राजस्थान के नाथद्वारा (Nathdwara) स्थित पुष्टिमार्गीय वैष्णव संप्रदाय की प्रधानपीठ श्रीनाथजी मंदिर (Shrinathji Temple) में रविवार को होने वाले ज्येष्ठाभिषेक स्नान उत्सव की तैयारियां शुरू हो गई हैं. ज्येष्ठ शुक्ल त्रयोदशी के अवसर पर परंपरा अनुसार प्रभु श्रीनाथजी का ज्येष्ठाभिषेक करने के लिए पवित्र जल भरने की सेवा विधि-विधान के साथ शनिवार को संपन्न हुई.
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मंदिर तिलकायत की अनुमति से विशाल बावा और लाल बावा ने वल्लभकुल परिवार एवं श्रीजी प्रभु के निज सेवकों के साथ प्राचीन भीतर की बावड़ी से स्वर्ण कलश में अभिषेक का जल भरा. इसके बाद स्वर्ण और रजत कलशों में भरे जल का आरती दर्शन के समय विशेष अधिवासन किया. अधिवासन की परंपरा के तहत जल में अष्टगंध सामग्री का मिश्रण किया गया, जिसमें चंदन, केसर, गुलाब जल, बरास, अरगजा सहित सुगंधित और पवित्र सामग्री शामिल रही.
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पुष्टिमार्गीय मान्यता के अनुसार ज्येष्ठाभिषेक सेवा का भाव ग्रीष्म ऋतु में प्रभु श्रीनाथजी को शीतलता प्रदान करना है. इसे श्री यमुना जी द्वारा अपने प्रियतम प्रभु को सुगंधित जल से स्नान कराने के भाव से जोड़ा जाता है.
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ज्येष्ठाभिषेक के बाद प्रभु श्रीनाथजी को सवा लाख आमों का विशेष भोग अर्पित किया जाएगा. इस विशेष मनोरथ को लेकर वैष्णव समाज में उत्साह का माहौल है. हवेली के मोती महल चौक में वैष्णवजन आम सामग्री तैयार करने की सेवा दी. जल भरने और अधिवासन के दौरान मंदिर अधिकारी सुधाकर शास्त्री, मुख्य प्रशासक भारत भूषण व्यास, सीईओ जितेंद्र पंड्या, तिलकायत श्री के मुख्य सलाहकार अंजन शाह समेत मंदिर मंडल सदस्य और कई वैष्णवजन अलौकिक क्षण के साक्षी बने. ©सुमित सारस्वत
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June 27, 2026
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» सोने चांदी के घड़ों में भरे जल से इस तरह होगा श्रीनाथजी का ज्येष्ठाभिषेक






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