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January 7, 2026

राजस्थान में मिनरल उद्योग पर संकट!, 50 प्रतिशत उद्योग बंद होने से बढ़ी बेरोजगारी, सरकार के खिलाफ लघु उद्योग संघ करेगा आंदोलन - Mineral Industry Crisis

✍🏻 सुमित सारस्वत

राजस्थान में निवेश को बढ़ावा देने के लिए एक ओर सरकार राइजिंग राजस्थान जैसे ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट आयोजित कर रही है तो वहीं दूसरी ओर मिनरल उद्योग पर संकट छा गया है. अनुमानित 50 प्रतिशत उद्योग बंद हो गए हैं. कामकाज ठप होने और फैक्ट्रियों पर ताले लगने से बेरोजगारी बढ़ गई है. अब लघु उद्योग संघ ने सरकार के खिलाफ आंदोलन की रणनीति बनाई है.

संघ अध्यक्ष आशीषपाल पदावत ने बताया कि वर्तमान में मिनरल उद्योग गंभीर संकट के दौर से गुजर रहा है. 400-500 फैक्ट्रियां बंद हो गई है. शेष उद्योग भी बंद होने के कगार पर हैं. उद्योग संचालन मुश्किल हो गया है. हालत इतने बदतर हो गए हैं कि बड़े से बड़े उद्योगपति भी फैक्ट्री का खर्चा नहीं निकाल पा रहे हैं. मौजूदा हालात में सभी परेशान हैं. क्षेत्र में रोजगार और आर्थिक गतिविधियों पर प्रतिकूल असर हो रहा है.

उद्योग बंद रखकर करेंगे प्रदर्शन

उद्योगों की बदहाल स्थिति और संरक्षण की मांग को लेकर ब्यावर जिले के मिनरल कारोबारी गुरुवार को सभी उद्योग बंद रखेंगे. सुबह 10 बजे लघु उद्योग संघ कार्यालय पर एकत्र होकर रैली के रूप में जिला कलेक्ट्रेट पहुंचेंगे. यहां सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए कलेक्टर को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन देंगे. मिनरल उद्योगों से जुड़े वर्गों ने भी मांग का समर्थन किया है. व्यापारी, ट्रांसपोर्टर्स, बारदाना सप्लायर्स, मशीनरी व इलेक्ट्रिकल सप्लायर्स, स्पेयर्स सप्लायर्स, जेसीबी-डम्पर मालिक, रॉ मटेरियल सप्लायर्स समेत समस्त फैक्ट्रियों का स्टाफ और मजदूर रैली में शामिल होंगे. ©सुमित सारस्वत

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July 31, 2025

सरकार, कब करोगे अमृतकाैर का उपचार ?, क्या डॉक्टरों-मरीजों की मौत का है इंतजार ! - Amritkaur Hospital Building Damaged

✍🏻 सुमित सारस्वत
राजस्थान में ब्यावर जिले के सबसे बड़े राजकीय अमृतकाैर अस्पताल (Amrit Kaur Hospital) की जर्जर बिल्डिंग की मरम्मत करवाने के लिए शासन-प्रशासन शायद डॉक्टरों और मरीजों की मौत का इंतजार कर रहा है. झालावाड़ स्कूल हादसे (Jhalawar School Accident) के बाद जिला अस्पताल में ऐसी ही चर्चा सुनने को मिली. दरअसल, वर्ष 1955 में स्थापित अमृतकौर अस्पताल का 70 साल पुराना भवन मौजूदा वक्त में खुद बीमार है. बीते कई साल से अस्पताल भवन के कई हिस्से बल्लियों के सहारे टिके हैं. यहां कार्यरत चिकित्सक, नर्सिंगकर्मी और आने वाले मरीज भय के साये में रहते हैं.

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एकेएच में चिकित्सा अधिकारी रहे डॉ. प्रदीप जैन ने चिंता जताते हुए बताया कि पूरे प्रदेश में सरकारी स्कूलों के जर्जर भवनों की चर्चा हो रही है लेकिन जर्जर सरकारी अस्पतालों की चर्चा कोई नहीं कर रहा. जितने जरूरी स्कूल हैं उतने ही जरूरी अस्पताल भी हैं. ब्यावर (Beawar) का सरकारी अस्पताल भवन बरसों से जर्जर और अब बल्लियों के सहारे है. यहां कई मंत्री-सांसद आए, सरकारी अधिकारी आए, सभी ने पुराना जर्जर भवन देखा, नए भवन के वादे किए...लेकिन भूल गए. सिस्टम की सुस्ती देखिए कि सरकार बदल गई लेकिन अस्पताल के हालात नहीं बदले. डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ इमरजेंसी सेवाओं में शामिल है इसलिए अस्पताल आना जरूरी है. अस्पताल की दहलीज पर कदम रखते ही दिल दहलता है लेकिन सरकारी नौकरी होने से चुप रहते हैं. कर्मचारियों का मानना है कि सरकार को समस्या बताना मतलब मुसीबत बोल लेना है. या तो कर्मचारी का ट्रांसफर कर देंगे, या किसी बहाने काम में लापरवाही का नोटिस थमा देंगे.

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गौरतलब है कि राजकीय अमृतकौर चिकित्सालय का बरसों पुराना भवन जर्जर हो गया है. सुरक्षा के मद्देनजर कई वार्ड बंद कर दिए हैं. नवीन भवन के लिए पूर्व की कांग्रेस सरकार ने स्वीकृति दी थी लेकिन बजट के अभाव में अब तक न तो पुराने भवन की मरम्मत हुई और न ही नया भवन बना. कांग्रेस शासन में मुख्य सचिव रहे निरंजन आर्य, तत्कालीन सांसद और वर्तमान में ब्यावर जिला प्रभारी व उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी (Diya Kumari) समेत कई मंत्री यहां दौरा कर गए और अस्पताल की जर्जर हालत पर चिंता जता गए लेकिन सुधार के लिए किसी ने कोई प्रयास नहीं किए.

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अब सरकारी स्कूलों में होने वाले हादसों को देखकर चिकित्सालय में चारों तरफ यही चर्चा है कि सरकार और जिला प्रशासन शायद अस्पताल में भी किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है. यदि मौत के बाद मुआवजा देने की बजाय सरकार (Government) जिंदगियां बचाने की चिंता करे तो शायद कहीं कोई हादसा न हो. उम्मीद है कि सरकार इस सरकारी अस्पताल की जल्द ही सुध लेकर चिकित्साकर्मियों और मरीजों को बड़ी राहत प्रदान करेगी. 
©सुमित सारस्वत

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April 23, 2025

ठेकेदार के भरोसे शहर की 'प्यास' !, अकुशल लेबर से गड़बड़ाई जल वितरण व्यवस्था, पूर्व एईएन ने स्टाफ की कमी पर जताई चिंता - Water Crisis


काल्पनिक चित्र (AI)
✍🏻 सुमित सारस्वत

बीसलपुर लाइन से जुड़े ब्यावर शहर में इन दिनों पेयजल वितरण व्यवस्था गड़बड़ाई हुई है. कई इलाकों में पेयजल समय पर नहीं आ रहा है तो कई जगह दूषित सप्लाई हो रही है. कुछ इलाकों में लीकेज की शिकायतें भी मिली है. इन सारी समस्याओं से शहर की जनता त्रस्त है.


समस्या के बारे में पड़ताल करने पर विभागीय सूत्रों ने बताया कि पेयजल व्यवस्था बिगड़ने का एक मुख्य कारण दौलतपुरा पंप हाउस की खराब हालत है. यहां लंबे समय से मशीनों का रखरखाव नहीं हुआ. कुछ मशीनें खराब बताते हैं तो कुछ मशीनें दम तोड़ने के कगार हैं. यही कारण है कि जितना प्रेशर चाहिए उतने प्रेशर से सप्लाई नहीं आती. उच्चाधिकारियों से इन मशीनों की जांच करवानी चाहिए. यह भी अंदेशा है कि यदि पंप हाउस पर मशीनों की स्थिति समय रहते नहीं सुधरी तो मई-जून में हालत और अधिक बदतर हो सकते हैं. दूसरा कारण यह मालूम हुआ कि जल वितरण, मेंटिनेंस और लीकेज ठीक करने काम काम ठेके पर दिया हुआ है. इसी लापरवाही की वजह से शिकायतों के बावजूद लंबे समय तक लीकेज ठीक नहीं होते और जनता परेशान है. 


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जल वितरण व्यवस्था चुनौतीपूर्ण

इस मामले में जलदाय विभाग के रिटायर्ड सहायक अभियंता संजीव माथुर ने बताया कि "ब्यावर में जल वितरण व्यवस्था हमेशा से चुनौतीपूर्ण रही है. मेरे समय में 179 कर्मचारी कार्यरत थे और सुपरवाइजरी स्टाफ की कमी थी. इसके बावजूद उस वक्त कामचोर तथा नेता टाइप कर्मचारियों को एडजस्ट करते हुए भी सुपरवाइजरी कार्य हो जाता था. आज की परिस्थिति में स्थिति ज्यादा विकट है. करीब 125 स्टाफ रिटायर हो चुका है. सुपरवाइजरी स्टाफ की भी कमी है. अभी करीब 55 कर्मचारी कार्यरत हैं. इनमें से भी 20-25 स्टाफ रिटायरमेंट के नजदीक है जो 2025 से 2027 के बीच रिटायर होने वाले हैं. ऐसे में जल वितरण और रखरखाव व्यवस्था पूरी तरह ठेकेदार की अकुशल लेबर पर निर्भर है." माथुर ने बताया कि "वर्तमान में सहायक अभियंता अपने 5 कनिष्ठ अभियंता के स्थान पर सिर्फ 1 कनिष्ठ अभियंता से सुपरवाइजरी कार्य करवा रहे हैं. महिला होते हुए भी एईएन का कार्य उच्च कोटि का है और सराहनीय है."


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पेयजल समस्या से आमजन में आक्रोश

हाल ही शहर में पेयजल समस्या को लेकर वार्ड संख्या 45 के क्षेत्रवासियों ने जलदाय विभाग के दफ्तर पर विरोध प्रदर्शन किया. भाजपा नेता निखिल रावत, वीरेंद्र रावत, सामाजिक कार्यकर्ता अनिल आर्य ने जल वितरण व्यवस्था में सुधार नहीं होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी. इस मामले में कांग्रेस नेता अजय शर्मा ने सरकार को आड़े हाथ लिया. उन्होंने कहा कि "मूलभूत सुविधाएं मुहैया करवाने में सरकार फेल हो रही है. जनता को न तो समय पर पानी मिल रहा है और न ही बिजली. शर्मा ने कहा कि जिला मुख्यालय पर रोजाना जल सप्लाई का नियम है लेकिन स्थानीय प्रशासन अनदेखी कर जनता को परेशान कर रहा है. जब जयपुर और अजमेर जिला मुख्यालय में रोजाना जल सप्लाई हो रही है तो ब्यावर में क्यों नहीं?" इस मामले में हमने सहायक अभियंता से बात करने का प्रयास किया लेकिन संपर्क नहीं हो सका.


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November 8, 2024

यूपी में महिला सुरक्षा के लिए बड़ा अहम फैसला, पुरुष टेलर नहीं ले सकेंगे महिलाओं का माप, जिम में भी रोक

✍🏻सुमित सारस्वत
भारत में बढ़ते दुष्कर्म (Rape) मामलों के बीच महिला सुरक्षा के लिए एक बड़ा अहम फैसला हुआ है. यूपी महिला आयोग ने तय किया है कि अब उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में ब्यूटी पार्लर, बुटिक, योगा सेंटर और जिम में महिलाओं के लिए पुरूषों को काम पर नहीं लगाया जा सकता.

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आयोग अध्यक्ष बबीता चौहान (Babita Chauhan) ने बताया कि यूपी में अब पुरुष टेलर महिलाओं का माप नहीं ले सकेंगे. ब्यूटी पार्लर में मेकअप का काम महिला ब्यूटीशियन और योगा सेंटर व जिम में भी महिला ट्रेनर होना जरूरी है. महिलाओं को पुरुषों के 'गलत इरादे' और 'बैड टच' से बचाने के लिए आयोग ने यह प्रस्ताव दिया है. आयोग का मानना है कि इस तरह के पेशे में शामिल पुरुषों की वजह से महिलाओं के साथ छेड़छाड़ होती है. पुरुष महिलाओं के साथ गलत व्यवहार की कोशिश करते हैं.

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आयोग अध्यक्ष ने कहा कि इस फैसले से महिला सुरक्षा बढ़ेगी. साथ ही महिलाओं के लिए नौकरी रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे. आयोग के इस फैसले को देशभर से समर्थन मिल रहा है. लोग इस फैसले पर खुशी जताते हुए पूरे देश में लागू करने की मांग कर रहे हैं.
©सुमित सारस्वत

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July 23, 2024

राजस्थान में बीजेपी-कांग्रेस के पार्षद एकजुट होकर दे रहे धरना, जानें क्या है मांग ?

 ✍🏻सुमित सारस्वत
'रिंद जो ज़र्फ़ उठा लें वही साग़र बन जाए, जिस जगह बैठ के पी लें वही मय-ख़ाना बन जाए' शायर असग़र गोंडवी का यह शेर ब्यावर शहर की हकीकत बयां कर रहा है. सरकार की सरपरस्ती में यहां कदम-कदम पर मयखाने खुले हैं. आलम ऐसा है कि शराबी सरेआम जाम छलका रहे हैं. आबादी क्षेत्र में खुला ऐसा ही एक मयखाना आज जनता और जनप्रतिनिधियों के निशाने पर है.

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अजमेर रोड स्थित मोतीपुरा क्षेत्र में मुख्य मार्ग पर खुले मयखाने का लोग विरोध कर रहे हैं. आरोप है कि आबकारी विभाग ने नियमों की अनदेखी कर शराब ठेके का लाइसेंस जारी किया है. भाजपा और कांग्रेस के पार्षद और पार्टी पदाधिकारी भी जनता के साथ विरोध प्रदर्शन में आवाज बुलंद कर रहे हैं. सोमवार को जिला कलक्टर से मुलाकात कर शराब की दुकान बंद करने की मांग करने के बाद मंगलवार को जब दुकान खुली तो लोग नारेबाजी करते हुए दुकान के बाहर धरना देकर बैठ गए. 'दारू का ठेका बंद हो, बंद हो' नारे लगाते हुए क्षेत्रवासियों ने दो टूक चेतावनी दी कि किसी भी स्थिति में यहां शराब ठेका संचालित नहीं होने देंगे.

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जनप्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि आबकारी विभाग ने अजमेर रोड क्षेत्र में जगह-जगह शराब ठेकों के लाइसेंस जारी किए हैं. इससे क्षेत्रवासी परेशान हैं. प्रदर्शन में पार्षद मुन्नी गहलोत, सुनीता भाटी, हरीश सांखला, भूपेंद्रजीत भोजक, भाजपा नेता नरेंद्र चौहान, बबीता चौहान, शंकर यादव, कांग्रेस नेता शंभू यादव, राम यादव, शैलेंद्र सांखला, मुकेश पालड़िया समेत कई क्षेत्रवासी मौजूद रहे. गौरतलब है कि कुछ साल पहले सेंदड़ा रोड पर आबादी क्षेत्र में खुली शराब की दुकान का क्षेत्रवासियों ने इसी तरह विरोध किया था. कई दिनों तक धरना प्रदर्शन के बाद जनता की जीत हुई. ©सुमित सारस्वत


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March 13, 2024

महिला अधिकारी घूंघट में मरीज बनकर पहुंची अस्पताल, ऐसे हालात देखकर रह गई दंग

अमूमन देखने में आता है कि मरीजों का इलाज करने वाले अस्पताल खुद ही बीमार रहते हैं. ऐसे में मरीजों को उचित उपचार नहीं मिलता. अव्यवस्थाओं की शिकायत मिलने के बाद एक महिला अधिकारी ने आज जांच का नया तरीका अपनाया. वे खुद मरीज बनकर अस्पताल पहुंची तो सारी पोल खुल गई.

मामला उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद स्थित एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का है, जहां उस वक्त हड़कंप मच गया, जब जिले की महिला एसडीएम (IAS) औचक निरीक्षण करने पहुंच गईं. निरीक्षण के लिए एसडीएम घूंघट में मरीज बनकर पहुंची थीं. उन्होंने आम मरीजों की तरह लाइन में लगकर पर्ची बनवाई और डॉक्टर को दिखाने के लिए कतार में लग गईं. शुरू में उन्हें कोई पहचान नहीं पाया लेकिन जब खुलासा हुआ कि घूंघट वाली महिला कोई और नहीं बल्कि एसडीएम कृति राज (IAS Krati Raj) हैं तो वहां मौजूद कर्मचारियों के पसीने छूट गए.

एसडीएम को स्वास्थ्य केंद्र में कई खामियां मिलीं. उन्होंने कार्रवाई के लिए निरीक्षण रिपोर्ट जिला कलेक्टर को भेजी है. इस महिला अधिकारी की हर तरफ तारीफ हो रही है. लोग बोल रहे हैं कि अगर आईएएस कृति राज की तरह जिम्मेदार अधिकारी कार्य करें तो अस्पतालों के हालात सुधर जाएंगे. ©सुमित सारस्वत


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