राजस्थान (Rajasthan) के ब्यावर (Beawar) में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही है. यहां अधिकांश घरों में लोगों ने गैर-कानूनी रूप से कछुओं को कैद कर रखा है. राजस्थान सरकार की सोच को साकार करने के लिए जीव दया सेवा संस्था ने वन्यजीव संरक्षण की पहल की. संस्था ने जन जागरूकता अभियान के जरिए ब्यावर शहर के विभिन्न इलाकों से 13 कछुओं को रेस्क्यू किया. क्षेत्रीय वन अधिकारी कैलाश गुर्जर के निर्देशन में वनपाल भंवर सिंह व फॉरेस्ट गार्ड मुराद काठात को सभी कछुए सुपुर्द किए. इसके बाद वन विभाग के कर्मचारियों ने इन सभी कछुओं को प्राकृतिक आवास के लिए जंगल क्षेत्र में सुरक्षित छोड़ दिया. ©सुमित सारस्वत
यह भी पढ़ें- सीआई का वीडियो हुआ वायरल
कछुओं का प्राकृतिक प्रजनन रूका
जीव दया सेवा संस्था सचिव कपिल सेन ने बताया कि घरों के अंदर कछुओं को सीमित स्थान में कैद रखा जाता है, जिससे वे प्राकृतिक वातावरण, विविध प्रकार की वनस्पतियों और प्राकृतिक भोजन से वंचित हो जाते हैं. उन्हें केवल कुछ सब्जियों तक सीमित कर दिया जाता है, जिससे उनका स्वाभाविक जीवन प्रभावित होता है. कैद में रहने के कारण उनका प्राकृतिक प्रजनन भी नहीं हो पाता और उन्हें शारीरिक व जैविक समस्याएं होती है.
यह भी पढ़ें- पैसे लिए तो रगड़ कर रख दूंगा
घरों में कछुआ रखना गैर-कानूनी
ब्यावर के क्षेत्रीय वन अधिकारी कैलाश गुर्जर ने बताया कि जीव दया सेवा संस्था की ओर से रेस्क्यू किए गए सभी 13 कछुओं को वन क्षेत्र में सुरक्षित छोड़ दिया है. घर में जीवित कछुआ नहीं रखना चाहिए. कछुओं की लगभग सभी प्रजातियां वन्यजीव संरक्षण अधिनियम (Wildlife Protection Act) के तहत संरक्षित हैं. घर में जीवित कछुआ रखना गैर-कानूनी और अपराध है. जीवित कछुआ घर में रखने पर 7 साल तक की जेल और जुर्माना हो सकता है. कछुए खतरनाक बैक्टीरिया भी फैला सकते हैं जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं.
यह भी पढ़ें- बैंक कर्मियों के खिलाफ केस दर्ज
मान्यताओं के कारण घरों में कछुए
धार्मिक और वास्तु मान्यताओं के अनुसार कछुए को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है और यह धन-समृद्धि का प्रतीक है. इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है. इसी सोच के कारण अधिकांश लोग जीवित कछुए को घर में रखते हैं जबकि जीवित कछुए की जगह धातु या क्रिस्टल से बना कछुआ घर में रख सकते हैं.
यह भी पढ़ें- राजस्थान में मिनरल उद्योग पर संकट
July 20, 2026
घरों में गैर-कानूनी तौर पर कैद में कछुए, 13 कछुओं को रेक्स्यू कर जंगल में छोड़ा - Tortoises Illegally Kept in Homes
July 19, 2026
राजस्थान पुलिस के सीआई ने सड़क पर खेली लंगड़ी टांग, वीडियो हो रहा वायरल
राजस्थान में भीलवाड़ा जिले के जहाजपुर थाना सीआई दयाराम चौधरी गश्त पर निकले तो सड़क पर बच्चे खेलते मिले. सीआई ने गाड़ी रोकी और बच्चों के संग खेलने लगे. पुलिस अधिकारी के अनोखे अंदाज का यह वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है. लोगों ने इसे पसंद कर कहा- दिल तो बच्चा है जी.
June 27, 2026
सोने चांदी के घड़ों में भरे जल से इस तरह होगा श्रीनाथजी का ज्येष्ठाभिषेक
राजस्थान के नाथद्वारा (Nathdwara) स्थित पुष्टिमार्गीय वैष्णव संप्रदाय की प्रधानपीठ श्रीनाथजी मंदिर (Shrinathji Temple) में रविवार को होने वाले ज्येष्ठाभिषेक स्नान उत्सव की तैयारियां शुरू हो गई हैं. ज्येष्ठ शुक्ल त्रयोदशी के अवसर पर परंपरा अनुसार प्रभु श्रीनाथजी का ज्येष्ठाभिषेक करने के लिए पवित्र जल भरने की सेवा विधि-विधान के साथ शनिवार को संपन्न हुई.
यह भी पढ़ें- भगवान कृष्ण को 21 तोपों से सलामी
मंदिर तिलकायत की अनुमति से विशाल बावा और लाल बावा ने वल्लभकुल परिवार एवं श्रीजी प्रभु के निज सेवकों के साथ प्राचीन भीतर की बावड़ी से स्वर्ण कलश में अभिषेक का जल भरा. इसके बाद स्वर्ण और रजत कलशों में भरे जल का आरती दर्शन के समय विशेष अधिवासन किया. अधिवासन की परंपरा के तहत जल में अष्टगंध सामग्री का मिश्रण किया गया, जिसमें चंदन, केसर, गुलाब जल, बरास, अरगजा सहित सुगंधित और पवित्र सामग्री शामिल रही.
वीडियो में देखें- कैसे होता है कृष्ण का अभिषेक
पुष्टिमार्गीय मान्यता के अनुसार ज्येष्ठाभिषेक सेवा का भाव ग्रीष्म ऋतु में प्रभु श्रीनाथजी को शीतलता प्रदान करना है. इसे श्री यमुना जी द्वारा अपने प्रियतम प्रभु को सुगंधित जल से स्नान कराने के भाव से जोड़ा जाता है.
वीडियो में देखें- बाल कृष्ण की नटखट लीलाएं
ज्येष्ठाभिषेक के बाद प्रभु श्रीनाथजी को सवा लाख आमों का विशेष भोग अर्पित किया जाएगा. इस विशेष मनोरथ को लेकर वैष्णव समाज में उत्साह का माहौल है. हवेली के मोती महल चौक में वैष्णवजन आम सामग्री तैयार करने की सेवा दी. जल भरने और अधिवासन के दौरान मंदिर अधिकारी सुधाकर शास्त्री, मुख्य प्रशासक भारत भूषण व्यास, सीईओ जितेंद्र पंड्या, तिलकायत श्री के मुख्य सलाहकार अंजन शाह समेत मंदिर मंडल सदस्य और कई वैष्णवजन अलौकिक क्षण के साक्षी बने. ©सुमित सारस्वत
यह भी पढ़ें- अमेरिका में जगन्नाथ रथ यात्रा
March 15, 2026
ईराक-ईरान युद्ध का असर अब भारत पर भी, शहरी क्षेत्र में भी 45 दिन बाद मिल रहा गैस सिलेंडर - Gas Crisis in India
ईराक-ईरान युद्ध का असर अब भारत में भी दिखने लगा है। गैस सिलेंडर को लेकर उपभोक्ता परेशान हैं. ब्यावर (Beawar) शहर में गैस कंपनियां मनमानी कर सरकार के आदेश नहीं मान रही. खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री सुमित गोदारा (Sumit Godara) ने कहा था कि गैस बुकिंग के लिए पिछली सप्लाई के बाद ग्रामीण क्षेत्र में 45 दिन और शहरी क्षेत्र में 25 दिन बाद गैस सिलेंडर दिया जाए. लेकिन ब्यावर में सरकार के आदेशों की अवहेलना हो रही है. इसे लेकर सामाजिक कार्यकर्ता सुमित सारस्वत (Sumit Saraswat) ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा (Bhajan Lal Sharma) को पत्र भेजा है.
यह भी पढ़ें- भाजपा के राम की राह पर कांग्रेस
सीएम को बताया कि जिला मुख्यालय और शहरी क्षेत्र होने के बावजूद ब्यावर में 45 दिन बाद की बुकिंग हो रही है, जिससे जनता में असंतोष व्याप्त है. गैस कंपनियों की इस मनमानी के कारण सरकार की साख पर भी विपरित असर होगा. पत्र के जरिए मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग और ब्यावर जिला प्रशासन को निर्देशित कर ब्यावर शहर में भी 25 दिन की बुकिंग व्यवस्था सुचारू की जाए, ताकि जनता को राहत मिल सके.
यह भी पढ़ें- राजस्थान में मिनरल उद्योग पर संकट
March 6, 2026
ट्रेन के टॉयलेट में हार्ट अटैक से मौत, मृतका थी राजस्थान के जज की पत्नी, उसी दिन अटैक से हुई 'बादशाह' की मौत
✍🏻सुमित सारस्वत
ट्रेन में सफर कर रहे राजस्थान (Rajasthan) के जज की पत्नी अचानक लापता हो गई. पति की शिकायत पर रेलवे पुलिस ने महिला की तलाश शुरू की. रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म और रेल के कोच में तलाश करने पर भी महिला नहीं मिली. काफी देर बाद एक कोच के टॉयलेट में महिला का शव बरामद हुआ. अचानक हुई इस घटना ने सभी को हैरान कर दिया है. माना जा रहा है हार्ट अटैक के कारण मौत हुई है.
यह भी पढ़ें- सनातन राष्ट्र का शंखनाद
अलग-अलग कोच में बैठे थे पति-पत्नी
जानकारी के अनुसार, चितौड़गढ़ के निंबाहेड़ा में एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज राजकुमार चौहान और उनकी पत्नी उषा गत 3 मार्च मंगलवार को जोधपुर से चित्तौड़गढ़ जाने के लिए काचीगुड़ा-भगत की कोठी एक्सप्रेस ट्रेन में सवार हुए. दोनों का रिजर्वेशन साथ नहीं होने के कारण अलग-अलग कोच में बैठे थे. बुधवार सुबह 7.20 बजे ट्रेन के चित्तौड़गढ़ स्टेशन पहुंचने पर एडीजे उतर गए लेकिन पत्नी उषा उन्हें प्लेटफॉर्म पर नहीं दिखीं. काफी तलाश करने पर उन्होंने जीआरपी को सूचना दी, लेकिन तब तक ट्रेन स्टेशन से आगे निकल गई थी.
जावरा में बरामद हुआ शव
एडीजे से इत्तला मिलते ही रेलवे पुलिस हरकत में आई और जज की पत्नी को ढूंढने लगी. महिला के मोबाइल नंबर से उसकी लोकेशन ट्रेस की, जो ट्रेन के अंदर ही मिली. इस बीच सुबह करीब 10.40 बजे ट्रेन निंबाहेड़ा से 160 किलोमीटर दूर रतलाम जिले के जावरा स्टेशन पर पहुंच गई थी. जिस कोच में उषा का रिजर्वेशन था, वहां तलाश करने पर भी जीआरपी को महिला नहीं मिली. शक होने पर कोच के टॉयलेट का दरवाजा तोड़ा तो उषा अंदर अचेत अवस्था में दिखी. उन्हें तुरंत जावरा अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सक ने जांच के बाद मृत घोषित किया. माना जा रहा है कि साइलेंट हार्ट अटैक (Heart Attak) के कारण महिला की मौत हुई.
यह भी पढ़ें- सोशियल मीडिया पर सियासी युद्ध
बुधवार को ही 'बादशाह' की हुई थी मौत
कोरोना महामारी के बाद हार्ट अटैक (Cardiac Arrest) से मौत के कई मामले सामने आ रहे हैं. कभी जिम में, कभी डांस फ्लोर पर, कभी पैदल चलते हुए हार्ट अटैक से मौतें हो रही है. बुधवार को ही राजस्थान के ब्यावर (Beawar) में आयोजित बादशाह मेला (Badshah Mela) के दौरान गुलाल उछाल रहे बादशाह बने चंद्रशेखर अग्रवाल की हार्ट अटैक से मौत हो गई थी. राजस्थान के ही नागौर जिले में 9 साल की बच्ची दिव्या की हार्ट अटैक से मौत हो गई थी. पांचवीं कक्षा में पढ़ने वाली मासूम छात्रा के मरने की खबर सुनकर सभी दंग रह गए थे. ©सुमित सारस्वत
यह भी पढ़ें- अब कभी नहीं होगा बादशाह मेला
March 4, 2026
अब कभी नहीं होगा बादशाह मेला !, ब्यावर में 'बादशाह' की मौत, अग्रवाल समाज में बादशाह की ओख - Badshah Died
✍🏻सुमित सारस्वत
बीते दो साल से कपड़ा फाड़ होली में तब्दील हुआ ब्यावर का बादशाह मेला आयोजन अब शायद कभी नहीं होगा. बुधवार को मेले के दौरान बादशाह की भूमिका निभा रहे चंद्रशेखर अग्रवाल की मौत हो गई. हजारों लोगों को खर्ची रूपी गुलाल बांटते हुए बादशाह खुद की जिंदगी लुटा गए. यह ब्यावर (Beawar)के लिए बेहद दुखद घटना है. इस निधन के कारण अग्रवाल समाज में बादशाह मेले की ओख हो गई है. सनातन हिन्दू धर्म में ऐसी परंपरा रही है कि मौत वाले दिन किसी तरह की कोई खुशियां नहीं मनाई जाती. ऐसे में अब अग्रवाल समाज (Agarwal Samaj) संभवत: बादशाह की मौत का शोक मनाते हुए भविष्य में बादशाह मेले का आयोजन नहीं करेगा. मेले में हुए हादसे के बाद लोग चर्चा कर रहे थे कि मुगल काल में एक बार टोडरमल अग्रवाल को बादशाहत मिलने की याद में बादशाह की सवारी निकाली जाने लगी थी. अब इस साल बादशाह की मौत होने पर संभवत: यह परंपरा रूक जाएगी.
यह भी पढ़ें- सनातन राष्ट्र का शंखनाद
पहले भी झुलस गया था बादशाह
बादशाह मेले में ऐसे अपशकुन पहले भी हुए हैं. वर्ष 2011 में भी बादशाह मेले के दौरान बड़ा हादसा हुआ था. उपखंड कार्यालय में गुलाल युद्ध के दौरान बादशाह के ट्रक में भीषण आग लगने से बादशाह बने श्याम गर्ग झुलस गए थे. गंभीर अवस्था में बादशाह को अस्पताल में भर्ती करवाया गया था. इस हादसे के बाद श्याम को स्वस्थ होने में लंबा समय लगा. उनके शरीर पर झुलसे जख्म के निशान आज भी हैं.
यह भी पढ़ें- सरकार, कब करोगे अमृतकाैर का उपचार ?
अस्पताल में नहीं मिला बेहतर उपचार
बादशाह बने चंद्रशेखर का स्वास्थ्य बिगड़ने पर उन्हें उपचार के लिए एम्बुलेंस से राजकीय अमृतकौर अस्पताल (Amrit Kaur Hospital) पहुंचाया गया लेकिन वहां कथित तौर पर उचित उपचार नहीं मिला. एक वायरल वीडियो में लोग इमरजेंसी वार्ड में अपने स्तर पर ही प्राथमिक उपचार करते दिख रहे हैं. संभवत: उचित समय पर चिकित्सकीय उपचार के अभाव में चंद्रशेखर की मौत हो गई. इस घटना के बाद वायरल वीडियो देखकर लोग अमृतकौर अस्पताल को मौत का अस्पताल बताते हुए चिकित्सा व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं. सवाल यह भी उठ रहे हैं कि बादशाह मेला आयोजन को लेकर प्रशासनिक स्तर पर बैठकें और व्यवस्थाएं हुई तो आकस्मिक दुर्घटना की आशंका मानकर अस्पताल में चिकित्सकों की इमरजेंसी ड्यूटी क्यों नहीं लगाई गई? इस मौत का जिम्मेदार कौन? ©सुमित सारस्वत
यह भी पढ़ें- सोशियल मीडिया पर सियासी युद्ध
January 10, 2026
भाजपा के राम की राह पर अब कांग्रेस, मुस्लिम नेता बोलीं- 'भगवान राम को पूरा विश्व मानता है लेकिन..'
✍🏻 सुमित सारस्वत
अयोध्या में राम जन्मभूमि मंदिर (Ayodhya Ram Mandir) प्राण प्रतिष्ठा समारोह का निमंत्रण ठुकराने वाली कांग्रेस भी अब राम के नाम पर राजनीति करने लगी है. राजस्थान (Rajasthan) के ब्यावर (Beawar) में कांग्रेस नेताओं ने राम नाम का सहारा लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधा. सरकार पर मनरेगा को कमजोर करने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस (Congress) ने 45 दिवसीय मनरेगा बचाओ संग्राम जन आंदोलन का आगाज किया. 10 जनवरी से 25 फरवरी तक होने वाले देशव्यापी आंदोलन की शुरूआत शनिवार को पत्रकार वार्ता से की.
यह भी पढ़ें- सनातन राष्ट्र का शंखनाद
राम के नाम पर नई योजना लाएं
राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी उपाध्यक्ष और पूर्व मंत्री नसीम अख्तर (Naseem Akhtar) ने कहा कि भाजपा (BJP) बरसों से राम के नाम पर राजनीति कर रही है. अब मोदी सरकार ने मनरेगा का नाम बदलकर जी राम जी कर दिया है. भगवान राम (Ram) को भारत ही नहीं, पूरा विश्व मानता है. हम चाहते हैं कि सरकार राम के नाम पर कोई नई योजना लेकर आए, पुरानी योजनाओं का नाम बदलकर देश की जनता को बेवकूफ न बनाए. किसान, मजदूर, दलित, अल्पसंख्यक पर अत्याचार बर्दाश्त नहीं करेंगे.
यह भी पढ़ें- राजस्थान में मिनरल उद्योग पर संकट
कांग्रेसी भी करते हैं राम की पूजा
पीसीसी महासचिव राकेश पारीक (Rakesh Pareek) ने आरोप लगाया कि देश को सिर्फ चार गुजराती चला रहे हैं. सत्ता में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) और गृहमंत्री अमित शाह (Amit Shah) के साथ उद्योगपति अडाणी और अंबानी, इन चारों ने मिलकर पूरे देश को हाइजेक कर रखा है. मोदी-शाह जनहित के मुद्दे भुलाकर राम के नाम पर राजनीति कर रहे हैं. राम सबके हैं. कांग्रेस कार्यकर्ताओं के घरों में भी हर सुबह भगवान राम की पूजा होती है.
यह भी पढ़ें- सोशियल मीडिया पर सियासी युद्ध
दफ्तर में तस्वीर लगाई लेकिन नाम हटा रहे
ब्यावर कांग्रेस जिलाध्यक्ष किशोर चौधरी (Kishor Choudhary) ने कहा कि महात्मा गांधी भारत के राष्ट्रपिता हैं. मनरेगा योजना से इनका नाम हटाना हठधर्मिता और साजिश है. मोदी सरकार सिर्फ योजनाओं का नाम बदलकर जनता को गुमराह कर रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने दफ्तर में फोटो महात्मा गांधी की लगा रखी है लेकिन योजनाओं से उनका नाम हटा रही है.
यह भी पढ़ें- उद्योग आंदोलन में शक्ति प्रदर्शन
मजदूरों से छीना मजदूरी का हक
पीसीसी सचिव और ब्यावर प्रभारी रूबी खान (Ruby Khan) ने कहा कि मनरेगा भारत की आत्मा है. इस योजना को खत्म कर सरकार गरीब, किसान, मजदूरों का शोषण कर रही है. बीजेपी ने मजदूरों से मजदूरी का हक छीन लिया है. मनरेगा का नाम और काम वही रहना चाहिए जो मनमोहन सिंह (Manmohan Singh) और सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) ने तय किया था. अगर महात्मा गांधी का नाम खत्म हो गया तो भारत की रुह खत्म हो जाएगी. मनरेगा योजना की तत्काल वापसी की जाए. न्यूनतम मजदूरी प्रतिदिन 400 रुपए हो. इस दौरान पीसीसी नेता पारस पंच, ब्लॉक अध्यक्ष अशोक रांका, महिला कांग्रेस जिलाध्यक्ष इशिका जैन, सेवादल जिला संगठक विक्रम सोलीवाल, यूथ कांग्रेस अध्यक्ष भूपेंद्रपाल पंवार, राम यादव, शेखर शर्मा, मेघराज बोहरा समेत कई कार्यकर्ता मौजूद रहे. ©सुमित सारस्वत
यह भी पढ़ें- छात्रा के आगे झुकी सरकार
January 7, 2026
राजस्थान में मिनरल उद्योग पर संकट!, 50 प्रतिशत उद्योग बंद होने से बढ़ी बेरोजगारी, सरकार के खिलाफ लघु उद्योग संघ करेगा आंदोलन - Mineral Industry Crisis
✍🏻 सुमित सारस्वत
राजस्थान में निवेश को बढ़ावा देने के लिए एक ओर सरकार राइजिंग राजस्थान जैसे ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट आयोजित कर रही है तो वहीं दूसरी ओर मिनरल उद्योग पर संकट छा गया है. अनुमानित 50 प्रतिशत उद्योग बंद हो गए हैं. कामकाज ठप होने और फैक्ट्रियों पर ताले लगने से बेरोजगारी बढ़ गई है. अब लघु उद्योग संघ ने सरकार के खिलाफ आंदोलन की रणनीति बनाई है.
संघ अध्यक्ष आशीषपाल पदावत ने बताया कि वर्तमान में मिनरल उद्योग गंभीर संकट के दौर से गुजर रहा है. 400-500 फैक्ट्रियां बंद हो गई है. शेष उद्योग भी बंद होने के कगार पर हैं. उद्योग संचालन मुश्किल हो गया है. हालत इतने बदतर हो गए हैं कि बड़े से बड़े उद्योगपति भी फैक्ट्री का खर्चा नहीं निकाल पा रहे हैं. मौजूदा हालात में सभी परेशान हैं. क्षेत्र में रोजगार और आर्थिक गतिविधियों पर प्रतिकूल असर हो रहा है.
उद्योग बंद रखकर करेंगे प्रदर्शन
उद्योगों की बदहाल स्थिति और संरक्षण की मांग को लेकर ब्यावर जिले के मिनरल कारोबारी गुरुवार को सभी उद्योग बंद रखेंगे. सुबह 10 बजे लघु उद्योग संघ कार्यालय पर एकत्र होकर रैली के रूप में जिला कलेक्ट्रेट पहुंचेंगे. यहां सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए कलेक्टर को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन देंगे. मिनरल उद्योगों से जुड़े वर्गों ने भी मांग का समर्थन किया है. व्यापारी, ट्रांसपोर्टर्स, बारदाना सप्लायर्स, मशीनरी व इलेक्ट्रिकल सप्लायर्स, स्पेयर्स सप्लायर्स, जेसीबी-डम्पर मालिक, रॉ मटेरियल सप्लायर्स समेत समस्त फैक्ट्रियों का स्टाफ और मजदूर रैली में शामिल होंगे. ©सुमित सारस्वत
December 13, 2025
सरकार, निरीक्षण के बाद भी वही ढर्रा !, 181 पर नहीं हो रहा जन समस्याओं का समाधान - Sampark Helpline Not Working
ब्यावर (Beawar) के जसपाल सिंह हुड़ा की पीड़ा सुनिए। सड़क पर लीकेज के कारण घर में पानी नहीं आने पर 7 दिन पहले राजस्थान संपर्क हेल्पलाइन (Rajasthan Sampark Helpline) पर शिकायत दर्ज करवाई थी लेकिन समाधान नहीं हुआ। इस बीच मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा (Bhajanlal Sharma) ने 181 का आकस्मिक निरीक्षण भी किया और लापरवाही मिलने पर अधिकारियों को व्यवस्थाएं सुधारकर जनता को राहत देने के निर्देश भी दिए लेकिन निरीक्षण के दूसरे ही दिन फिर वही ढर्रा। मुख्यमंत्री के आदेश की हवा निकल गई। व्यवस्थाओं की पोल खुल गई।
यह भी पढ़ें- सनातन राष्ट्र का शंखनाद
शिकायत के बावजूद समाधान नहीं
भारत विकास परिषद से जुड़े सरदार जसपाल सिंह का आरोप है कि 181 योजना फर्जी है। समस्या बताने के दूसरे दिन कर्मचारी खुद ही शिकायत निस्तारण कर देते हैं जबकि समाधान नहीं होता। जनता परेशान रहती है। समस्या बताते बताते गला खराब हो गया है लेकिन अधिकारी कोई ध्यान नहीं दे रहे। सरकार झूठी वाहवाही बटोर रही है। सीएम के संपर्क हेल्पलाइन 181 का निरीक्षण करने के बाद भी हालात जस के तस हैं।
यह भी पढ़ें- नजर चूकी और माल पराया
करोड़ों रुपए बर्बाद कर रही सरकार
डिग्गी मोहल्ला निवासी अजय स्वामी ने बताया कि संपर्क हेल्पलाइन पर शिकायत लिखवाते हैं तो अगले दिन बोलते हैं समाधान हो गया जबकि कुछ नहीं होता। सरकार 181 योजना की खानापूर्ति करने के लिए करोड़ों रुपए बर्बाद कर रही है। या तो योजना बंद कर देनी चाहिए या किसी जिम्मेदारी अधिकारी को मॉनिटरिंग करनी चाहिए।
यह भी पढ़ें- छात्रा के आगे झुकी सरकार
टैक्स के पैसों की बर्बादी है 181
एडवोकेट नीलेश बुरड़ का कहना है कि 181 पोर्टल हमारे टैक्स के पैसों की बर्बादी का अनूठा उदाहरण है। कंप्लेंट देने के बाद दो बार फोन आता है, अगर उसके बाद भी शिकायतकर्ता असंतुष्ट है तो कंप्लेंट को बिना संतुष्ट किए व बिना समस्या का समाधान किए बंद कर दिया जाता है। यह गलत है। जब तक शिकायत का समाधान नहीं हो तब तक शिकायत बंद नहीं होनी चाहिए लेकिन लोक कल्याणकारी सरकार आम आदमी को बेवकूफ समझती है।
यह भी पढ़ें- कांग्रेस का अनोखा प्रदर्शन
सीएम ने किया था औचक निरीक्षण
मुख्यमंत्री शर्मा ने सोमवार को सचिवालय परिसर के पुस्तकालय भवन में संचालित राजस्थान संपर्क हेल्पलाइन 181 का औचक निरीक्षण कर वहां संचालित समस्त व्यवस्थाओं का विस्तृत जायजा लिया था। प्रदेश की जनता को समर्पित सेवा की कार्यप्रणाली का अवलोकन कर जनकल्याण की दिशा में और अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश दिए थे। इस दौरान सीएम ने हेल्पलाइन के जरिए आमजन से संवाद भी किया और उनकी परिवेदनाओं के त्वरित निस्तारण के निर्देश प्रदान किए थे। उन्होंने कहा था कि राजस्थान सरकार सुशासन और पारदर्शिता को सर्वोपरि मानते हुए जनसेवा से जुड़ी प्रत्येक व्यवस्था को निरंतर सुदृढ़ करने के लिए कटिबद्ध है।
यह भी पढ़ें- अलग पहचान के लिए नवाचार
July 31, 2025
छात्रा के आगे झुकी सरकार, धर्म क्षेत्र के लिए मिसाल बनीं पंजाब की गुरप्रीत कौर, युगों तक याद रहेगी धार्मिक आस्था - Brave Gurpreet Kaur
✍🏻 सुमित सारस्वत
जयपुर की पूर्णिमा यूनिवर्सिटी (Poornima University) में पंजाब (Punjab) से एग्जाम देने आई छात्रा को कड़ा और कृपाण धारण करने की वजह से एग्जाम रूम में जाने से रोक दिया. कॉलेज प्रबंधन ने कहा कि कड़ा और कृपाण उतारोगे तभी परीक्षा दे सकोगी. छात्रा ने धर्म की मर्यादा का पालन करने हुए इनको नहीं उतारा तो पूर्णिमा यूनिवर्सिटी ने एग्जाम नहीं देने दिया.
यह भी पढ़ें- स्टूडेंट्स का यौन शोषण
छात्रा गुरप्रीत कौर (Gurpreet Kaur) पंजाब से न्यायिक सेवा परीक्षा (PCS-J) में शामिल होने जयपुर (Jaipur) आई थी. उनका कहना है कि यह धारा 25 का उल्लंघन और धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला है. आपको बता दें कि सिख धर्म का अनुयायी केश, कड़ा, कृपाण रखता है. धर्म के लिए परीक्षा का 'बलिदान' देने वाली गुरप्रीत की हर तरफ सराहना हो रही है.
यह भी पढ़ें- पेरेंट्स रखें यह सावधानी
इतना ही नहीं, आत्म सम्मान और धार्मिक आस्था से जुड़ा यह मामला देशभर की सुर्खियां बनने के बाद राजस्थान सरकार (Rajasthan Government) ने अहम फैसला लिया. अब भविष्य में कड़ा और कृपाण धारण किए किसी भी सिख छात्र या छात्रा को परीक्षा में शामिल होने से नहीं रोका जाएगा. यह गुरप्रीत के आत्म सम्मान की जीत है. यह महज एक फैसला नहीं, बल्कि संपूर्ण देश की धार्मिक स्वतंत्रता के लिए ऐतिहासिक पुष्टि है. गुरप्रीत की जीत धर्म क्षेत्र के लिए एक मिसाल बन गई है. बरसों-बरस तक धर्म के प्रति गुरप्रीत के इस समर्पण की चर्चा होगी. ©सुमित सारस्वत
यह भी पढ़ें- हार गए बाबा श्याम
सरकार, कब करोगे अमृतकाैर का उपचार ?, क्या डॉक्टरों-मरीजों की मौत का है इंतजार ! - Amritkaur Hospital Building Damaged
✍🏻 सुमित सारस्वत
राजस्थान में ब्यावर जिले के सबसे बड़े राजकीय अमृतकाैर अस्पताल (Amrit Kaur Hospital) की जर्जर बिल्डिंग की मरम्मत करवाने के लिए शासन-प्रशासन शायद डॉक्टरों और मरीजों की मौत का इंतजार कर रहा है. झालावाड़ स्कूल हादसे (Jhalawar School Accident) के बाद जिला अस्पताल में ऐसी ही चर्चा सुनने को मिली. दरअसल, वर्ष 1955 में स्थापित अमृतकौर अस्पताल का 70 साल पुराना भवन मौजूदा वक्त में खुद बीमार है. बीते कई साल से अस्पताल भवन के कई हिस्से बल्लियों के सहारे टिके हैं. यहां कार्यरत चिकित्सक, नर्सिंगकर्मी और आने वाले मरीज भय के साये में रहते हैं.
यह भी पढ़ें- हार गए बाबा श्याम
एकेएच में चिकित्सा अधिकारी रहे डॉ. प्रदीप जैन ने चिंता जताते हुए बताया कि पूरे प्रदेश में सरकारी स्कूलों के जर्जर भवनों की चर्चा हो रही है लेकिन जर्जर सरकारी अस्पतालों की चर्चा कोई नहीं कर रहा. जितने जरूरी स्कूल हैं उतने ही जरूरी अस्पताल भी हैं. ब्यावर (Beawar) का सरकारी अस्पताल भवन बरसों से जर्जर और अब बल्लियों के सहारे है. यहां कई मंत्री-सांसद आए, सरकारी अधिकारी आए, सभी ने पुराना जर्जर भवन देखा, नए भवन के वादे किए...लेकिन भूल गए. सिस्टम की सुस्ती देखिए कि सरकार बदल गई लेकिन अस्पताल के हालात नहीं बदले. डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ इमरजेंसी सेवाओं में शामिल है इसलिए अस्पताल आना जरूरी है. अस्पताल की दहलीज पर कदम रखते ही दिल दहलता है लेकिन सरकारी नौकरी होने से चुप रहते हैं. कर्मचारियों का मानना है कि सरकार को समस्या बताना मतलब मुसीबत बोल लेना है. या तो कर्मचारी का ट्रांसफर कर देंगे, या किसी बहाने काम में लापरवाही का नोटिस थमा देंगे.
यह भी पढ़ें- स्टूडेंट्स का यौन शोषण
गौरतलब है कि राजकीय अमृतकौर चिकित्सालय का बरसों पुराना भवन जर्जर हो गया है. सुरक्षा के मद्देनजर कई वार्ड बंद कर दिए हैं. नवीन भवन के लिए पूर्व की कांग्रेस सरकार ने स्वीकृति दी थी लेकिन बजट के अभाव में अब तक न तो पुराने भवन की मरम्मत हुई और न ही नया भवन बना. कांग्रेस शासन में मुख्य सचिव रहे निरंजन आर्य, तत्कालीन सांसद और वर्तमान में ब्यावर जिला प्रभारी व उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी (Diya Kumari) समेत कई मंत्री यहां दौरा कर गए और अस्पताल की जर्जर हालत पर चिंता जता गए लेकिन सुधार के लिए किसी ने कोई प्रयास नहीं किए.
यह भी पढ़ें- पेरेंट्स रखें यह सावधानी
अब सरकारी स्कूलों में होने वाले हादसों को देखकर चिकित्सालय में चारों तरफ यही चर्चा है कि सरकार और जिला प्रशासन शायद अस्पताल में भी किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है. यदि मौत के बाद मुआवजा देने की बजाय सरकार (Government) जिंदगियां बचाने की चिंता करे तो शायद कहीं कोई हादसा न हो. उम्मीद है कि सरकार इस सरकारी अस्पताल की जल्द ही सुध लेकर चिकित्साकर्मियों और मरीजों को बड़ी राहत प्रदान करेगी. ©सुमित सारस्वत
यह भी पढ़ें- भगवान जालिम क्यों बन गया
July 30, 2025
आज हार गए बाबा श्याम !, भक्त जयसिंह राठौड़ का निधन - Devotee of Baba Shyam passed away
✍🏻 सुमित सारस्वत
जिस कलयुग अवतारी बाबा श्याम को हारे का सहारा कहा जाता है वो आज एक भक्त से हार गए. बाबा श्याम के प्रति आस्था रखते हुए लंबे समय तक अस्पताल के बेड पर जिंदगी और मौत से संघर्ष करते हुए ब्यावर के 35 वर्षीय जयसिंह राठौड़ (Jai Singh Rathore) ने आज जयपुर के एसएमएस अस्पताल में दम तोड़ दिया. ढाका रीफ्रैक्टरीज कंपनी में लगातार 12 साल काम करते हुए उन्हें सिलिकोसिस रोग हो गया था. इस रोग की वजह से उनके दोनों फेफड़े खराब हो गए थे. करीब तीन महीने से अस्पताल में इलाज चल रहा था. अहमदाबाद (Ahmedabad) के राजस्थान हॉस्पीटल (Rajasthan Hospital) में इलाज करवाते हुए जीवन की कमाई खर्च कर चंद रोज पहले जयपुर (Jaipur) के एसएमएस अस्पताल (SMS Hospital) लाए थे. आर्थिक स्थिति कमजोर होने और परिस्थितियां प्रतिकूल हाेने के बावजूद जयसिंह की पत्नी पूजा कंवर (Pooja Kanwar) और परिवारजन ने उनका उपचार करवाने में कोई कसर नहीं छोड़ी. पत्नी तीन महीने से दिन रात अस्पताल में साथ रहकर पति की सेवा में जुटी रहीं.
यह भी पढ़ें- भगवान जालिम क्यों बन गया!
विड़बंना है कि जिस ढाका रीफ्रैक्टरीज कंपनी को जयसिंह ने अपने युवा जीवन के 12 साल दिए उस कंपनी के मालिक प्रकाश अंबुरे (Prakash Ambure) ने अपने कर्मचारी का इलाज करवाने में आर्थिक मदद करने की बजाय नेताओं की तरह आश्वासन और झांसे ही दिए. कंपनी मालिक की संवेदनहीनता देखिए कि तीन माह में एक रुपए की मदद नहीं दी बल्कि ऐसी विकट स्थिति में सहायता करने की बजाय अप्रेल माह में उपचार अवधि की सैलरी काट ली. खैर, जगजाहिर है कि कुछ करोड़पति के लिए मानव जीवन की कोई कीमत नहीं होती. वे अपना पैसा सामाजिक और धार्मिक दिखावे पर ही खर्च करना पसंद करते हैं जहां उनका नाम हो और उन्हें मंच पर बुलाकर मालाएं पहनाई जाए. अगर अंबुरे परिवार अपने कर्मचारी के उपचार में आर्थिक सहायता करता तो शायद दो मासूम बच्चियों के सिर से पिता का साया नहीं उठता. जयसिंह की मृत्यु से पूजा और उसकी दो बेटियों का जीवन खराब हो गया है.
यह भी पढ़ें- कंपनी की तानाशाही के खिलाफ प्रदर्शन
जयसिंह और पूजा, दोनों पति-पत्नी की बाबा श्याम में गहरी आस्था रही. हर ग्यारस मंदिर जाकर बाबा का दर्शन और घर में ज्योत जलाना उनका नियम रहा. अस्पताल में रहते हुए मंदिर नहीं जा सकते थे तो परिचित भक्त को रुपए देकर मंदिर में प्रसाद चढ़वाया. साल में कई बार खाटू धाम की पैदल यात्रा करते. श्याम भक्ति का अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि कुछ महीनों पहले जयसिंह जब ढाई साल बाद विदेश से लौटा तो सबसे पहले बाबा श्याम के धाम खाटू गया था. 7 मई को उपचार के लिए अहमदाबाद गया तो वहां भी श्री राधा गोविंद देव जी मंदिर जाकर दोनों पति-पत्नी ने भगवान का दर्शन किया.
यह भी पढ़ें- पेरेंट्स रखें यह सावधानी
जयसिंह रोज सुबह अपने सभी परिचितों को व्हाट्सएप पर बाबा श्याम (Baba Shyam) का दर्शन भेजना कभी नहीं भूलते. हैरानी होगी कि अस्पताल के बेड पर रहते हुए भी सुबह अपनी पत्नी से मोबाइल मांगते और श्याम का दर्शन कर सभी को बाबा की फोटो भेजने का क्रम जारी रहा. उनके मोबाइल के स्टेटस पर भी बाबा की तस्वीरें ही नजर आती थीं. व्यक्तिगत मुलाकात और कॉल रिसीव करने पर भी मुख से जय श्री श्याम (Jai Shri Shyam) ही निकलता था. उपचार के दौरान भरोसे के साथ इतनी तड़प थी कि अस्पताल से छुट्टी मिलने पर घर जाने से पहले श्याम मंदिर जाएंगे लेकिन इस बार हारे का सहारा कहलाने वाले बाबा श्याम हार गए ! न जाने क्या वजह रही कि कलयुग अवतारी अपने एक भक्त काे बचा नहीं पाए ! ©सुमित सारस्वत
यह भी पढ़ें- शीश के दानी का ऐसे किया दीदार
July 18, 2025
स्कूलों में स्टूडेंट्स का यौन शोषण कर रहे टीचर, राजस्थान में हुआ बड़ा खुलासा - Sexual harassment of Students in Schools
शिक्षा के मंदिर को शर्मसार करने वाली एक और सनसनीखेज वारदात सामने आई है. राजस्थान (Rajasthan) के चित्तौड़गढ़ (Chittorgarh) जिले में सरकारी स्कूल के एक शिक्षक ने विद्यालय में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं के साथ अश्लील हरकतें की और उनके वीडियो बनाए. परीक्षा में फेल करने का डर दिखाकर कई स्टूडेंट्स को अपनी हवस का शिकार बनाया. स्टूडेंट्स के वीडियो वायरल होने पर हंगामा मच गया है.
यह भी पढ़ें- पेरेंट्स रखें यह सावधानी
बेगूं उपखंड में आंवलहेडा गांव के महात्मा गांधी राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में शिक्षक की काली करतूत सामने आने के बाद गांव का माहौल गर्म है. ग्रामीणों ने स्कूल पहुंचकर आक्रोश प्रदर्शन करते हुए शिक्षक (Teacher) के खिलाफ सख्त कार्यवाही की मांग की. हंगामे की सूचना पर प्रशासन और शिक्षा विभाग के अधिकारी पुलिस के साथ मौके पर पहुंचे. पुलिस ने आरोपी अध्यापक शंभूलाल को हिरासत में लेकर जांच शुरू की है. आरोपी के खिलाफ पोक्सो, एससी-एसटी, आईटी एक्ट समेत कई धाराओं में केस दर्ज किया है. टीचर का शिकार हुए 15 से ज्यादा स्टूडेंट्स के बयान लेकर मेडिकल जांच करवाई जा रही है. पीड़ित स्टूडेंट्स की उम्र 12 से 18 साल बताई जा रही है. बताया गया कि यह टीचर बीते 7 साल से इसी स्कूल में कार्यरत था.
यह भी पढ़ें- महिला ने किया लड़के का बलात्कार
चंद रोज पहले भीलवाड़ा (Bhilwara) में एक सरकारी स्कूल के शिक्षक को छात्रा का यौन शोषण करते ग्रामीणों ने पकड़ा था. टीचर स्कूल में पढ़ने वाली बच्चियों को ट्यूशन पढ़ाने के नाम पर घर बुलाकर उनसे अश्लील हरकतें करता था. गांव की महिलाओं को भी यौन शोषण का शिकार बनाया. इससे पहले ब्यावर, सीकर व अन्य इलाकों में भी टीचर्स की ऐसी करतूतें सामने आई हैं.
अपने बच्चों पर नजर रखें. आजकल स्कूलों में कई टीचर परीक्षा में पास करने का झांसा देकर बच्चों का देह शोषण करने लगे हैं. आए दिन ऐसे मामले सामने आ रहे हैं. बेशक, शिक्षा जरूरी है लेकिन बच्चों की सुरक्षा (Safety) के लिए अभिभावकों की सजगता भी जरूरी है. हर घर में बच्चे हैं, अतः आपसे आग्रह है कि मासूमों की सुरक्षा से जुड़ा यह संदेश जन-जन तक जरूर पहुंचाएं. ©सुमित सारस्वत
यह भी पढ़ें- हिंदुस्तान के पीछे जम्मू कश्मीर
July 13, 2025
स्कूल टीचर कर रहे स्टूडेंट्स का यौन शोषण, पेरेंट्स रखें यह सावधानी - Sexual harassment of Students
अपने बच्चों पर नजर रखें. आजकल स्कूलों में कई टीचर परीक्षा में पास करने का झांसा देकर बच्चों का देह शोषण करने लगे हैं. आए दिन ऐसे मामले सामने आ रहे हैं. ताजा मामला राजस्थान के भीलवाड़ा का है, जहां एक सरकारी स्कूल टीचर बच्चियों को ट्यूशन पढ़ाने के नाम पर घर बुलाकर उनसे अश्लील हरकतें करता था. जानकारी होने पर गांव वालों ने टीचर के घर पर धावा बोलकर उसे एक नाबालिग छात्रा के साथ आपत्तिजनक अवस्था में पकड़ा है. टीचर टॉवेल लपेटे हुए बाहर आया और छात्रा बिस्तर पर मिली. इसके बाद ग्रामीणों ने टीचर की जमकर धुनाई की. पता लगा कि टीचर ने बीते एक साल में कई लड़कियों के साथ अनैतिक कृत्य किया है. इतना ही नहीं, गांव की गरीब महिलाओं को काम दिलवाने के बहाने घर बुलाकर गलत हरकतें करता था. टीचर की करतूत और रंगे हाथ पकड़े जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. कांड उजागर होने के बाद शिक्षा विभाग ने आरोपी शिक्षक को एपीओ कर जांच शुरू कर दी है.
इससे पहले सीकर में एक प्राइवेट स्कूल के टीचर ने एक छात्रा को एग्जाम नोट्स देने के बहाने घर बुलाकर दुष्कर्म किया. मेल टीचर ही नहीं, फीमेल टीचर भी स्टूडेंट्स का यौन शोषण कर रहीं हैं. मुंबई और गुरुग्राम में महिला टीचर ने छात्रों के साथ दुष्कर्म किया. यह मामले तो महज बानगी है. ऐसे अनेक मामले सामने आए हैं जब शिक्षा और संस्कार देने वाले शिक्षकों ने विद्या के मंदिरों को शर्मसार कर छात्र-छात्राओं को शिकार बनाया है.
बेशक, शिक्षा जरूरी है लेकिन बच्चों की सुरक्षा के लिए अभिभावकों की सजगता भी जरूरी है. हर घर में बच्चे हैं, अतः आपसे आग्रह है कि मासूमों की सुरक्षा से जुड़ा यह संदेश जन-जन तक जरूर पहुंचाएं. ©सुमित सारस्वत
May 28, 2025
राजस्थान महिला कांग्रेस में जिला अध्यक्षों की नियुक्ति, अलका लांबा ने जारी की पहली सूची - Rajasthan Mahila Congress
✍🏻 सुमित सारस्वत
अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष अलका लांबा (Alka Lamba) ने बुधवार को राजस्थान प्रदेश महिला कांग्रेस के 16 जिला अध्यक्षों की पहली सूची जारी की. ब्यावर (Beawar) में जिला अध्यक्ष पद पर युवा नेत्री इशिका जैन (Ishika Jain) को नियुक्त किया है. अब तक कांग्रेस में महज एक सामान्य कार्यकर्ता के तौर पर सक्रिय भागीदारी निभा रही इशिका को महज 23 साल की उम्र में बड़ा पद मिलना सिटी की सियासत में चर्चा का विषय बन गया है.
जिस तरह महत्वपूर्ण खबर का कवरेज करने और जमीनी हकीकत जानने के लिए पत्रकार ग्राउंड जीरो (Ground Zero) पर जाकर रिपोर्टिंग करता है उसी तरह इशिका ने भी पार्टी में धरातल पर काम कर पॉइंट जीरो (Point Zero) से राजनीति की शुरुआत की. सियासी समर्पण का परिणाम यह निकला कि संगठन ने एक सामान्य कार्यकर्ता को बड़ी जिम्मेदारी देकर सम्मान से नवाजा. लांबा ने काम से प्रभावित होकर कुछ समय पहले इशिका को प्रदेश कार्यकारिणी में शामिल किया था. अब जिला अध्यक्ष की अहम जिम्मेदारी सौंपी है. कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा में राहुल गांधी के साथ तस्वीर वायरल होने के बाद पहली बार पार्टी की सुर्खियों में आई इशिका ने बेहद कम समय में लंबी सियासी छलांग लगाई है.
इशिका की यह नियुक्ति उन नेताओं और कार्यकर्ताओं को नसीहत है जो पद पर होने के बावजूद पार्टी के प्रति समर्पित नहीं है, जो पार्टी के कार्यक्रमों से नदारद रहते हैं, जो संगठन हित से ज्यादा स्वहित सोचते हैं. संगठन कोई भी हो, काम करने वाले को प्रतिफल मिलता ही है, चाहे देर से ही. उम्मीद की जानी चाहिए कि छोटी उम्र में बड़ा पद पाकर इशिका अपनी सियासी कला का बेहतरीन प्रदर्शन कर मंद हो चुकी महिला कांग्रेस को गति प्रदान करेंगी. -सुमित सारस्वत, मो.9462737273
May 27, 2025
विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस की नई रणनीति, पहली बार ब्लॉक के अधीन मंडल का गठन - New Strategy of Congress
✍🏻 सुमित सारस्वत
सूबे में विपक्ष की भूमिका निभा रही कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव के बाद अब नई रणनीति अपनाते हुए पहली बार ब्लॉक के अधीन नए मंडल गठन कर अध्यक्ष नियुक्त किए हैं. राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा (Govind Singh Dotasra) ने ब्यावर विधानसभा क्षेत्र के दो ब्लॉक में 11 मंडल गठन किए हैं. ब्यावर ब्लॉक में 5 और जवाजा ब्लॉक में 6 मंडल अध्यक्षाें की घोषणा की है.
यह भी पढ़ें- ठेकेदार के भरोसे शहर की 'प्यास'
युवाओं के भरोसे कांग्रेस की कमान
प्रदेश आलाकमान ने इस बार युवाओं पर भरोसा जताते हुए उन्हें कमान सौंपी है. ब्यावर (Beawar) ब्लॉक के ज्योतिबा फुले में राम यादव, श्री बालाजी में हिमांशु शर्मा, शहीद भगत सिंह में पृथ्वीराज गहलोत, बाबा रामदेव में महेंद्र सामरिया और श्री परशुराम में चंद्रशेखर शर्मा को मंडल अध्यक्ष नियुक्त किया है.
जवाजा (Jawaja) ब्लॉक के रूपनगर में सिकंदर, गणेशपुरा में हरिराम मेघवाल, भालिया में तिकेंद्र सिंह रावत, राजियावास में दिनेश सिंह रावत, जवाजा में पूरणमल शर्मा और देलवाड़ा में हुसैन मोहम्मद को मंडल अध्यक्ष का दायित्व सौंपा है. पीसीसी चीफ डोटासरा ने इन नियुक्तियों के साथ भरोसा जताया है कि अब कांग्रेस पार्टी जमीनी स्तर पर मजबूत होगी. नवनियुक्त अध्यक्ष कांग्रेस पार्टी की विचारधारा को मजबूत करने में पूर्ण समर्पण भाव से योगदान देंगे.
यह भी पढ़ें- महिला ने लड़के से किया दुष्कर्म
मंडल गठन से कांग्रेस को मिलेगी मजबूती
भाजपा (BJP) जब बूथ तक पन्ना प्रमुख बनाकर विधानसभा चुनाव लड़ चुकी है तब कहीं जाकर अब कांग्रेस (Congress) ने मंडल अध्यक्ष बनाए हैं. देर से ही सही, लेकिन पार्टी का यह फैसला निश्चित तौर पर कांग्रेस को अधिक मजबूत बनाने में मददगार साबित हो सकता है. अब देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले निकाय चुनाव में यह नवनियुक्त मंडल अध्यक्ष कितनी शिद्दत के साथ कार्य कर पार्टी का परचम लहराने और सफलता में सक्रिय भागीदारी निभा सकेंगे. ©सुमित सारस्वत
यह भी पढ़ें- क्यों बढ़ी पेरेंट्स की चिंता ?
April 23, 2025
ठेकेदार के भरोसे शहर की 'प्यास' !, अकुशल लेबर से गड़बड़ाई जल वितरण व्यवस्था, पूर्व एईएन ने स्टाफ की कमी पर जताई चिंता - Water Crisis
![]() |
| काल्पनिक चित्र (AI) |
बीसलपुर लाइन से जुड़े ब्यावर शहर में इन दिनों पेयजल वितरण व्यवस्था गड़बड़ाई हुई है. कई इलाकों में पेयजल समय पर नहीं आ रहा है तो कई जगह दूषित सप्लाई हो रही है. कुछ इलाकों में लीकेज की शिकायतें भी मिली है. इन सारी समस्याओं से शहर की जनता त्रस्त है.
समस्या के बारे में पड़ताल करने पर विभागीय सूत्रों ने बताया कि पेयजल व्यवस्था बिगड़ने का एक मुख्य कारण दौलतपुरा पंप हाउस की खराब हालत है. यहां लंबे समय से मशीनों का रखरखाव नहीं हुआ. कुछ मशीनें खराब बताते हैं तो कुछ मशीनें दम तोड़ने के कगार हैं. यही कारण है कि जितना प्रेशर चाहिए उतने प्रेशर से सप्लाई नहीं आती. उच्चाधिकारियों से इन मशीनों की जांच करवानी चाहिए. यह भी अंदेशा है कि यदि पंप हाउस पर मशीनों की स्थिति समय रहते नहीं सुधरी तो मई-जून में हालत और अधिक बदतर हो सकते हैं. दूसरा कारण यह मालूम हुआ कि जल वितरण, मेंटिनेंस और लीकेज ठीक करने काम काम ठेके पर दिया हुआ है. इसी लापरवाही की वजह से शिकायतों के बावजूद लंबे समय तक लीकेज ठीक नहीं होते और जनता परेशान है.
यह भी पढ़ें- कश्मीर में बड़ा आतंकी हमला
जल वितरण व्यवस्था चुनौतीपूर्ण
इस मामले में जलदाय विभाग के रिटायर्ड सहायक अभियंता संजीव माथुर ने बताया कि "ब्यावर में जल वितरण व्यवस्था हमेशा से चुनौतीपूर्ण रही है. मेरे समय में 179 कर्मचारी कार्यरत थे और सुपरवाइजरी स्टाफ की कमी थी. इसके बावजूद उस वक्त कामचोर तथा नेता टाइप कर्मचारियों को एडजस्ट करते हुए भी सुपरवाइजरी कार्य हो जाता था. आज की परिस्थिति में स्थिति ज्यादा विकट है. करीब 125 स्टाफ रिटायर हो चुका है. सुपरवाइजरी स्टाफ की भी कमी है. अभी करीब 55 कर्मचारी कार्यरत हैं. इनमें से भी 20-25 स्टाफ रिटायरमेंट के नजदीक है जो 2025 से 2027 के बीच रिटायर होने वाले हैं. ऐसे में जल वितरण और रखरखाव व्यवस्था पूरी तरह ठेकेदार की अकुशल लेबर पर निर्भर है." माथुर ने बताया कि "वर्तमान में सहायक अभियंता अपने 5 कनिष्ठ अभियंता के स्थान पर सिर्फ 1 कनिष्ठ अभियंता से सुपरवाइजरी कार्य करवा रहे हैं. महिला होते हुए भी एईएन का कार्य उच्च कोटि का है और सराहनीय है."
यह भी पढ़ें- महिला ने लड़के से किया दुष्कर्म
पेयजल समस्या से आमजन में आक्रोश
हाल ही शहर में पेयजल समस्या को लेकर वार्ड संख्या 45 के क्षेत्रवासियों ने जलदाय विभाग के दफ्तर पर विरोध प्रदर्शन किया. भाजपा नेता निखिल रावत, वीरेंद्र रावत, सामाजिक कार्यकर्ता अनिल आर्य ने जल वितरण व्यवस्था में सुधार नहीं होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी. इस मामले में कांग्रेस नेता अजय शर्मा ने सरकार को आड़े हाथ लिया. उन्होंने कहा कि "मूलभूत सुविधाएं मुहैया करवाने में सरकार फेल हो रही है. जनता को न तो समय पर पानी मिल रहा है और न ही बिजली. शर्मा ने कहा कि जिला मुख्यालय पर रोजाना जल सप्लाई का नियम है लेकिन स्थानीय प्रशासन अनदेखी कर जनता को परेशान कर रहा है. जब जयपुर और अजमेर जिला मुख्यालय में रोजाना जल सप्लाई हो रही है तो ब्यावर में क्यों नहीं?" इस मामले में हमने सहायक अभियंता से बात करने का प्रयास किया लेकिन संपर्क नहीं हो सका.
यह भी पढ़ें- क्यों बढ़ी पेरेंट्स की चिंता ?
April 20, 2025
दुष्कर्मी महिला को 20 साल की जेल, होटल में 15 साल के लड़के को शराब पिलाकर बनाया था हवस का शिकार
✍ सुमित सारस्वत
मामला चौंकाने वाला है लेकिन हकीकत है. कलयुग में महिलाएं भी 'दुष्कर्म' करने लगी है. हैरान कर देने वाला यह मामला राजस्थान (Rajasthan) का है, जहां एक 40 साल की महिला ने 15 साल के नाबालिग लड़के को अपनी हवस का शिकार बनाया.
शारीरिक संबंध बनाने से पहले लड़के को शराब भी पिलाई. यौन शोषण (Sexually Abused) के इस मामले में अब बूंदी पॉक्सो कोर्ट (Pocso Court) ने महिला को दोषी मानकर 20 साल की सजा सुनाई है. साथ ही 45 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है. इस मामले में 17 गवाह और 37 दस्तावेज पेश किए गए थे.
यह भी पढ़ें- ‘ये ब्रेस्ट हैं, संतरे नहीं’
जानकारी के अनुसार, बूंदी (Bundi) की एक महिला ने 7 नवंबर 2023 को दी रिपोर्ट में आरोप लगाया था कि 40 साल की महिला ने उसके बेटे का यौन शोषण किया है. अगस्त 2023 में आरोपी महिला लड़के को अपने साथ जयपुर ले गई. वहां एक होटल के रूम में उसे शराब पिलाई और शारीरिक शोषण (Rape) किया. पुलिस ने नाबालिग को जयपुर से बरामद कर मामले की जांच की. लड़के के बयान सुनकर सभी दंग रह गए. लड़के ने आपबीती में महिला की करतूतों का खुलासा किया.
यह भी पढ़ें- श्री सीमेंट ने तोड़ा किसान का घर
सांस्कृतिक प्रदेश (Cultural State) राजस्थान का यह मामला सोचने पर मजबूर करने वाला है कि सभ्य समाज किस दिशा की ओर बढ़ रहा है. जिस समाज में बढ़ते अपराधों के बीच बुलंद आवाज में महिला सुरक्षा (Women Safety) की मांग की जा रही हो उसी समाज की महिलाएं अपनी हवस मिटाने के लिए दुष्कर्म जैसे अपराध करने लगी है. इस मामले से जेहन में सवाल हैं कि क्या अब लड़के भी घर के बाहर सुरक्षित नहीं रहेंगे ? क्या अब बेटों को भी सिखाना होगा कि दुष्कर्मी महिलाओं से कैसे बचें ? ©सुमित सारस्वत
यह भी पढ़ें- क्यों बढ़ी पेरेंट्स की चिंता?
December 17, 2024
राजस्थान सरकार का एक साल पूरा, पीएम मोदी ने दी यह सौगातें - PM Modi in Rajasthan
✍🏻 सुमित सारस्वत
राजस्थान में सीएम भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली भाजपा (BJP) सरकार का एक साल पूरा हाे गया है. इस मौके पर मंगलवार को राजधानी जयपुर (Jaipur) में आयोजित समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narenda Modi) ने कई सौगात दी. दादिया में आयोजित ‘एक वर्ष-परिणाम उत्कर्ष’ (Ek Varsh Parinaam Utkarsh) कार्यक्रम में ऊर्जा, सड़क एवं रेलवे से जुड़ी कई परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया.
समारोह को संबोधित करते हुए पीएम मोदी (PM Modi) ने कहा कि इन परियोजनाओं से राजस्थान के पर्यटन, किसानों और नौजवानों को बहुत फायदा होगा. ये परियोजनाएं राजस्थान में पेयजल की चुनौती का स्थाई समाधान करेंगी और राजस्थान को देश में सबसे बेहतर संपर्क वाले राज्यों में से एक बनाएंगी. इससे राजस्थान में निवेश को बल मिलेगा. रोजगार के कई अवसर बनेंगे.
आधिकारिक बयान के अनुसार, मोदी ने ऊर्जा, सड़क, रेलवे (Railways) और जल (Water) से जुड़ी 46,300 करोड़ रुपए से अधिक की 24 परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया. 11,000 करोड़ रुपए से अधिक की 9 परियोजनाओं का उद्घाटन किया, जिनमें केंद्र सरकार की 7 और राज्य सरकार की 2 परियोजनाएं शामिल हैं. पीएम ने 35,300 करोड़ रुपए से अधिक की 15 परियोजनाओं की आधारशिला रखी, जिनमें केंद्र सरकार की 9 और राज्य सरकार की 6 परियोजनाएं शामिल हैं.
आधिकारिक बयान के अनुसार, मोदी ने जिन परियोजनाओं का उद्घाटन किया उनमें नवनेरा बैराज, स्मार्ट इलेक्ट्रिसिटी ट्रांसमिशन नेटवर्क और परिसंपत्ति प्रबंधन प्रणाली से जुड़ी परियोजनाएं, रेलवे के भीलड़ी-समदड़ी-लूणी-जोधपुर-मेड़ता रोड-डेगाना-रतनगढ़ खंड का विद्युतीकरण शामिल है. अधिकारियों के अनुसार, ये परियोजनाएं लोगों के आवागमन को सुगम बनाने और प्रधानमंत्री के हरित ऊर्जा के दृष्टिकोण के अनुरूप राज्य की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद करेंगी.
प्रधानमंत्री ने 9,400 करोड़ रुपए से अधिक की लागत से रामगढ़ बैराज और महलपुर बैराज के निर्माण कार्य तथा चंबल नदी पर नहर के माध्यम से नवनेरा बैराज से बीसलपुर बांध और ईसरदा बांध तक पानी पहुंचाने की प्रणाली की आधारशिला रखी. सरकारी कार्यालय भवनों की छतों पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने, पूगल (बीकानेर) में 2000 मेगावाट के एक सौर पार्क और 1000 मेगावाट के दो चरणों के सौर पार्कों के विकास तथा सैपऊ (धौलपुर) से भरतपुर-डीग-कुम्हेर-नगर-कामाण एवं पहाड़ी तथा चंबल-धौलपुर-भरतपुर तक पेयजल आपूर्ति लाइन के ‘रेट्रोफिटिंग’ (पुरानी या कम कुशल व्यवस्था में बदलाव किए बिना नई, अधिक ऊर्जा कुशल प्रौद्योगिकियों को लगाने की प्रक्रिया) कार्य का भी शिलान्यास किया.
मोदी ने लूणी-समदड़ी-भीलड़ी डबल लाइन, अजमेर-चंदेरिया डबल लाइन और जयपुर-सवाई माधोपुर डबल लाइन रेलवे परियोजना के साथ-साथ अन्य ऊर्जा पारेषण से संबंधित परियोजनाओं का भी शिलान्यास किया. समारोह में राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा (Bhajanlal Sharma), मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव (Mohan Yadav), केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल, केंद्रीय मंत्री भागीरथ चौधरी, उप उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा, दिया कुमारी (Diya Kumari), पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे (Vasundhara Raje), बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ (Madan Rahore) समेत कई मंत्री, जनप्रतिनिधि और प्रदेशभर से पहुंचे हजारों लोग मौजूद रहे.
कार्यक्रम का विडियो देखने के लिए यहां क्लिक करें
December 12, 2024
श्री सीमेंट ने तोड़ा किसान का घर, कंपनी की तानाशाही के खिलाफ प्रदर्शन - Farmers protest against Shree Cement
✍🏻 सुमित सारस्वत
श्री सीमेंट कंपनी एक बार फिर विवादों में है. इस बार कंपनी पर किसानों के घर तोड़ने का गंभीर आराेप लगा है. मुआवजा नहीं मिलने पर एक किसान ने कंपनी के प्रवेश द्वार पर आत्मदाह का प्रयास किया. बड़ी संख्या में मौके पर मौजूद लाेगों ने श्री सीमेंट (Shree Cement) कंपनी पर तानाशाही करने का आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन किया.
किसान विद्याधर ने दो दिन पहले इच्छा मृत्यु के लिए एसडीएम और कलेक्टर को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन भी दिया था. इत्तला मिलने पर पूर्व मंत्री राजेंद्र गुढ़ा (Rajendra Gudha) भी मौके पर पहुंचे और कंपनी की मनमानी के खिलाफ गेट पर चढ़ गए. गुढ़ा ने किसान का समर्थन करते हुए जमीन का मुआवजा मांगा. मामला झुंझुनूं (Jhunjhunu) के नवलगढ़ (Nawalgarh) का है.
यह भी पढ़ें- श्री सीमेंट हादसे की जांच कौन करवाएगा 'सरकार'
प्रदर्शन के दौरान पूर्व मंत्री राजेंद्र गुढ़ा ने कंपनी प्रबंधन पर कई गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने आरोप लगाया कि श्री सीमेंट कंपनी ने नियमों को ताक में रखकर नवलगढ़ में प्लांट लगाया है. कंपनी के पास पॉल्यूशन की एनओसी नहीं है. बिना बाउंड्री के माइनिंग और ब्लास्टिंग कर रहे हैं. ब्लास्टिंग से कोई भी हादसा हो सकता है, कोई मर सकता है. गुढ़ा ने दावा किया कि उनके पास कंपनी की 50 कमियां हैं. प्रशासन चोरों की रखवाली कर रहा है. किसान परिवार को न्याय नहीं मिल रहा है और प्रशासनिक अधिकारी कंपनी की पैरवी कर रहे हैं.
यह भी पढ़ें- क्या मृतक परिवारों का दर्द बांटेगा श्री सीमेंट प्रबंधन
प्रदर्शन के दौरान मौके पर मौजूद एक ग्रामीण ने बताया कि करीब एक महीने पहले श्री सीमेंट कंपनी प्रबंधन ने किसान का घर ताेड़कर उसे बेघर कर दिया. किसान के बच्चे छोटे हैं और वाइफ प्रेगनेंट है. एक अन्य ग्रामीण ने आरोप लगाया कि कंपनी ने बीते 2-3 साल में कई किसानों के घर तोड़ दिए. खेत उजाड़ दिए. अभी उनके पास रहने को छत नहीं है. न कंपनी सुनवाई कर रही है और न ही प्रशासन ने सुध ली है. कंपनी ने इलाके का पर्यावरण संतुलन बिगाड़ दिया है. किसानों (Farmers) की मांग है कि उन्हें जमीन का उचित मुआवजा मिलना चाहिए. साथ ही बेघर हुए परिवार के किसी एक सदस्य को कंपनी में रोजगार दिया जाए.
यह भी पढ़ें- अजमेर दरगाह का सबसे बड़ा विवाद
इस मामले में कंपनी के यूनिट हैड एचसी गुप्ता ने मीडिया को बताया कि प्रभावित किसानों को 26 लाख रुपए प्रति बीघा का मुआवजा निर्धारित किया गया, वह देने को तैयार हैं. आश्वासन के बाद किसानों ने कंपनी को सात दिन का अल्टीमेटम और चेतावनी दी है कि यदि मांग पूरी नहीं हुई तो उग्र आंदोलन करेंगे. अब देखना रोचक होगा कि उत्तर भारत की बड़ी कंपनी किसान के आगे झुकेगी या फिर आंदोलन (Farmers Protest) उग्र होगा. ©सुमित सारस्वत
यह भी पढ़ें- सुसाइड केस ने क्यों बढ़ाई पेरेंट्स की चिंता













