पूरी नहीं हुई तो उग्र आंदोलन करेंगे. अब देखना रोचक होगा कि उत्तर भारत की बड़ी कंपनी किसान के आगे झुकेगी या फिर आंदोलन (Farmers Protest) उग्र होगा. ©सुमित सारस्वत

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July 23, 2024

राजस्थान में बीजेपी-कांग्रेस के पार्षद एकजुट होकर दे रहे धरना, जानें क्या है मांग ?

 ✍🏻सुमित सारस्वत
'रिंद जो ज़र्फ़ उठा लें वही साग़र बन जाए, जिस जगह बैठ के पी लें वही मय-ख़ाना बन जाए' शायर असग़र गोंडवी का यह शेर ब्यावर शहर की हकीकत बयां कर रहा है. सरकार की सरपरस्ती में यहां कदम-कदम पर मयखाने खुले हैं. आलम ऐसा है कि शराबी सरेआम जाम छलका रहे हैं. आबादी क्षेत्र में खुला ऐसा ही एक मयखाना आज जनता और जनप्रतिनिधियों के निशाने पर है.

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अजमेर रोड स्थित मोतीपुरा क्षेत्र में मुख्य मार्ग पर खुले मयखाने का लोग विरोध कर रहे हैं. आरोप है कि आबकारी विभाग ने नियमों की अनदेखी कर शराब ठेके का लाइसेंस जारी किया है. भाजपा और कांग्रेस के पार्षद और पार्टी पदाधिकारी भी जनता के साथ विरोध प्रदर्शन में आवाज बुलंद कर रहे हैं. सोमवार को जिला कलक्टर से मुलाकात कर शराब की दुकान बंद करने की मांग करने के बाद मंगलवार को जब दुकान खुली तो लोग नारेबाजी करते हुए दुकान के बाहर धरना देकर बैठ गए. 'दारू का ठेका बंद हो, बंद हो' नारे लगाते हुए क्षेत्रवासियों ने दो टूक चेतावनी दी कि किसी भी स्थिति में यहां शराब ठेका संचालित नहीं होने देंगे.

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जनप्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि आबकारी विभाग ने अजमेर रोड क्षेत्र में जगह-जगह शराब ठेकों के लाइसेंस जारी किए हैं. इससे क्षेत्रवासी परेशान हैं. प्रदर्शन में पार्षद मुन्नी गहलोत, सुनीता भाटी, हरीश सांखला, भूपेंद्रजीत भोजक, भाजपा नेता नरेंद्र चौहान, बबीता चौहान, शंकर यादव, कांग्रेस नेता शंभू यादव, राम यादव, शैलेंद्र सांखला, मुकेश पालड़िया समेत कई क्षेत्रवासी मौजूद रहे. गौरतलब है कि कुछ साल पहले सेंदड़ा रोड पर आबादी क्षेत्र में खुली शराब की दुकान का क्षेत्रवासियों ने इसी तरह विरोध किया था. कई दिनों तक धरना प्रदर्शन के बाद जनता की जीत हुई. ©सुमित सारस्वत


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