Thinker, Writer, Anchor

March 4, 2026

अब कभी नहीं होगा बादशाह मेला !, ब्यावर में 'बादशाह' की मौत, अग्रवाल समाज में बादशाह की ओख - Badshah Died

✍🏻सुमित सारस्वत
बीते दो साल से कपड़ा फाड़ होली में तब्दील हुआ ब्यावर का बादशाह मेला आयोजन अब शायद कभी नहीं होगा. बुधवार को मेले के दौरान बादशाह की भूमिका निभा रहे चंद्रशेखर
 अग्रवाल की मौत हो गई. हजारों लोगों को खर्ची रूपी गुलाल बांटते हुए बादशाह खुद की जिंदगी लुटा गए. यह ब्यावर (Beawar)के लिए बेहद दुखद घटना है. इस निधन के कारण अग्रवाल समाज में बादशाह मेले की ओख हो गई है. सनातन हिन्दू धर्म में ऐसी परंपरा रही है कि मौत वाले दिन किसी तरह की कोई खुशियां नहीं मनाई जाती. ऐसे में अब अग्रवाल समाज (Agarwal Samaj) संभवत: बादशाह की मौत का शोक मनाते हुए भविष्य में बादशाह मेले का आयोजन नहीं करेगा. मेले में हुए हादसे के बाद लोग चर्चा कर रहे थे कि मुगल काल में एक बार टोडरमल अग्रवाल को बादशाहत मिलने की याद में बादशाह की सवारी निकाली जाने लगी थी. अब इस साल बादशाह की मौत होने पर संभवत: यह परंपरा रूक जाएगी.


यह भी पढ़ें- सनातन राष्ट्र का शंखनाद

पहले भी झुलस गया था बादशाह
बादशाह मेले में ऐसे अपशकुन पहले भी हुए हैं. वर्ष 2011 में भी बादशाह मेले के दौरान बड़ा हादसा हुआ था. उपखंड कार्यालय में गुलाल युद्ध के दौरान बादशाह के ट्रक में भीषण आग लगने से बादशाह बने श्याम गर्ग झुलस गए थे. गंभीर अवस्था में बादशाह को अस्पताल में भर्ती करवाया गया था. इस हादसे के बाद श्याम को स्वस्थ होने में लंबा समय लगा. उनके शरीर पर झुलसे जख्म के निशान आज भी हैं.

यह भी पढ़ें- सरकार, कब करोगे अमृतकाैर का उपचार ?

अस्पताल में नहीं मिला बेहतर उपचार
बादशाह बने चंद्रशेखर का स्वास्थ्य बिगड़ने पर उन्हें उपचार के लिए एम्बुलेंस से राजकीय अमृतकौर अस्पताल (Amrit Kaur Hospital) पहुंचाया गया लेकिन वहां कथित तौर पर उचित उपचार नहीं मिला. एक वायरल वीडियो में लोग इमरजेंसी वार्ड में अपने स्तर पर ही प्राथमिक उपचार करते दिख रहे हैं. संभवत: उचित समय पर चिकित्सकीय उपचार के अभाव में चंद्रशेखर की मौत हो गई. इस घटना के बाद वायरल वीडियो देखकर लोग अमृतकौर अस्पताल को मौत का अस्पताल बताते हुए चिकित्सा व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं. सवाल यह भी उठ रहे हैं कि बादशाह मेला आयोजन को लेकर प्रशासनिक स्तर पर बैठकें और व्यवस्थाएं हुई तो आकस्मिक दुर्घटना की आशंका मानकर अस्पताल में चिकित्सकों की इमरजेंसी ड्यूटी क्यों नहीं लगाई गई? इस मौत का जिम्मेदार कौन? ©सुमित सारस्वत

यह भी पढ़ें- सोशियल मीडिया पर सियासी युद्ध

Share:

0 comments:

Post a Comment

Featured Post

दास्तान-ए-आशिकी, जुबान-ए-इश्क | Famous Love Story

ग्लोबलाइजेशन के इस युग ने हमारी जेनरेशन को वैलेंटाइंस डे का तोहफा दिया है। यह दिन प्यार के नाम होता है। इतिहास के पन्ने पलटने पर आप पाएंगे...

Amazon Big Offer

Advt

Blog Archive

Copyright

इस ब्लॉग में दिये किसी भी लेख या उसके अंश और चित्र को बिना अनुमति के किसी भी अन्य वेबसाइट या समाचार-पत्र, पत्रिका में प्रकाशित नहीं किया जा सकता। अनुमति के लिये केवल मेल पर सम्पर्क करें: sumit.saraswat09@gmail.com

Pageviews

Labels

Recent Posts

Unordered List

Theme Support