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February 14, 2019

दास्तान-ए-आशिकी, जुबान-ए-इश्क | Famous Love Story

ग्लोबलाइजेशन के इस युग ने हमारी जेनरेशन को वैलेंटाइंस डे का तोहफा दिया है। यह दिन प्यार के नाम होता है। इतिहास के पन्ने पलटने पर आप पाएंगे कि प्यार को सोशली सेलिब्रेट करने के लिए पहले तो ऐसा कोई भी दिन मुकर्रर नहीं किया गया था। लेकिन फिर भी ऐसी क्या खासियत थी तब के प्यार में कि उसकी कहानियां इतना वक्त गुजर जाने के बाद भी इतिहास के पन्नों में अंकित हैं। हमारी जेनरेशन की ऐसी कोई लव स्टोरी क्यों नहीं, जिसका दम आने वाले पीढ़ियां भर सकेंगी। समझने की कोशिश करते हैं कुछ ऐसी ऐतिहासिक प्रेम कहानियों के जरिए जो आज भी जिंदा है।


राधा-कृष्ण का अटूट प्रेम

वैसे तो हमारे देश में इन दोनों को भगवान माना जाता है, घर-घर इनकी पूजा की जाती है, लेकिन आपको बताएं कि इन दोनों के प्रेम के सभी साक्ष्य आज भी मौजूद हैं मथुर और वृंदावन में। आज भी जब आप यहां की गलियों में घूमेंगे तो आप तक इनके प्यार की महक पहुंचेगी ही। आपको बताएं कि राधा कृष्ण की पत्नी नहीं बन पाईं, रूक्मिणी उनकी पत्नी थी, लेकिन इनके प्रेम की गहराई का पता इसी बात से चलता है कि आज भी कृष्ण का नाम राधा के साथ ही लिया जाता है, रूक्मिणी के नहीं।



लैला-मजनूं की मोहब्बत की दास्तान
इनकी कहानी है सातवीं शताब्दी की। कैस, जिसे की बाद में मजनूं नाम दिया गया, नॉर्दन अरब का रहने वाला थ। कैस को एक बहुत ही अमीर घराने की लड़की लैला से प्यार हो जाता है लेकिन अमीरी गरीबी की ये दीवार जो कि न जाने कितने जमाने से ही प्रेमियों को अलग करने का काम करती रही है, इन दोनों के प्यार को परवाने नहीं चढ़ने देना चाहती थी। लैला की शादी कहीं और कर दी गई। कुछ वक्त बाद उसकी मौत हो गई। कैस को जब इस बात का पता चला तो उसने भी लैला की कब्र के पास आकर जान दे दी। तभी से कैस को मजनूं कहा जाने लगा क्योंकि वो लैला के प्यार में दीवाना हो चुका था। हालांकि इस लव स्टोरी का एंड बहुत ही ट्रैजिक था लेकिन तब की और आज की सिचुएशंस में बहुत फर्क है। प्रेजेंट सिनरियों में उनकी लव स्टोरी का इतना ट्रैजिक एंड होना पॉसिबल नहीं था।


मीराबाई का सात्विक प्रेम
मेरो तो गिरधर गोपाल, दूजो ना कोई.. आपने कई बार घर में बड़े बुजुर्गों को यह भजन गाते हुए सुना होग। इसे मीराबाई गाया करती थीं। आपने वन साइडेड लव के बारे में तो सुना ही होगा, हो सकता है महसूस भी किया हो। मीराबाई का प्रेम भी कुछ ऐसा ही था। उन्हें पता था कि जिसे वो प्यार करती हैं वो उन्हें कभी मिल नहीं सकते लेकिन उनके प्यार पर इस बात का कोई फर्क नहीं पड़ा और वो जिंदगी भर अपने गिरधर गोपाल को निश्चल मन से प्यार करती रहीं।




शाहजहां-मुमताज महल की अमर प्रेम कहानी
इनके प्यार की जीती जागती निशानी तो आज भी दुनियाभर में मशहूर है..ताजमहल। जो भी इसे देखने जाता है, इसकी खूबसूरती को निहारता ही रह जाता है। शाहजहां ने अपनी बेगम मुमताज महल जिन्हें की वो बेइतंहा मोहब्बत करने थे उसकी याद में प्यार की इस इमारत को बनवाया था। मुमताज महल को अर्जूमंद बानो के नाम से जाना जाता था। उन्हें मुमताज महल नाम बख्शा था खुद शाहजहां ने। बेगम मुमताज से शाहजहां को इतना प्यार था कि वो उन्हें अपने साथ हर जगह ले जाते थे। शाहजहां को अपनी इस खास बेगम से इतनी मोहब्बत थी, वो उन पर इतना भरोसा करते थे कि उन्होंने अपनी मोहर 'मोहर उजाह' जिसे की कोई भी शहंजाह बेहद संभालकर रखता था, दे दी थी।

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January 8, 2019

संतों के अागमन पर बिछाए पलक-पावड़े | Jain Sant in Beawar


भगवान संभवनाथ की अंजनशलाका प्रतिष्ठा महोत्सव में निश्रा प्रदान करने हेतु पाली से विहार कर मंगलवार सुबह ब्यावर पधारे संत-साध्वियों का श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ की ओर से स्वागत किया गया। नवयुवक मंडल व कुशल महिला मंडल के सदस्यों ने अगुवानी कर आशीर्वाद लिया।
 
 
संघ मंत्री महेंद्र छाजेड़ ने बताया कि खरतरगच्छ के पूज्य संत मोहनलालजी महाराज के समुदायवर्ती खरतरगच्छ विभूषण व्याख्यान वाचस्पति पूज्य जयानंदमुनिजी म.सा. के सुशिष्य गणाधीश पंन्यास प्रवर विनयकुशलमुनि गणिवर्यजी म.सा. आदि ठाणा 4, गणाधीश पंन्यास प्रवर विनयकुशलमुनि गणिवर्यजी म.सा. की आज्ञानुवर्तिनी प.पू. कुशलश्रीजी म.सा. की सुशिष्या पूज्या जयशिशु विरतीयशा श्रीजी म.सा. आदि ठाणा 2 का शहर में प्रवेश हुआ। खुशी के इस मौके पर अजमेरी गेट पर गुरुदेव एवं गुरुवर्याश्री की अगुवानी कर स्वागत अभिनंदन किया गया। यहां से सभी पीपलिया बाजार स्थित ज्ञान आराधना भवन पहुंचे।
 
 
मार्ग में त्रिशला नंदन वीर की, जय बोलो महावीर की.., सिर जावे तो जावे मेरा जैन धर्म ना जावे.., चंदन की दो चौकियां पूजन के दो हाथ, केसर भरयो बाटको पूजो नेम कुमार.. आदि जयकारों के बीच वातावरण भक्तिमय हो गया। जगह-जगह पर गवली बनाकर महाराजश्री का स्वागत किया गया। स्वागत के दौरान संघ अध्यक्ष सतीश मेड़तवाल, नवयुवक मंडल अध्यक्ष राकेश डोसी, महिला मंडल अध्यक्ष निशा चौपड़ा, सह संयोजक राकेश भंडारी, चेतन हालाखण्डी, सुषमा मेड़तवाल, सुमन भंडारी, सविता बरड़िया, प्रेमचंद कांकरिया, ज्ञानचंद भंडारी, बिरदीचंद चौपड़ा, वैभव मेड़तवाल, राजकुमार बरड़िया, राजू चौपड़ा, नितिन तातेड़, अभय चौपड़ा, गुलशन बैंगानी, अशोक बरड़िया, अनिल डाकलिया, सज्जनराज डोसी सहित कई समाज सदस्य मौजूद थे। -सुमित सारस्वत, मीडिया प्रभारी, मो.9462737273
 
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संभवनाथ भगवान का भव्य अंजनशलाका प्रतिष्ठा महोत्सव ब्यावर में 12 जनवरी से

  • देशभर से पहुंचेंगे हजारों श्रावक-श्राविकाएं

  • संतों-साध्वियों के सानिध्य में होगा भव्य आयोजन

नए साल में धर्मधरा ब्यावर एक नए इतिहास की साक्षी बनेगी। यहां असंभव को संभव करने वाले श्री संभवनाथ भगवान का भव्य अंजनशलाका प्रतिष्ठा महोत्सव होगा। जिसमें देशभर से आए हजारों श्रावक-श्राविकाएं भाग लेंगे। श्री जैन श्वेताम्बर खतरगच्छ संघ के सानिध्य में होने वाले इस आयोजन को लेकर बिजयनगर रोड स्थित जैन दादाबाड़ी में भव्य तैयारियां की जा रही है।

 
संयोजक सुरेश कांकरिया ने बताया कि गणाधीश पन्यास प्रवर विनय कुशलमुनि म.सा. की शुभनिश्रा में 19 जनवरी को भव्य अंजनशलाका प्रतिष्ठा होगी। नौ दिवसीय महोत्सव के तहत कई धार्मिक कार्यक्रम होंगे। महोत्सव की शुरूआत 12 जनवरी को प्रातः कलश स्थापना व ज्वारारोपण से होगी। प्रतिदिन होने वाली भक्ति संध्या में देश के विख्यात जैन भजन गायक प्रस्तुति देंगे। महोत्सव के लिए सुमित सारस्वत को मीडिया प्रभारी नियुक्त किया गया है।
अंजनशलाका प्रतिष्ठा महोत्सव की चर्चा करते समाज पदाधिकारी।


इस दौरान संघ अध्यक्ष सतीश मेड़तवाल, मंत्री महेन्द्र छाजेड़, कोषाध्यक्ष प्रेमचंद कांकरिया, सह संयोजक चेतन हालाखण्डी, बलवंत रांका, बिरदीचंद चौपड़ा, राकेश भण्डारी, राकेश डोसी, मितेश चौपड़ा, वीरेंद्र लूणिया, अरिहंत कांकरिया, चंद्रकुमार श्रीश्रीमाल, गुलशन बैंगानी, राजेंद्र चौपड़ा, नितिन तातेड़, विजेश कांकरिया, मदनलाल कोठारी, महेश बरड़िया, मांगीलाल मेहता, लाभचंद भंसाली, शांतिलाल तातेड़, कांतिलाल डोसी, अभय चौपड़ा, माणक चौपड़ा, अजय चौपड़ा, पूनमचंद खटोड़, दिनेश बुरड़ सहित अन्य सदस्य व समाजबंधु मौजूद थे।
देखें वीडियो :  घड़ियां शुभ है आई

व्यवस्थाओं के लिए बनाई समितियां
भोजन समिति, प्रचार-प्रसार समिति, लाइट, टेंट, माइक व्यवस्था, वरघोडा शोभायात्रा समिति, पूछताछ कार्यालय, आवास व्यवस्था सहित विभिन्न समितियों का गठन कर जिम्मेदारियां सौंपी गई। 

देशभर में पहुंच रहा आमंत्रण
महोत्सव में देशभर से आए समाज सदस्य शामिल होंगे। इसके लिए ब्यावर संघ की ओर से सभी को निमंत्रण पत्र के जरिए आमंत्रण भेजा जा रहा है। साथ ही एक आमंत्रण वीडियो भी जारी किया गया है। शहर में पोस्टर-बैनर व होर्डिंग भी लगवाए गए हैं।

मालवा मेवाड़ ज्योति पधारीं ब्यावर
भव्य महोत्सव में निश्रा प्रदान करने के लिए देशभर से संत-साध्वी ब्यावर पधारेंगे। सोमवार को पूज्य मालवा मेवाड़ ज्योति गुणरंजनाश्रीजी म.सा. के नगर आगमन पर अभिनंदन किया गया। कुशल महिला मंडल व नवयुवक मंडल के साथ संघ सदस्यों ने पलक-पावड़े बिछाकर साध्वीश्री का स्वागत किया। कई संत-साध्वी विहार करते हुए ब्यावर की ओर अग्रसर हैं। -सुमित सारस्वत, मीडिया प्रभारी, मो.9462737273


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November 22, 2018

राहुल गांधी 26 को आएंगे अजमेर, दरगाह व ब्रह्मा मंदिर में देंगे कौमी एकता संदेश

राजस्थान में हो रहे विधानसभा चुनाव के बीच कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी आगामी 26 नवंबर को अजमेर आएंगे। वे यहां ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह पर मखमली चादर चढ़ाकर कांग्रेस के जीत की दुआ करेंगे। वे पुष्कर में स्थित दुनिया के एकमात्र जगतपिता ब्रह्मा मंदिर में भी दर्शन करेंगे।

राहुल गांधी अजमेर दौरे के दौरान देश में कौमी एकता का संदेश देने की कोशिश करेंगे। कांग्रेस अध्यक्ष के दौरे को लेकर लेकर स्थानीय नेताओं ने तैयारियां शुरू कर दी है। युवा नेता राहुल गांधी के आगमन से अजमेर और पुष्कर के कांग्रेस कार्यकर्ताओं में जोश जागा है। माना जा रहा है कि इस दौरे से अजमेर जिले की आठ विधानसभा सीटों पर असर पड़ सकता है।

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November 11, 2018

पहली बार बहू ने सास की अर्थी को दिया कंधा | Emotional Story of Relationship

  • पोतियों ने दादी की चिता को दी मुखाग्नि
  • समाज में कायम की नई मिसाल

पुरातन काल से चली आ रही सामाजिक रूढ़ियों और मिथक को तोड़ते हुए अपनी सास की आखिरी ख्वाहिश को पूरा करने के लिए राजस्थान के ब्यावर की एक बहू ने सास की अर्थी को कंधा देकर समाज के लिए नई मिसाल पेश की। मुक्तिधाम में दो पोतियों ने दादी की चिता को मुखाग्नि देकर अंतिम संस्कार की रस्में निभाई। संभवत: यह देश का पहला उदाहरण है जब मुक्तिधाम में महिलाओं ने महिला का पूर्ण अंतिम संस्कार किया है।


जानकारी के मुताबिक ब्यावर में रहने वाली राजपूत समाज की 70 वर्षीय बुजुर्ग महिला नीलम भाटी का शनिवार देर रात निधन हो गया। परिवार में कोई पुरुष नहीं होने पर बहू यल्पना ने सास की अर्थी को कंधा दिया। मां को देखकर प्रांजल व प्रियांशी ने भी अपनी दादी के अंतिम संस्कार की रस्में निभाई। पोतियों ने दादी की अर्थी को कंधा और मुक्तिधाम में चिता को मुखाग्नि भी दी। सास को कंधा देने वाली बहू यल्पना भाटी का कहना है कि मेरी सास ने मुझे बेटी की तरह रखा। मैंने अपनी मां समान सास की अंतिम इच्छा का सम्मान किया है।


दरअसल विवाह के कुछ समय बाद ही नीलम के पति भैरूसिंह भाटी का निधन हो गया था। इकलौते पुत्र गजेंद्र सिंह भी 15 साल पहले चल बसे। ऐसे में सास-बहू अपनी दो बेटी-पोतियों के साथ रहती थी। मां-बेटियों के इस कदम ने समाज में सास-बहू के रिश्ते की नई मिसाल कायम की है। -सुमित सारस्वत, सामाजिक चिंतक, मो.09462737273

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संघ के जिला प्रचारक पर जानलेवा हमला, एक साधु की मौत | Attack on RSS Pracharak

सिरोही के आरएसएस कार्यालय में रविवार रात हुए झगड़े में जिला प्रचारक गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। कार्यालय में एक साधु का शव भी मिला है। पुलिस के मुताबिक साधु वेशधारी मृतक के हाथ में चाकू होने और कार्यालय में मिले प्रारंभिक साक्ष्यों के आधार पर ये मामला प्रथम दृष्टया मृतक और जिला प्रचारक के बीच हुए झगड़े की परिणीति माना जा रहा है।

पुलिस अधीक्षक जय यादव ने बताया कि प्रथम दृष्टया यह प्रकरण जिला प्रचारक और साधु के बीच झगड़ा होना प्रतीत हो रहा है। इसमें जिला प्रचारक को गंभीर चोट आई है। साधु मृत पाया गया। साधु के हाथ में चाकू है। उन्होंने बताया कि साधु उत्तर प्रदेश का बताया जा रहा है।

सम्पूर्ण घटनाक्रम कुछ इस तरह रहा कि आज शाम पुलिस को आरएसएस के जिला प्रचारक उत्तम गिरी पर हमला होने की इत्तला मिली। घायल प्रचारक को लहूलुहान हालत में जिला चिकित्सालय पहुंचाया गया। हालत गंभीर होने पर यहां से प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें रेफर कर दिया गया। जिला प्रचारक के शरीर में घावों को देखने के बाद पुलिस संघ कार्यालय पहुंची तो वहां कमरे में एक साधु का शव पड़ा था और हाथ में चाकू था।

साधु का नाम अवधेशानंद बताया जा रहा है। प्रथम दृष्टया ये प्रतीत हो रहा था कि साधु संघ कार्यालय में आया था। इसका जिला प्रचारक से झगड़ा हुआ और उस दौरान ये पूरा हादसा घटित हुआ। घटना की गंभीरता को देखते हुए शांति नगर स्थित संघ कार्यालय में पुलिस जाब्ता तैनात कर दिया गया है। जिला प्रचारक के घायल होने की सूचना पर शहर में पुलिस और प्रशासन दोनों ही अलर्ट हो गए हैं। पुलिस अधीक्षक भी सूचना मिलते ही घटनास्थल पर पहुंच गए। एहतियातन मौके पर पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।

जिला प्रचारक को रेफर करने के बाद घटनास्थल पर संघ के विभाग प्रचारक बाबूलाल और कैलाश जोशी मौके पर पहुंचे। मौके पर ही मौजूद पुलिस अधीक्षक जय यादव ने इनसे संपूर्ण घटनाक्रम पर बात की। इस दौरान यह भी सामने आया कि साधु बाड़मेर में रहते थे और संभवत: वहीं जिला प्रचारक और साधु की मुलाकात हुई होगी। जिला प्रचारक फलौदी से तीन महीने पूर्व ही यहां आए थे। पुलिस अधीक्षक ने चर्चा के बाद इस मामले की पूरी जानकारी और शिनाख्त शीघ्र करने का आश्वासन दिया है।
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October 31, 2018

हम बाजार में या हम में बाजार ? | Market


फैशन के इस दौर में इतने तरह के पहनावे इजाद हो गए हैं कि हम बाजार के लिए एक प्रयोगशाला बनकर रह गए हैं। कपड़े अब सिर्फ पहनावा भर नहीं हैं बल्कि देह को सजाने का सबसे जरूरी माध्यम बन गए हैं। इस बाजार युग में बाजार कुछ भी बेच रहा है, हम कुछ भी खरीद रहे हैं। जब तक दुकानों तक जाने की जहमत थी तब तक तो कुछ गनीमत थी कि हम बाजार में थे पर जब से ऑनलाइन बाजार ने दस्तक दी है बाजार हममें आ गया है। दिन रात हम कुछ न कुछ खरीदने की सोचते हैं और बेतहाशा खरीद भी रहे हैं।
पहले खरीददारी अपनी जरूरतों को ध्यान में रखकर होती थी। अब बाजार तय करता है कि हम क्या पहनें, क्या खाएं, कहां जाएं? इसके लिए उसे 'पहले आओ पहले पाओ' या फिर कुछ डिस्काउंट का लालच भर देना होता है। कुछ ऑनलाइन दुकानें तो रात में खुलती हैं। जब सबके सोने का टाइम होता है। यह वक्त कुछ लोगों के लिए कुछ भी खरीद लेने का सुनहरा अवसर होता है। बाजार ने कुछ भी खरीद लेने की एक ऐसी बीमारी हमारे भीतर पैदा कर दी है जिसका इलाज खोज पाना फिलहाल मुश्किल है।
कई बार डिस्काउंट के चक्कर में ऐसी चीजें भी खरीद रहे हैं जो हमारे काम की है ही नहीं। धीरे धीरे हमारे घर बेकार चीजों के गोदाम बनते जा रहे हैं।
प्राय: सभी युगों में बाजार की अपनी भूमिका रही है। पहले लोग अपनी आवश्यकताएं उपलब्ध अपनी वस्तुओं को किसी अन्य को देकर उससे अपनी जरूरत का सामान लेकर पूरी किया करते थे। फिर मुद्राओं का चलन शुरू हुआ। मुद्रा देकर अपनी जरूरतें पूरी करने लगे। और आज ऑनलाइन शॉपिंग इसका अत्याधुनिक रूप है।

अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए व्यक्ति हर युग में बाजार पर निर्भर रहा है। पर आज का बाजार युग शायद पहले से भिन्न है। हम बाजार पर सिर्फ अपनी आवश्यकताएं पूरी करने तक सीमित नहीं हैं बल्कि बाजार तय करने लगा है कि हम क्या खरीदें, क्या ना खरीदें। एक प्रकार से बाजार ने हमें मानसिक रूप से गुलाम बना दिया है। ज्यादा से ज्यादा उत्पादन और ज्यादा से ज्यादा खपत आज के डवलपमेंट का मूल मंत्र बन गया है।
यह आज के बाजार की माया ही है कि अब वही तय कर रहा है हमें कैसे रहना चाहिए। डिस्काउंट, ऑफर और घर तक फ्री डिलेवरी ने हमारी आदत और खराब कर दी है। धीरे धीरे घर में कुछ अच्छा और स्वादिष्ट खाने-बनाने का चलन खत्म हो गया है। मेहमाननवाजी खत्म होती जा रही है। बाजार कहता है कि आप तो रोज घर का फालतू खाना खाते हैं आज हमारे रेस्टोरेंट में आइये, मेहमानों को भी लाइये स्वादिष्ट खाना सिर्फ यहां मिलता है। वक्त निकालकर अब हम स्वादिष्ट खाने वहीं जाते हैं जहां बाजार हमें बुलाता है। मेहमानवाजी का भी यही एक रास्ता बचा है कि जो मेहमान आएं उन्हें भी रेस्टोरेंट ले चलो। यह एक प्रकार का स्टेटस सिम्बल भी बन गया है कि अगर आप फैमिली के साथ होटल, रेस्टोरेंट, मॉल में ना जाएं तो आप पिछड़े हैं। और इस पिछड़ेपन के दाग से बचने के लिए होटल, रेस्टोरेंट, मॉल में दिनों दिन भीड़ बढ़ती जा रही है। -डॉ.कंवलजीत कौर, लेखिका
 

लेखिका परिचय
डॉ. कंवलजीत कौर दिल्ली यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर और लेखिका हैं। इन्होंने बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से पीएचडी की है। सामाजिक विषयों पर लेख लिखती हैं।

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