राजस्थान के नाथद्वारा (Nathdwara) स्थित पुष्टिमार्गीय वैष्णव संप्रदाय की प्रधानपीठ श्रीनाथजी मंदिर (Shrinathji Temple) में रविवार को होने वाले ज्येष्ठाभिषेक स्नान उत्सव की तैयारियां शुरू हो गई हैं. ज्येष्ठ शुक्ल त्रयोदशी के अवसर पर परंपरा अनुसार प्रभु श्रीनाथजी का ज्येष्ठाभिषेक करने के लिए पवित्र जल भरने की सेवा विधि-विधान के साथ शनिवार को संपन्न हुई.
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मंदिर तिलकायत की अनुमति से विशाल बावा और लाल बावा ने वल्लभकुल परिवार एवं श्रीजी प्रभु के निज सेवकों के साथ प्राचीन भीतर की बावड़ी से स्वर्ण कलश में अभिषेक का जल भरा. इसके बाद स्वर्ण और रजत कलशों में भरे जल का आरती दर्शन के समय विशेष अधिवासन किया. अधिवासन की परंपरा के तहत जल में अष्टगंध सामग्री का मिश्रण किया गया, जिसमें चंदन, केसर, गुलाब जल, बरास, अरगजा सहित सुगंधित और पवित्र सामग्री शामिल रही.
वीडियो में देखें- कैसे होता है कृष्ण का अभिषेक
पुष्टिमार्गीय मान्यता के अनुसार ज्येष्ठाभिषेक सेवा का भाव ग्रीष्म ऋतु में प्रभु श्रीनाथजी को शीतलता प्रदान करना है. इसे श्री यमुना जी द्वारा अपने प्रियतम प्रभु को सुगंधित जल से स्नान कराने के भाव से जोड़ा जाता है.
वीडियो में देखें- बाल कृष्ण की नटखट लीलाएं
ज्येष्ठाभिषेक के बाद प्रभु श्रीनाथजी को सवा लाख आमों का विशेष भोग अर्पित किया जाएगा. इस विशेष मनोरथ को लेकर वैष्णव समाज में उत्साह का माहौल है. हवेली के मोती महल चौक में वैष्णवजन आम सामग्री तैयार करने की सेवा दी. जल भरने और अधिवासन के दौरान मंदिर अधिकारी सुधाकर शास्त्री, मुख्य प्रशासक भारत भूषण व्यास, सीईओ जितेंद्र पंड्या, तिलकायत श्री के मुख्य सलाहकार अंजन शाह समेत मंदिर मंडल सदस्य और कई वैष्णवजन अलौकिक क्षण के साक्षी बने. ©सुमित सारस्वत
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June 27, 2026
सोने चांदी के घड़ों में भरे जल से इस तरह होगा श्रीनाथजी का ज्येष्ठाभिषेक
November 16, 2024
प्रसाद चाहिए तो पहले रसीद कटवाइए, जानें कहां बिकने लगा अन्नकूट ? - Annakut Prasad on Govardhan Puja
पौराणिक मान्यता के मुताबिक, दीपावली महापर्व के दूसरे दिन गोवर्धन पूजा की जाती है. कहा जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत की शरण में देवराज इंद्र के अभिमान को समाप्त किया और गोवर्धन पूजा (Govardhan Puja) की परंपरा शुरू की. तभी से लोग हर साल गोवर्धन पूजा कर रहे हैं. इस पूजा के दिन भगवान श्री कृष्ण (Lord Krishna) और गोवर्धन जी को अन्नकूट बनाकर भोग लगाते हैं.
भगवान श्री राम (Lord Ram) के वनवास से अवध (Ayodhya) लौटने की खुशी में मनाए जाने वाले दीपावली महापर्व (Diwali Festival) के दूसरे दिन ही गोवर्धन पूजा क्यों की जाती है ? और कब से की जा रही है ? इसकी कहीं कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है.
क्या है अन्नकूट ?
मान्यता के मुताबिक, गोवर्धन पूजा के शुभ अवसर पर लोग 56 या 108 प्रकार के पकवान बनाकर श्रीकृष्ण को भोग स्वरूप अर्पित करते हैं, इन्हीं पकवानों को 'अन्नकूट' कहा जाता है. इसके बिना गोवर्धन पूजा अधूरी मानी जाती है. अन्नकूट में कई तरह की सब्जियां, कढ़ी, चावल, खीर, पूड़ी, मिठाईयां, रबड़ी, पेड़े, मक्खन, मिश्री आदि तरह-तरह की चीजें बनाते हैं.
अब आनंद के लिए अन्नकूट !
गोवर्धन पूजा के साथ शुरू हुई अन्नकूट परंपरा में वक्त के साथ बदलाव आ गया है. अब लोग आनंद के लिए अन्नकूट का आयोजन करने लगे हैं. अलग-अलग धर्मस्थलों पर कई-कई दिन तक सहूलियत के अनुसार अन्नकूट आयोजन होने लगे हैं. इतना ही नहीं, जिन धर्मस्थलों में ठाकुरजी विराजमान नहीं हैं, उन देवी-देवताओं के धर्मस्थलों पर भी लोग यह आयोजन कर रहे हैं. कई-कई जगह पर तो बाकायदा पंगत लगाकर भोजन होने लगा है.
प्रसाद पाने पहुंचे लोग हुए निराश
बदलते वक्त के साथ अब कुछ धर्मस्थलों पर अन्नकूट के नाम पर व्यापार होने लगा है. ट्रस्टी और सेवादार इस प्रसाद को भी बेचने लगे हैं. बाकायदा इसके लिए रसीद कटवाने का दबाव बनाया जाता है. वहीं कई जगहों पर पंगत में बैठकर प्रसाद खिलाने के लिए रुपए लिए जाते हैं. धर्मस्थलाें पर होने वाले इस कृत्य से आस्थावान लोगों में आक्रोश और निराशा नजर आई. एक बड़े धर्मस्थल पर अन्नकूट प्रसाद (Annakut Prasad) पाने पहुंचे लोगों को ट्रस्ट अध्यक्ष ने रसीद कटवाने का दबाव बनाया. इस बात पर लोगों ने नाराजगी व्यक्त करते हुए अध्यक्ष को खरी-खोटी भी सुनाई.
लोगों को भी बदलनी होगी धारणा
धार्मिक स्थलों पर होने वाले अन्नकूट आयोजन में पहुंचने वाले लोगों को भी अपनी धारणा बदलनी होगी. इस प्रसाद को पाने के लिए कई लोग अपने साथ बड़े-बड़े टिफिन लेकर पहुंच जाते हैं. कई लोग तो इतनी अधिक मात्रा में अन्नकूट ले जाते हैं कि उनके घर में एक वक्त भोजन का जुगाड़ हो जाता है. लोगों को यह सोच बदलनी हाेगी. प्रसाद को प्रसाद की तरह पाएंगे तभी प्रसाद की सार्थकर्ता सिद्ध होगी. ©सुमित सारस्वत
दीपावली के दूसरे दिन क्यों होती है गोवर्धन पूजा ? क्या है यह अनछुआ रहस्य - Govardhan Puja on Diwali
✍🏻सुमित सारस्वत
पौराणिक मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत की शरण में देवराज इंद्र के अभिमान को समाप्त किया और गोवर्धन पूजा (Govardhan Puja) की परंपरा शुरू की. तभी से लोग हर साल गोवर्धन पूजा कर रहे हैं. इस पूजा के दिन भगवान श्री कृष्ण (Lord Krishna) और गोवर्धन जी को अन्नकूट बनाकर भोग लगाया जाता है.
भगवान श्री राम (Lord Ram) के वनवास से अवध (Ayodhya) लौटने की खुशी में मनाए जाने वाले दीपावली महापर्व (Diwali Festival) के दूसरे दिन ही गोवर्धन पूजा क्यों की जाती है ? और कब से की जा रही है ? इसकी कहीं कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है.
क्या है अन्नकूट ?
मान्यता के मुताबिक, गोवर्धन पूजा के शुभ अवसर पर लोग 56 या 108 प्रकार के पकवान बनाकर श्रीकृष्ण को भोग स्वरूप अर्पित करते हैं, इन्हीं पकवानों को 'अन्नकूट' कहा जाता है. इसके बिना गोवर्धन पूजा अधूरी मानी जाती है. अन्नकूट (Annakut Prasad) में कई तरह की सब्जियां, कढ़ी, चावल, खीर, पूड़ी, मिठाईयां, रबड़ी, पेड़े, मक्खन, मिश्री आदि तरह-तरह की चीजें बनाते हैं. ©सुमित सारस्वत
September 5, 2024
True Love Story: अगाध प्रेम की अनूठी मिसाल है यह प्रेमी युगल, एक ही दिन हुआ था दोनों का जन्म
भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी श्री कृष्ण जन्माष्टमी (Krishna Janmashtami) कहलाती है और भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी राधा अष्टमी (Radha Ashtami) के नाम से विख्यात है. क्या यह एक अदभुत संयोग नहीं है कि श्रीकृष्ण जी का जन्म भी अष्टमी को हुआ था और उनकी प्राणप्रिया राधाजी भी अष्टमी को ही अवतरित हुई थी.
राधा रानी के प्रति श्रीकृष्ण के अगाध आत्मीय प्रेम की यह बड़ी और जीवंत मिसाल है. एक और खास बात यह है कि राधा का जन्म दिन में 12 बजे हुआ और कन्हैया का जन्म रात में 12 बजे हुआ. कृष्ण जन्म के उपलक्ष में जन्माष्टमी मनाई जाती है और राधाजी के जन्म उपलक्ष में राधाष्टमी.
आपको कृष्ण प्रिया श्री राधाजी के जन्म अष्टमी महापर्व की ढेरों बधाई.. ©सुमित सारस्वत
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August 25, 2024
जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण के लिए क्या बोले राजस्थान सीएम भजनलाल शर्मा - CM Bhajanlal Sharma on Janmashtami
भारत देश में 26 अगस्त को भगवान श्री कृष्ण जन्म का पर्व जन्माष्टमी (Janmashtami) धूमधाम और हर्षोल्लास से मनाया जाएगा. इस पावन पर्व पर राजस्थान (Rajasthan) के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा (Bhajanlal Sharma) ने प्रदेशवासियों को जन्माष्टमी की बधाई और शुभकामनाएं दी हैं.
सीएम शर्मा ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण (Lord Krishna) ने निष्काम कर्म करने, शोषण एवं अन्याय का प्रतिकार करने तथा जरूरतमंद लोगों के कल्याण के लिए सदैव समर्पित रहने का संदेश दिया.
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर प्रदेशवासियों का आह्वान किया कि वे भगवान श्रीकृष्ण के महान आदर्शों को आत्मसात करते हुए समाज में भाईचारे की भावना को मजबूत करने तथा गरीब व उपेक्षित की मदद करने का संकल्प लें. ©सुमित सारस्वत
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December 23, 2023
Khatu Shyam News: 26 दिसंबर को खाटू पहुंचेगा पैदल जत्था, रिंगस से पदयात्रा में शामिल होंगे ब्यावर के 300 श्रद्वालु
ब्यावर से बाबा श्याम का दर्शन करने के लिए गया पैदल जत्था आगामी 26 दिसंबर को खाटू पहुंचेगा। रिंगस से यात्रा में ब्यावर शहर के करीब 300 से ज्यादा श्रद्वालु शामिल होंगे। हर्षोल्लास से झूमते हुए खाटू धाम पहुंचकर बाबा का सामूहिक दर्शन करेंगे।
जानकारी देते हुए सुमित सारस्वत ने बताया कि यह पदयात्रा गत 17 दिसंबर को ब्यावर (Beawar) में फतेहपुरिया चौपड़ स्थित श्री श्याम मंदिर (Shyam Mandir) से प्रारंभ हुई थी। मंदिर प्रमुख सुनील कौशिक ने रथ में सवार बाबा का पूजन कर यात्रा को प्रस्थान करवाया। करीब 80 श्रद्वालु (Devotees) पदयात्रा कर खाटू धाम (Khatu Shyamji) जा रहे हैं। इस यात्रा में 14 साल की अनन्या सक्सेना समेत 8 महिलाएं भी शामिल हैं। यात्री राजेंद्र सिंह, मनोज शर्मा, मोहन सिंह, श्याम सिंह, सीमा माहेश्वरी, डॉली सक्सेना, खुशबू सिसोदिया, दर्शना, वंदना, अनन्या, रूबी, गीतिशा, हर्ष गर्ग, यश सोलंकी, मयंक सिंहल, निशांत मंगल, विजय मंडोरा, उत्तम गर्ग, रौनक मेवाड़ा, निशांत खत्री, पवन खत्री व अन्य प्रतिदिन करीब 25 किलोमीटर पैदल यात्रा (Travel) कर रहे हैं।
शनिवार रात यात्रा का पड़ाव हरमाड़ा में रहा। रोजाना रात्रि पड़ाव के दौरान यात्री कीर्तन कर रहे हैं। भक्तों के साथ बाबा का रथ भी यात्रा में शामिल है। मार्ग में जगह-जगह विभिन्न संस्थाएं और आमजन शीश के दानी का पूजन कर यात्रियों (Tourist) का स्वागत कर रहे हैं। ©सुमित सारस्वत
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August 23, 2019
यहां भगवान कृष्ण को 21 तोपों से देते हैं सलामी, 400 साल से चली आ रही अनूठी परंपरा - Amazing Temple of Lord Krishna
श्रीनाथजी भगवान श्रीकृष्ण के अवतार हैं, जो सात साल के बालक के अवतार में यहां विराजमान हैं। श्रीनाथ जी का यह मंदिर लेक सिटी उदयपुर सेे करीब 50 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। श्रीनाथद्वारा में भगवान कृष्ण के जन्म का स्वागत एक अनोखे ढंग से किया जाता है। यहां जन्माष्टमी पर भक्त 21 तोपों की सलामी देकर अपने ईश्वर का जन्मोत्सव मनाते हैं।
वीडियो में देखें- कैसे देते हैं तोपों से सलामी
कृष्ण जन्माष्टमी मनाने की यह परंपरा यहां सालों से इसी तरह चली आ रही है। यहां 400 साल पुरानी तोपों से भगवान को 21 सलामी दी जाती है। इन तोपों से गोलों को उसी परम्परा और विधि से दागा जाता है जैसा सालों पहले दागा जाता था। इन तोपों से गोले भगवान श्रीनाथ जी के गार्ड ही दागते हैं।
वीडियो में देखें- बाल कृष्ण की नटखट लीलाएं
श्रीनाथजी मंदिर में भगवान श्री कृष्ण की काले रंग की संगमरमर की मूर्ति है। इस मूर्ति को केवल एक ही पत्थर से बनाया गया है। इस मंदिर में भगवान श्री कृष्ण गोवर्धन पर्वत को अपने एक हाथ पर उठाए दिखाई देते हैं और दूसरे हाथ से भक्तों को आशीर्वाद देते हुए नजर आते हैं।
वीडियो में देखें- कैसे होता है कृष्ण का अभिषेक
माना जाता है कि मेवाड़ के राजा इस मंदिर में मौजूद मूर्तियों को औरंगजेब से बचाकर गोवर्धन की पहाड़ियों से यहां लाए थे। ये मंदिर बारहवीं शताब्दी में बनाया गया था। जब औरंगजेब श्रीनाथ जी की मूर्ति को खंडित करने मंदिर में आया तो यहां पहुंचते ही अंधा हो गया था। तब उसने अपनी दाढ़ी से मंदिर की सीढ़ियां साफ करते हुए श्रीनाथ जी से विनती की और ठीक हो गया। उसके बाद औरंगजेब ने एक बेशकीमती हीरा मंदिर को भेंट किया था जिसे हम आज श्रीनाथ जी के दाढ़ी में लगा देखते हैं। अगर आपने नाथद्वारा के श्रीजी बाबा का दर्शन नहीं किया है तो जल्द ही कार्यक्रम बनाइए और ठाकुरजी का दिव्य दर्शन कर आइए। -सुमित सारस्वत, मो.09462737273
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June 14, 2019
मित्रता की मिसाल है कृष्ण-सुदामा | Bhagwat Katha in Ramdwara Day 7
संत ने कहा कि भागवत सभी वेदों का सार है। भागवत श्रवण से मनुष्य के विचार शुभ होते हैं। सकारात्मक विचारों से ही जीवन सुखमय होता है। उन्होंने नशामुक्ति का संदेश देते हुए कहा कि नशा नाश का कारण है। भागवत कथा औषधि के समान है। जो सभी पापों का नाश करती है। कथा में सिरोही से पधारे संत मनसुख रामस्नेही ने भी विचार रखे। सिमरन ने श्रीकृष्ण, काव्या ने रुक्मणि व रमेशचंद्र ने सुदामा का रूप धरकर प्रसंग का सजीव मंचन किया। गायक विष्णु चतुर्वेदी व गोपाल चतुर्वेदी ने भजनों की प्रस्तुति दी। एंकर सुमित सारस्वत ने मंच संचालन किया। आयोजक सीता देवी, अजय अग्रवाल, प्रेम जिंदल, रामद्वारा ट्रस्ट के रामप्रसाद मित्तल, राजेंद्र गर्ग, शिव रायपुरिया, मांगीलाल कंदोई ने महाराज का स्वागत कर आशीर्वाद लिया। कथा में निधि, सीमा, मोनिका, मनीषा, राधा चतुर्वेदी, अंजू गर्ग, आशा गोयल, निखिल जिंदल, सुनील जिंदल, रमेश चौहान सहित बड़ी संख्या में भक्तों ने धर्मलाभ लिया। -सुमित सारस्वत, मो.09462737273
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June 13, 2019
जीवात्मा और परमात्मा का मिलन ही रास | Bhagwat Katha in Ramdwara Day 6
ब्यावर रामद्वारा में आयोजित भागवत कथा में गुरुवार को कृष्ण-रुक्मणि विवाह उत्सव मनाया गया। संत गोपालराम महाराज ने कहा कि जीवात्मा और परमात्मा का मिलन ही रास है। ठाकुरजी सर्वत्र हैं। इन्हें कण-कण में महसूस कीजिए।
वीडियो देखने के लिए यहां क्लिक करें
June 12, 2019
बेटियों से दुराचार चिंताजनक | Bhagwat Katha in Ramdwara Day 5
कथा प्रसंग सुनाते हुए
कहा कि जो आनंद दे वही नंद और जो यश दे वही यशोदा है। कृष्ण की बाल लीलाओं
के साथ गोवर्धन लीला का गुणानुवाद किया गया। विष्णु चतुर्वेदी ने बिरज की
गलियन में नाचे जोगी मतवाला.., आज म्हारा कानूड़ा ने कई हो ग्यो.., सांवरिया
थारा नाम हजार.. जैसे भजनों की प्रस्तुति दी तो भक्त झूम उठे। एंकर सुमित सारस्वत ने मंच संचालन
किया। रामद्वारा महिला मंडल, रामअवतार अग्रवाल, गोपाल
मित्तल, अशोक अग्रवाल, रुद्र झंवर, गोपाल चतुर्वेदी ने महाराज का स्वागत कर
आशीर्वाद लिया। कथा में आयोजक सीता देवी, अजय, ललित, रमेश, सत्यनारायण,
विष्णु, रानी, मोनिका, सीमा, निधि, प्रेम जिंदल, निखिल जिंदल, अनिल खींचा,
अमित बंसल, रामप्रसाद मित्तल, ओमप्रकाश दगदी, रामलाल लालनेचा, धर्मीचंद शर्मा, अंजू चतुर्वेदी, अंजू गर्ग, राधा चतुर्वेदी, प्रियंका, कोमल सहित बड़ी संख्या में भक्तों ने धर्मलाभ लिया। गुरुवार को
कृष्ण-रुक्मणि विवाह उत्सव मनाया जाएगा। -सुमित सारस्वत, मो.09462737273
June 11, 2019
सोने की चिड़िया नहीं, अब भारत सोने का टाइगर है | Bhagwat Katha in Ramdwara Day 4
- रामद्वारा में हुआ कृष्ण जन्म
- बधाई गीतों पर झूमे भक्त
संत ने कहा कि पहले अहिंसा हमारा परम धर्म था। हम शांतिप्रिय थे। अब भारत अहिंसा वाला देश नहीं रहा है। अब तो अगर कोई आतंकी हिंसा फैलाएगा तो हम सर्जिकल स्ट्राइक कर दुश्मन को घर में घुसकर मारेंगे। महाराज ने संदेश दिया कि किसी भी तरह का अपराध नहीं करें। जीवन को सदकार्यों में लगाएं।
चतुर्थ दिवस कथा में वामन अवतार, राम अवतार व कृष्ण जन्म प्रसंग सुनाया गया। इस मौके पर धूमधाम से नंद उत्सव मनाया गया। भक्तों को बधाईयां बांटी गई। विष्णु चतुर्वेदी ने चारों ललवा प्रगट भये आज, अवध में लडुआ बंटे.., यशोदा के हुयो देखो लाल.. जैसे बधाई गीतों की प्रस्तुति दी तो भक्त झूम उठे। गर्व सोलंकी ने बालकृष्ण, रमेशचंद्र अग्रवाल ने वासुदेव, मनीष अग्रवाल ने नंदबाबा व सीमा अग्रवाल ने यशोदा का रूप धरकर पौराणिक प्रसंग को साकार किया। एंकर सुमित सारस्वत ने मंच संचालन किया।
कथा में सुनील सिंहल, राजेश मुरारका, अमित बंसल, अनुपम रुणीवाल, सुनील जिंदल, जेपी शर्मा, निखिल जिंदल, राजेश रांका ने शॉल ओढ़ाकर संत का स्वागत किया। कथा में अजय अग्रवाल, सीता देवी, रानी अग्रवाल, मनीषा अग्रवाल, सुनीता सिंहल, अंजू गर्ग, रेखा शर्मा, नीलम बंसल, निधि मित्तल, मोनिका गुप्ता, प्रियंका, प्रेम जिंदल, रामप्रसाद मित्तल, ओमप्रकाश दगदी, धर्मीचंद शर्मा, रमेश चौहान सहित बड़ी संख्या में श्रोताओं ने भाग लिया। बुधवार को माखन चोरी, छप्पन भोग व गोवर्धन लीला प्रसंग का गुणानुवाद होगा। -सुमित सारस्वत, मो.09462737273
वीडियो देखें : भोले जी चले दूल्हा बन के
June 10, 2019
राजनीति में धर्म का होना श्रेष्ठ | Bhagwat Katha in Ramdwara Day 3
संत गोपालराम रामस्नेही ने कहा कि राजनीति में धर्म का होना श्रेष्ठ है। इससे राष्ट्र का उत्थान होगा। खुशी है कि वर्तमान संसद में कई संत-महात्मा पहुंचे हैं। वे ब्यावर रामद्वारा में आयोजित संगीतमय श्रीमद भागवत कथा के तीसरे दिन प्रवचन दे रहे थे।
संत ने कहा कि राजनीति में धर्म से जुड़े संत-महात्माओं के आने से राष्ट्र का शुभ होगा। मूल भारत का गौरव पुन: स्थापित हो सकेगा। उन्होंने भक्त चरित्र व नृसिंह अवतार कथा सुनाते हुए कहा कि भक्ति में शक्ति है। भाव से पुकारो तो भगवान अवश्य आते हैं। भक्त प्रहलाद, मीरा, अहिल्या प्रमाण हैं। रक्षित अग्रवाल ने नृसिंह व दक्ष गुप्ता ने प्रहलाद का रुप धरकर सजीव मंचन किया।
कथा में आयोजक अजय अग्रवाल, रमेशचंद्र अग्रवाल, अशोक गुप्ता, महेश मित्तल, मनीष अग्रवाल, प्रेम जिंदल, सुनील जिंदल, निखिल जिंदल, विष्णु चतुर्वेदी, रमेश चौहान, सीता देवी, राधा चतुर्वेदी, पुष्पा डाणी, रानी अग्रवाल, मनीषा अग्रवाल, निधि मित्तल, सीमा अग्रवाल, मोनिका गुप्ता, गर्विता, सिमरन, काव्या सहित बड़ी संख्या में भक्तों ने धर्मलाभ लिया। मीडिया प्रभारी सुमित सारस्वत ने बताया कि मंगलवार को कथा में वामन अवतार, मत्स्य अवतार, राम अवतार व कृष्ण जन्म प्रसंग का गुणानुवाद होगा। इस मौके पर धूमधाम से नंदोत्सव मनाया जाएगा।
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बेटों में बंट गए माता-पिता
संत ने सभ्य समाज में खुले वृद्धाश्रमों पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि संस्कारों वाले देश हिंदुस्तान में वृद्धाश्रम खुलना बेहद शर्म की बात है। घरों में भी माता-पिता बेटों में बंट गए हैं। उन्हें 15 दिन बड़ा बेटा और 15 दिन छोटा बेटा रखता है। जिस माह 31 तारीख आती है माता-पिता को उपवास रखना पड़ता है। -सुमित सारस्वत, मो.09462737273
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June 9, 2019
समाज के लिए ठीक नहीं प्रेम विवाह | Bhagwat Katha in Ramdwara Day 2
संत ने कहा कि महात्मा आत्मा को परमात्मा से मिलवाने का कार्य करते हैं। मन को परमात्मा के चरणों मे लगाने के लिए गुरु मंत्र चाहिए। गुरु का मंत्र छोटा होता है लेकिन बड़ा ताकतवर होता है। भगवान के गुण गाने से परमात्मा की प्राप्ति होती है। महाराज ने कहा कि उन लोगों से बचना चाहिए जो सनातन धर्म के खिलाफ दुष्प्रचार करते हैं। सनातन धर्म श्रेष्ठ धर्म है जो मर्यादा और संस्कार सिखाता है।
संत ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को चार प्रकार की सेवा अवश्य करनी चाहिए। पहली देह सेवा, दूसरी देश सेवा, तीसरी देव सेवा और चौथी दिल सेवा। कथा के बीच पीनी है तो प्याली हरि नाम वाली पी.., वृंदावन जाने को जी चाहता है.. जैसे मधुर भजनों पर श्रोता झूम उठे।
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June 8, 2019
परमात्मा का साक्षात स्वरूप है भागवत | Bhagwat Katha in Ramdwara Day 1
संत ने कहा कि काशी ज्ञान, अयोध्या त्याग, नेमिषारण्य तप और वृंदावन प्रेम की भूमि है। उन्होंने मिलता है सच्चा सुख केवल.. प्रार्थना से समझाया कि सुख सर्वत्र व्याप्त है मगर सच्चा सुख केवल परमात्मा की शरण में ही मिलता है। परमात्मा के पास रहने वाला व्यक्ति हर वक्त प्रसन्न रहता है। यहीं उसे सुख, चैन और शांति मिलती है। परमात्मा जिसे अपना लेता है उसे कभी नहीं छोड़ता। कथा प्रारंभ होने से पूर्व आयोजक सीता देवी, अजय अग्रवाल, प्रेम जिंदल, रानी अग्रवाल, निखिल जिंदल, निधि मित्तल, रमेश सिंहल ने महाराज का स्वागत कर आशीर्वाद लिया। मंच संचालन सुमित सारस्वत ने किया।
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March 24, 2019
खेलन सखियन सो फाग मेरो लाला जावे सासरिए | Fag Bhajan
श्री विहार में धूमधाम से मनाया फाग उत्सव
आयोजक राकेश कीर्ति शर्मा ने बताया कि गायक गोपाल वर्मा ने भगवान गणेश व हनुमान वंदना के साथ कार्यक्रम की शुरूआत की। इसके बाद सांवरिया आपा होली तो खेलां जी.., आज बिरज में होली रे रसिया.., रंग मत डाले रे सांवरिया.., रोज-रोज नहीं आना यह फागुण.., खेलन सखियन सो फाग मेरो लाला जावे सासरिए.. जैसे होली भजनों की सुमधुर प्रस्तुति देकर फाग की मस्ती लुटाई। ढोल और चंग की थाप के साथ घूमर और धमाल की धुनों पर भक्त झूम उठे। करीब चार घंटे तक लगातार रंग-बिरंगे फूल बरसते रहे। कार्यक्रम में पहुंचा हर भक्त अपनी उम्र और ओहदे को भूलकर झूमता हुआ फाग के रंग में रंगा नजर आया।
अतिथि के रूप में अयोध्या से आए संत उमाशंकर महाराज, नवनीत हेड़ा, एन.के. मिश्रा, एस.के. सोनी, सुमित सारस्वत, वंदना शर्मा, अंजू हेड़ा, नीरु सिंहल, अनुराग खुशबू जैन, के.के. जैन, सुनील गुप्ता, पंकज शर्मा, बृजवल्लभ पाराशर, मनोरंजन कुमार, श्याम खंडेलवाल, मनीषा गर्ग, कुसुम मालू, वर्षा तापड़िया, आशा मूंदड़ा, रेणु जागेटिया, ताशु अग्रवाल, उर्मिला भाटी, श्याम शर्मा, मुकेश दाधीच, मोनू अरोड़ा, हेमंत शर्मा, सतीश गर्ग, संजय घीया, विजय तंवर, अनिरुद्ध शर्मा, मुकेश टांक, दिनेश गोयल, मनीष जैन ने शिरकत की। रवि शर्मा, रजनीश माहेश्वरी, नवनीत पाराशर, नरसिंह तंवर, संतोष गुप्ता ने फूलों से ठाकुरजी का आकर्षक दरबार सजाया। आरती के बाद सभी को विशेष भेंट स्वरूप प्रभु का नजराना दिया गया।
-सुमित सारस्वत, मो.09462737273
September 29, 2018
कालिया नाग का काल बने कृष्ण | Kaliya Mardan
राजस्थान की धार्मिक नगरी ब्यावर के सुभाष उद्यान में आयोजित रसमयी रासलीला में कालिया नाग मर्दन की लीला का मंचन किया गया। स्वामी सीताराम शर्मा ने कहा कि श्रीकृष्ण की हर लीला, हर कर्म अपने आप में कोई न कोई संदेश छुपाए है। अगर आपने संदेश को जान लिया तो समझो श्रीकृष्ण को जान लिया। ऐसी ही एक लीला थी कालिया मर्दन की। कालिया नाग के फन पर सवार होकर नृत्य करने की।
उन्होंने कहा कि कालिया नाग मानो अपने भीतर मौजूद अहंकार हो। हमारा अहंकार निरंतर फुफकार मार रहा है। हमारे आसपास कोई आ नहीं सकता। लेकिन अहंकार के कालिया नाग को मिटना पड़ता है। कृष्ण इस अहंकार के फन पर खड़ा है। जीवन यमुना से वह इस कालिया नाग को भगा देता है। जीवनरूपी गोकुल के द्वेष मत्सर के बड़वानल को श्रीकृष्ण निगल जाता है। वह दंभ, पाप के राक्षसों को नष्ट कर देता है।
रासलीला में कृष्ण ने गोपियों के साथ महारास व मयूर नृत्य भी किया। संयोजक रामगोपाल अग्रवाल, मुन्नालाल प्रजापति, सुमित सारस्वत, शंकरलाल प्रजापति ने ठाकुरजी का पूजन किया।
रासलीला में गोपाल चतुर्वेदी, सुगनचंद दगदी, देवाराम कुमावत, विष्णुकांत अवधिया, सुनील सिंहल, मिथलेश अग्रवाल, साधना सारस्वत, सुमित्रा प्रजापति, सुनीता कुमावत, जसोदा अग्रवाल, हर्षिता गोयल, लक्ष्मी शर्मा, पार्वती गोयल, विजयलक्ष्मी अग्रवाल, नीता कुमावत, पूजा प्रजापति, श्वेता बंसल, कल्याणीअवधिया, प्रमिला शर्मा, भारती कुमावत, पिंकी अग्रवाल, पुष्पा अग्रवाल, ज्योति अग्रवाल, माधुरी बंसल, रवि शर्मा, गिरधर पाराशर, चंद्रशेखर, गोविंद, भगवान सहित बड़ी संख्या में रसिक भक्त शामिल हुए। -सुमित सारस्वत, मो.09462737273
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