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April 20, 2025

दुष्कर्मी महिला को 20 साल की जेल, होटल में 15 साल के लड़के को शराब पिलाकर बनाया था हवस का शिकार

✍ सुमित सारस्वत
मामला चौंकाने वाला है लेकिन हकीकत है. कलयुग में महिलाएं भी 'दुष्कर्म' करने लगी है. हैरान कर देने वाला यह मामला राजस्थान (Rajasthan) का है, जहां एक 40 साल की महिला ने 15 साल के नाबालिग लड़के को अपनी हवस का शिकार बनाया.

शारीरिक संबंध बनाने से पहले लड़के को शराब भी पिलाई. यौन शोषण (Sexually Abused) के इस मामले में अब बूंदी पॉक्सो कोर्ट (Pocso Court) ने महिला को दोषी मानकर 20 साल की सजा सुनाई है. साथ ही 45 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है. इस मामले में 17 गवाह और 37 दस्तावेज पेश किए गए थे.

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जानकारी के अनुसार, बूंदी (Bundi) की एक महिला ने 7 नवंबर 2023 को दी रिपोर्ट में आरोप लगाया था कि 40 साल की महिला ने उसके बेटे का यौन शोषण किया है. अगस्त 2023 में आरोपी महिला लड़के को अपने साथ जयपुर ले गई. वहां एक होटल के रूम में उसे शराब पिलाई और शारीरिक शोषण (Rape) किया. पुलिस ने नाबालिग को जयपुर से बरामद कर मामले की जांच की. लड़के के बयान सुनकर सभी दंग रह गए. लड़के ने आपबीती में महिला की करतूतों का खुलासा किया.

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सांस्कृतिक प्रदेश (Cultural State) राजस्थान का यह मामला सोचने पर मजबूर करने वाला है कि सभ्य समाज किस दिशा की ओर बढ़ रहा है. जिस समाज में बढ़ते अपराधों के बीच बुलंद आवाज में महिला सुरक्षा (Women Safety) की मांग की जा रही हो उसी समाज की महिलाएं अपनी हवस मिटाने के लिए दुष्कर्म जैसे अपराध करने लगी है. इस मामले से जेहन में सवाल हैं कि क्या अब लड़के भी घर के बाहर सुरक्षित नहीं रहेंगे ? क्या अब बेटों को भी सिखाना होगा कि दुष्कर्मी महिलाओं से कैसे बचें ?
©सुमित सारस्वत

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January 5, 2025

‘ये ब्रेस्ट हैं, संतरे नहीं…’, जानें इस बात पर क्यों मचा बवाल ? - These are Breasts not Oranges

✍🏻 सुमित सारस्वत
दिल्ली मेट्रो (Delhi Metro) एक बार फिर देश की सुर्खियों में है. कभी कपल्स की अश्लील हरकतों के कारण, कभी लड़ाई झगड़ों के कारण, तो कभी फूहड़ रील्स को लेकर चर्चा में रहने वाली मेट्रो इस बार एक पोस्टर के कारण देश की सुर्खियों में आई है.

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मामले के अनुसार, ब्रेस्ट कैंसर अवेयरनेस के लिए यूवीकैन फाउंडेशन ने एक विज्ञापन जारी किया है. AI जेनरेटेड इस विज्ञापन (Breast Cancer Awareness Advertisement) को ज्यादा क्रिएटिव बनने के चक्कर में ऐसा बना दिया कि बवाल मच गया. दिल्ली मेट्रो में लगे विज्ञापन को देखकर पैसेंजर्स ने आपत्ति की. पोस्टर को देखकर मेट्रो में सफर करने वाली महिलाओं और लड़कियों को शर्म आ गई. विज्ञापन में लिखा है- 'हर महीने अपने संतरे की जांच करें.'

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ब्रेस्ट कैंसर जागरूकता के लिए बनाकर लगाए गए इस पोस्टर की हर तरफ आलोचना हो रही है. लोग इन पोस्टर्स को अश्लील बताकर विरोध कर रहे हैं. ब्रेस्ट को संतरे के रूप में संदर्भित किए गए इस पोस्टर में एक बस के अंदर संतरे पकड़े महिलाओं की एआई-जनरेटेड तस्वीरें हैं. महिलाओं का कहना है कि- ‘ये ब्रेस्ट हैं, संतरे नहीं.’ सोशल मीडिया पर कई लोगों ने DMRC से सवाल किया है कि ट्रेन में इस तरह के विज्ञापन क्यों लगाने दिए? बवाल मचने के साथ ही लोग इन पोस्टर्स को तत्काल हटाने की मांग कर रहे हैं.

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इस मामले में यूवीकैन फाउंडेशन (YouWeCan Foundation) ने मीडिया को दिए बयान में कहा है कि अगर संतरों के इस्तेमाल से लोग ब्रेस्ट के स्वास्थ्य की बात करते हैं और उससे एक भी जिंदगी बचती है तो यह सार्थक है. उन्होंने इस बात पर चिंता भी जताई कि भारत में ब्रेस्ट की बात करने में लोग असहज महसूस करते हैं. शर्म करने की बजाय ब्रेस्ट अवेयरनेस की बात करनी चाहिए.
©सुमित सारस्वत

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November 8, 2024

यूपी में महिला सुरक्षा के लिए बड़ा अहम फैसला, पुरुष टेलर नहीं ले सकेंगे महिलाओं का माप, जिम में भी रोक

✍🏻सुमित सारस्वत
भारत में बढ़ते दुष्कर्म (Rape) मामलों के बीच महिला सुरक्षा के लिए एक बड़ा अहम फैसला हुआ है. यूपी महिला आयोग ने तय किया है कि अब उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में ब्यूटी पार्लर, बुटिक, योगा सेंटर और जिम में महिलाओं के लिए पुरूषों को काम पर नहीं लगाया जा सकता.

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आयोग अध्यक्ष बबीता चौहान (Babita Chauhan) ने बताया कि यूपी में अब पुरुष टेलर महिलाओं का माप नहीं ले सकेंगे. ब्यूटी पार्लर में मेकअप का काम महिला ब्यूटीशियन और योगा सेंटर व जिम में भी महिला ट्रेनर होना जरूरी है. महिलाओं को पुरुषों के 'गलत इरादे' और 'बैड टच' से बचाने के लिए आयोग ने यह प्रस्ताव दिया है. आयोग का मानना है कि इस तरह के पेशे में शामिल पुरुषों की वजह से महिलाओं के साथ छेड़छाड़ होती है. पुरुष महिलाओं के साथ गलत व्यवहार की कोशिश करते हैं.

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आयोग अध्यक्ष ने कहा कि इस फैसले से महिला सुरक्षा बढ़ेगी. साथ ही महिलाओं के लिए नौकरी रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे. आयोग के इस फैसले को देशभर से समर्थन मिल रहा है. लोग इस फैसले पर खुशी जताते हुए पूरे देश में लागू करने की मांग कर रहे हैं.
©सुमित सारस्वत

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September 28, 2024

कृष्ण नगरी में मिल गई गीता !, जानें क्या थी घर छोड़कर वृंदावन जाने की वजह - Laapataa Ladies Found

✍🏻 सुमित सारस्वत

इन दिनों फेमस हिंदी फिल्म 'लापता लेडीज' की चर्चाओं के बीच कल शनिवार सुबह ब्यावर (Beawar) से लापता हुई गीता चौहान का पता लग गया है. परिजन का कहना है कि, गीता ने आज रविवार सुबह अपनी बेटी रानू को कॉल कर खुद के वृंदावन (Vrindavan) में सुरक्षित होने की बात कही है. उन्होंने बेटी से कहा कि 'परेशान मत होना, मैं कल घर लौट आऊंगी.'

शुक्र है कि गीता (Geeta) सुरक्षित हैं लेकिन उनके इस तरह बिना बताए चले जाने से पूरे शहर के साथ उनके परिजनों और रिश्तेदारों को काफी परेशानी हुई. सभी ने अपने-अपने वाहनों और साधनों की सहायता से उन्हें कई शहरों में तलाश किया. ब्यावर के लगभग हर व्हाट्सएप ग्रुप में कल कई कई बार उनकी तस्वीरें वायरल कर लोगों ने उनका पता लगाने का प्रयास किया.

यह सभी को पता है कि गीता भक्ति भाव से जुड़ी हैं. अगर उन्हें कहीं जाना ही था तो परिवार को बताकर चले जाते, लेकिन मानसिक तनाव में मनुष्य ऐसा नहीं सोचता. गीता की व्यक्तिगत पहचान के कारण उनका यह मामला पूरे शहर में चर्चा का विषय बन गया, इसलिए यह जानना जरूरी है कि भजन-कीर्तन करने वाली गीता को आखिर किस बात का तनाव हो गया? इस सवाल के जवाब में परिजन ने बताया कि कुछ समय से उनकी बेटी के वैवाहिक रिश्ते की बात चल रही है. परिवार को मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) का एक लड़का पसंद आया लेकिन गीता अपनी लाड़ली को इतना दूर नहीं भेजना चाहती. बस, इतनी सी बात पर परिवार में सहमति नहीं बनी और बेटी के दूर चले जाने की सोच से गीता कुछ दिन से तनाव में थी. हालांकि अभी बेटी का रिश्ता तय नहीं हुआ था. लेकिन यह तय है कि इस घटना से सबक लेकर परिवार अब गीता के विचारों का आदर करते हुए सर्व सहमति से ही कोई फैसला करेगा.

वर्तमान वक्त में लगभग हर घर में किसी न किसी बात का तनाव है. कहीं स्वास्थ्य को लेकर, तो कहीं व्यापार में मंदी. कहीं पति-पत्नी में अनबन, तो कहीं बच्चों की हरकतों से परेशानी. कहीं कर्ज से तनाव, तो कहीं जॉबलेस होने की चिंता. ऐसे नकारात्मक माहौल में भी मनुष्य को सकारात्मक रहने की बेहद आवश्यकता है. सभी को पता है कि कोरोना काल (Corona Pandemic) के बाद इम्युनिटी सिस्टम कमजोर हो गया है. आए दिन हार्ट अटैक के मामले सामने आ रहे हैं. जरूरी है कि घर-परिवार को तनावमुक्त रखें. खुश रहें और प्रत्येक व्यक्ति की खुशी का ख्याल रखें. -सुमित सारस्वत, मो.9462737273

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November 11, 2018

पहली बार बहू ने सास की अर्थी को दिया कंधा | Emotional Story of Relationship

  • पोतियों ने दादी की चिता को दी मुखाग्नि
  • समाज में कायम की नई मिसाल

पुरातन काल से चली आ रही सामाजिक रूढ़ियों और मिथक को तोड़ते हुए अपनी सास की आखिरी ख्वाहिश को पूरा करने के लिए राजस्थान के ब्यावर की एक बहू ने सास की अर्थी को कंधा देकर समाज के लिए नई मिसाल पेश की। मुक्तिधाम में दो पोतियों ने दादी की चिता को मुखाग्नि देकर अंतिम संस्कार की रस्में निभाई। संभवत: यह देश का पहला उदाहरण है जब मुक्तिधाम में महिलाओं ने महिला का पूर्ण अंतिम संस्कार किया है।


जानकारी के मुताबिक ब्यावर में रहने वाली राजपूत समाज की 70 वर्षीय बुजुर्ग महिला नीलम भाटी का शनिवार देर रात निधन हो गया। परिवार में कोई पुरुष नहीं होने पर बहू यल्पना ने सास की अर्थी को कंधा दिया। मां को देखकर प्रांजल व प्रियांशी ने भी अपनी दादी के अंतिम संस्कार की रस्में निभाई। पोतियों ने दादी की अर्थी को कंधा और मुक्तिधाम में चिता को मुखाग्नि भी दी। सास को कंधा देने वाली बहू यल्पना भाटी का कहना है कि मेरी सास ने मुझे बेटी की तरह रखा। मैंने अपनी मां समान सास की अंतिम इच्छा का सम्मान किया है।


दरअसल विवाह के कुछ समय बाद ही नीलम के पति भैरूसिंह भाटी का निधन हो गया था। इकलौते पुत्र गजेंद्र सिंह भी 15 साल पहले चल बसे। ऐसे में सास-बहू अपनी दो बेटी-पोतियों के साथ रहती थी। मां-बेटियों के इस कदम ने समाज में सास-बहू के रिश्ते की नई मिसाल कायम की है। -सुमित सारस्वत, सामाजिक चिंतक, मो.09462737273

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