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July 20, 2026

घरों में गैर-कानूनी तौर पर कैद में कछुए, 13 कछुओं को रेक्स्यू कर जंगल में छोड़ा - Tortoises Illegally Kept in Homes

राजस्थान (Rajasthan) के ब्यावर (Beawar) में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही है. यहां अधिकांश घरों में लोगों ने गैर-कानूनी रूप से कछुओं को कैद कर रखा है. राजस्थान सरकार की सोच को साकार करने के लिए जीव दया सेवा संस्था ने वन्यजीव संरक्षण की पहल की. संस्था ने जन जागरूकता अभियान के जरिए ब्यावर शहर के विभिन्न इलाकों से 13 कछुओं को रेस्क्यू किया. क्षेत्रीय वन अधिकारी कैलाश गुर्जर के निर्देशन में वनपाल भंवर सिंह व फॉरेस्ट गार्ड मुराद काठात को सभी कछुए सुपुर्द किए. इसके बाद वन विभाग के कर्मचारियों ने इन सभी कछुओं को प्राकृतिक आवास के लिए जंगल क्षेत्र में सुरक्षित छोड़ दिया. ©सुमित सारस्वत

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कछुओं का प्राकृतिक प्रजनन रूका
जीव दया सेवा संस्था सचिव कपिल सेन ने बताया कि घरों के अंदर कछुओं को सीमित स्थान में कैद रखा जाता है, जिससे वे प्राकृतिक वातावरण, विविध प्रकार की वनस्पतियों और प्राकृतिक भोजन से वंचित हो जाते हैं. उन्हें केवल कुछ सब्जियों तक सीमित कर दिया जाता है, जिससे उनका स्वाभाविक जीवन प्रभावित होता है. कैद में रहने के कारण उनका प्राकृतिक प्रजनन भी नहीं हो पाता और उन्हें शारीरिक व जैविक समस्याएं होती है.

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घरों में कछुआ रखना गैर-कानूनी
ब्यावर के क्षेत्रीय वन अधिकारी कैलाश गुर्जर ने बताया कि जीव दया सेवा संस्था की ओर से रेस्क्यू किए गए सभी 13 कछुओं को वन क्षेत्र में सुरक्षित छोड़ दिया है. घर में जीवित कछुआ नहीं रखना चाहिए. कछुओं की लगभग सभी प्रजातियां वन्यजीव संरक्षण अधिनियम (
Wildlife Protection Act) के तहत संरक्षित हैं. घर में जीवित कछुआ रखना गैर-कानूनी और अपराध है. जीवित कछुआ घर में रखने पर 7 साल तक की जेल और जुर्माना हो सकता है. कछुए खतरनाक बैक्टीरिया भी फैला सकते हैं जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं.

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मान्यताओं के कारण घरों में कछुए
धार्मिक और वास्तु मान्यताओं के अनुसार कछुए को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है और यह धन-समृद्धि का प्रतीक है. इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है. इसी सोच के कारण अधिकांश लोग जीवित कछुए को घर में रखते हैं जबकि जीवित कछुए की जगह धातु या क्रिस्टल से बना कछुआ घर में रख सकते हैं.

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