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December 23, 2017

प्रभु की बगिया में रामकथा का शुभारंभ

धार्मिक नगरी ब्यावर में शनिवार से संगीतमय श्रीराम कथा का शुभारंभ हुआ। प्रभु की बगिया में शुरू हुई कथा के प्रथम दिन मानस मर्मज्ञ संत उमाशंकर महाराज ने कथा महात्म्य बताया। उन्होंने कहा कि रामकथा जीवन जीने की मर्यादा सिखाती है। राम नाम जपने से सद्गति मिलती है।
कथा प्रारंभ होने से पूर्व सांवरिया सेठ मंदिर से कलश व शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा में 141 महिलाएं सिर पर कलश धारण कर शामिल हुई। श्री पोथीजी को माेहनलाल दगदी अपने सिर पर धारण कर कथास्थल तक पहुंचाया। विजय तंवर व गोपाल वर्मा ने नाम संकीर्तन किया। शोभायात्रा में शामिल महिला व पुरूष श्रद्धालु जयकारे लगा रहे थे। अयोध्या से पधारे कथावाचक सुसज्जित रथ में सवार थे। जुगल राजस्थानी, अंकुर उपाध्याय, बबलू अग्रवाल, लक्ष्मीकांत शर्मा, मृदुला उपाध्याय, वंदना शर्मा, कौशल्या गहलोत, ललिता भाटी, संपति बोहरा, ज्योति अग्रवाल, कंचन तंवर, रमेश शर्मा, बुधराज गहलोत, अरूण गर्ग, शक्तिराज भाटी, जय तंवर, अभय शर्मा, आर.के.गुप्ता, अर्जुन सिंह सहित कई श्रद्धालुओं ने धर्मलाभ लिया। यह कथा 31 दिसंबर तक प्रतिदिन दोपहर 1 बजे से सायं 5 बजे तक होगी। कथा में प्रसंग अनुसार शिव विवाह, श्रीराम जन्मोत्सव, श्रीराम-सीता विवाह, वन गमन, भारत चरित्र, श्रीराम राज्याभिषेक के प्रसंग व उत्सव होंगे। -सुमित सारस्वत, मो.09462737273

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राधाकुंज में प्रकटे कृष्ण तो झूम उठा हर भक्त

राम नाम जाप से करोड़ों जन्मों के पाप मिट जाते हैं। कर्म बंधन से छुटकारा मिलता है। भगवान राम का चरित्र पावन पवित्र है। भगवान ने भक्तों पर कृपा बरसाने के लिए अवतार लिया। पंडित रविशंकर शास्त्री ने ब्यावर में श्री बालाजी व जानकी महिला मंडल की ओर से आयोजित श्रीमद् भागवत कथा में राम अवतार प्रसंग सुनाते हुए यह विचार बताए।

कथावाचक ने कहा कि शरीर और आत्मा का उद्धार करने के लिए गंगा अवतरित हुई। गंगा की निर्मलता बरकरार रहनी चाहिए। तीर्थों पर जाएं तो गंगा जल की पवित्रता का ख्याल रखें। उन्होंने कहा कि प्रभु को भाव से अर्पण करें तो अवश्य स्वीकार करते हैं। प्रभु भाव में डूबे भक्त का हर दुख हर लेते हैं। ठाकुरजी के प्रति श्रद्धा भाव रखें। भगवान से पापों को छुपाएं नहीं।
कथा में पधारे अयोध्या के संत उमाशंकर शास्त्री ने भगवान राम के चरित्र से प्रेरणा लेने का संदेश दिया। मंडल प्रमुख शकुंतला गोयल, राधेलाल गोयल, केदार गर्ग, रमेश शर्मा, चेतन गर्ग ने संतों को माला व पगड़ी पहनाकर एवं शॉल ओढ़ाकर आशीष लिया। मंच संचालन सुमित सारस्वत ने किया। कथा प्रारंभ होने से पूर्व यजमान माणक डाणी, कुसुम डाणी, कांतिलाल डाणी, मधु डाणी, विष्णु गोयल, मंजू गोयल, श्याम हेड़ा, बसंती हेड़ा, सावित्री गोयल, संगीता गोयल, उषा मेहता, शशि अग्रवाल, कंचन तंवर, विजय तंवर, शोभा चौटिया, विष्णुप्रकाश चौटिया, जयपुर से आए सुधीर शर्मा, मदनलाल शर्मा, इंदौर से रतनी देवी शर्मा का दुपट्टा पहनाकर स्वागत किया गया।


कथा में चेतनप्रकाश जोशी, संदेश गोयल, कीर्ति गर्ग, पार्वती गोयल, पूर्वी लोहिया, पल्लवी गोयल, मीना खंडेलवाल, बसंती जोशी, घनश्याम तंवर, विनोद गोयल, सरस्वती अग्रवाल, सुनीता यादव, प्रभा नवाल, ललिता शर्मा, मोनिका कौशिक, रत्ना कौशिक सहित बड़ी संख्या में महिला-पुरूष श्रोताओं ने धर्मलाभ लिया। -सुमित सारस्वत, मो.9462737273


धूमधाम से मनाया नंदोत्सव
शुक्रवार को कथा में भक्त प्रहलाद, नृसिंह अवतार, वामन अवतार, राम अवतार, कृष्ण जन्म प्रसंग सुनाया गया। केशव गोयल ने अवतार प्रसंग का सजीव मंचन करते हुए वामन रूप का दर्शन कराया। नंदोत्सव में सूर्यकुमार गर्ग ने वासुदेव, दामोदर सर्राफ ने नंदबाबा, संतोष सर्राफ ने यशोदा व हयान स्वामी ने बाल कृष्ण का रूप धरकर कृष्ण अवतार प्रसंग का सजीव मंचन किया। भक्तों ने झूमते हुए धूमधाम से नंदोत्सव मनाया। मंगल गीत गाते हुए सभी को बधाईयां बांटी गई। सभी ने बाल कृष्ण का दर्शन कर पलना झुलाया।


गिरिराज धरण को लगेगा छप्पन भोग
शनिवार को कथा में कृष्ण की माखन चोरी व बाल लीलाओं का गुणानुवाद किया जाएगा। गोवर्धन धारण व छप्पन भोग की झांकी सजाई जाएगी। सायं 7.30 बजे से कथास्थल पर संगीतमय सुंदरकांड पाठ होगा।


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December 22, 2017

जगद्गुरु श्रीजी महाराज पधारेंगे ब्यावर

श्री बालाजी व जानकी महिला मंडल की ओर से आयोजित श्रीमद् भागवत कथा में रविवार को श्रीराम-जानकी विवाह उत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा। इस मौके पर सलेमाबाद पीठ के जगद्गुरु निम्बार्काचार्य श्यामशरणदेव श्रीजी महाराज भी पधारेंगे। वे अपने मुखारबिंद से भक्तों को आशीर्वचन भी देंगे। उनके आगमन को लेकर निम्बार्की संप्रदाय से जुड़े अनुयायियों के साथ शहरवासियों में उत्साह है। कथा में पंडित रविशंकर शास्त्री भक्त चरित्र कथा के साथ श्रीकृष्ण की पावन कथा का अमृतपान करा रहे हैं।

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December 21, 2017

भागवत गीता में लिखी ये 10 भयंकर बातें कलयुग में हो रही हैं सच

1. ततश्चानुदिनं धर्मः सत्यं शौचं क्षमा दया ।
कालेन बलिना राजन् नङ्‌क्ष्यत्यायुर्बलं स्मृतिः ॥
अर्थ- कलयुग में धर्म, स्वच्छता, सत्यवादिता, स्मृति, शारीरिक शक्ति, दया भाव और जीवन की अवधि दिन-ब-दिन घटती जाएगी। 
  
2. वित्तमेव कलौ नॄणां जन्माचारगुणोदयः ।
धर्मन्याय व्यवस्थायां कारणं बलमेव हि ॥
अर्थ- कलयुग में वही व्यक्ति गुणी माना जाएगा जिसके पास ज्यादा धन है। न्याय और कानून सिर्फ एक शक्ति के आधार पर होगा।

3. दाम्पत्येऽभिरुचि  र्हेतुः मायैव  व्यावहारिके ।
स्त्रीत्वे  पुंस्त्वे च हि रतिः विप्रत्वे सूत्रमेव हि ॥
अर्थ- कलयुग में स्त्री-पुरुष बिना विवाह के केवल रूचि के अनुसार ही रहेंगे। व्यापार की सफलता के लिए मनुष्य छल करेगा और ब्राह्मण सिर्फ नाम के होंगे।

4. लिङ्‌गं एवाश्रमख्यातौ अन्योन्यापत्ति कारणम् ।
अवृत्त्या न्यायदौर्बल्यं पाण्डित्ये चापलं वचः ॥  
अर्थ- घूस देने वाले व्यक्ति ही न्याय पा सकेंगे और जो धन नहीं खर्च पाएगा उसे न्याय के लिए दर-दर की ठोकरे खानी होंगी। स्वार्थी और चालाक लोगों को कलयुग में विद्वान माना जाएगा।

5. क्षुत्तृड्भ्यां व्याधिभिश्चैव संतप्स्यन्ते च चिन्तया ।
त्रिंशद्विंशति वर्षाणि परमायुः कलौ नृणाम ॥
अर्थ- कलयुग में लोग कई तरह की चिंताओं में घिरे रहेंगे। लोगों को कई तरह की चिंताए सताएंगी और बाद में मनुष्य की उम्र घटकर सिर्फ 20-30 साल की रह जाएगी।

6. दूरे वार्ययनं तीर्थं लावण्यं केशधारणम् ।
उदरंभरता स्वार्थः सत्यत्वे धार्ष्ट्यमेव हि॥
अर्थ- लोग दूर के नदी-तालाबों और पहाड़ों को तीर्थ स्थान की तरह जाएंगे लेकिन अपने ही माता पिता का अनादर करेंगे। सिर पर बड़े बाल रखना खूबसूरती मानी जाएगी और लोग पेट भरने के लिए हर तरह के बुरे काम करेंगे।

7. अनावृष्ट्या  विनङ्‌क्ष्यन्ति दुर्भिक्षकरपीडिताः ।
शीतवातातपप्रावृड् हिमैरन्योन्यतः  प्रजाः ॥
अर्थ- कलयुग में बारिश नहीं पड़ेगी और हर जगह सूखा होगा। मौसम बहुत विचित्र अंदाज़ ले लेगा। कभी तो भीषण सर्दी होगी तो कभी असहनीय गर्मी। कभी आंधी तो कभी बाढ़ आएगी और इन्हीं परिस्तिथियों से लोग परेशान रहेंगे।

8. अनाढ्यतैव असाधुत्वे साधुत्वे दंभ एव तु ।
स्वीकार एव चोद्वाहे स्नानमेव प्रसाधनम् ॥
अर्थ- कलयुग में जिस व्यक्ति के पास धन नहीं होगा उसे लोग अपवित्र, बेकार और अधर्मी मानेंगे। विवाह के नाम पे सिर्फ समझौता होगा और लोग स्नान को ही शरीर का शुद्धिकरण समझेंगे।

9. दाक्ष्यं कुटुंबभरणं यशोऽर्थे धर्मसेवनम् ।
एवं प्रजाभिर्दुष्टाभिः आकीर्णे क्षितिमण्डले ॥
अर्थ- लोग सिर्फ दूसरों के सामने अच्छा दिखने के लिए धर्म-कर्म के काम करेंगे। कलयुग में दिखावा बहुत होगा और पृथ्वी पे भ्रष्ट लोग भारी मात्रा में होंगे। लोग सत्ता या शक्ति हासिल करने के लिए किसी को मारने से भी पीछे नहीं हटेंगे।

10. आच्छिन्नदारद्रविणा यास्यन्ति गिरिकाननम् ।
शाकमूलामिषक्षौद्र फलपुष्पाष्टिभोजनाः ॥
अर्थ- पृथ्वी के लोग अत्यधिक कर और सूखे की वजह से घर छोड़ पहाड़ों पे रहने के लिए मजबूर हो जाएंगे। कलयुग में ऐसा वक़्त आएगा जब लोग पत्ते, मांस, फूल और जंगली शहद जैसी चीज़ें खाने को मजबूर होंगे।

श्रीमद भागवत गीता में लिखी ये बातें आज कलयुग में सच होती दिखाई दे रही है। हमें गर्व है कि भगवान श्री कृष्ण ने पृथ्वी पर आकर कलयुग की भविष्यवाणी इतनी पहले ही कर दी थी, लेकिन फिर भी आज का मनुष्य अभी तक कोई सबक नहीं ले पाया।
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भक्त की भक्ति देखकर कृपा बरसाते हैं भगवान : शास्त्री

श्री बालाजी व जानकी महिला मंडल की ओर से आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के तृतीय दिवस ध्रुव चरित्र का गुणानुवाद किया गया। पंडित रविशंकर शास्त्री ने कहा कि भगवान जाति, धर्म, रंग, रूप देखकर कृपा नहीं करते। वो भक्त की भक्ति देखकर कृपा बरसाते हैं। प्रभुजी जैसो तैसो मैं तेरो.. रटते हुए रामदास चमार ने भगवान को प्राप्त कर लिया था।
कथावाचक ने कहा कि सनातन वृक्ष को हरा-भरा रखने के लिए ब्राह्मण रूपी जड़ की ज्ञान वृद्धि होना आवश्यक है। जब संशय हो तो हृदय की बात सुनो। हृदय में ठाकुरजी का वास होता है। परमात्मा को पाने के लिए तप करें। तप नहीं किया तो पतन हो जाएगा। पाप लोभ का बाप है। लोभ आने पर मनुष्य पाप करता है।



दांपत्य रिश्ते को सुखद बनाने का संदेश देते हुए शास्त्री ने कहा कि गृहस्थ जीवन श्रेष्ठ होना चाहिए। दांपत्य में कटुता नहीं हो। पति-पत्नी को भजन करना चाहिए। पतिव्रता स्त्री सदैव पति से प्रेम करती है। उन्होंने कहा कि इंद्रियों को वश में रखें। वश में ना रहे तो संतों की शरण में जाएं। कथा के मध्य देवेश यादव ने ध्रुव का रूप धारण कर भक्ति का सजीव मंचन किया। लगन तुमसे लगा बैठे.., सांवरियो है सेठ म्हारो राधाजी सेठानी है.. भजनों पर श्रोता झूम उठे।
श्री बालाजी व जानकी महिला मंडल की सदस्याएं। फोटो : सारस्वत
कथा प्रारंभ होने से पूर्व यजमान चेतन गर्ग, आशा गर्ग, अनिल खंडेलवाल, वंदना खंडेलवाल, दिनेश गोयल, सुमन गोयल, सुनील कौशिक, मोनिका कौशिक, रत्ना कौशिक, पार्वती मंगल, मंजू अग्रवाल, रेखा जिंदल, लीला मित्तल, मुन्नी मित्तल, भरतपुर से आए अशोक गोयल, सुषमा गोयल का दुपट्टा पहनाकर स्वागत किया गया। कथा में माणक डाणी, राधेलाल गोयल, केदार गर्ग, शकुंतला गोयल, प्रभा नवाल, पूर्वी लोहिया, सुनीता यादव, प्रभा शर्मा, ललिता शर्मा, रमेश शर्मा, चेतनप्रकाश जोशी, कांतिलाल डाणी, ओमप्रकाश रायपुरिया, कमल सर्राफ, विनोद गोयल, विजय तंवर सहित बड़ी संख्या में महिला-पुरूष श्रोताओं ने धर्मलाभ लिया। -सुमित सारस्वत, मो.09462737273


..तो कार्टून बन जाएगा बच्चा
शास्त्री ने कहा, बच्चों को गायत्री मंत्र व वेदों का ज्ञान कराएं। अगर बच्चे कार्टून नेटवर्क देखेंगे तो खुद कार्टून बन जाएंगे। माता-पिता व्हाट्सएप पर समय बिताने की बजाय बच्चों पर ध्यान दें। अगर एक सुपुत्र भक्त हो जाए तो सात पीढ़ी का जीवन सफल कर देता है। पुत्र भक्त बना तो माता-पिता और परिवार की सेवा भी करेगा। भक्त नहीं बना तो चोर, डाकू या नेता बनेगा।


ऐसे करें संत की पहचान
कथावाचक ने बताया कि कपिल भगवान के अनुसार संत वो है जिसमें क्षय करने की शीलता हो। जो सबको साथ लेकर हरि भजन करे। साधु की सेवा करे। जिसमें अहंकार न हो। वंश से ही नहीं, मन से भी संत बना जा सकता है। भगवा पहनने वाला संत नहीं होता। संत की पहचान के लिए विवेक होना जरूरी है।


शुक्रवार को धूमधाम से मनाएंगे नंदोत्सव
शुक्रवार को कथा में वामन अवतार, राम जन्म, कृष्ण जन्म प्रसंग पर व्याख्यान होगा। ठाकुरजी के जन्म अवसर पर धूमधाम से नंदोत्सव मनाया जाएगा। कथास्थल को रंग-बिरंगे गुब्बारों से सजाया जाएगा। भक्तों को बधाई बांटी जाएगी।


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पं.रविशंकर ने बताया दांपत्य सुखद बनाने का सूत्र | Formula of Happy Married Life

वर्तमान वक्त में रुग्ण होते दांपत्य रिश्ते को सुखद बनाने के लिए निम्बार्क संप्रदाय के पंडित रविशंकर शास्त्री ने सूत्र दिया है। ब्यावर में श्री बालाजी व जानकी महिला मंडल की ओर से आयोजित श्रीमद् भागवत कथा में पारिवारिक रिश्तों पर प्रवचन देते हुए शास्त्री ने कहा कि गृहस्थ जीवन श्रेष्ठ होना चाहिए। दांपत्य में कटुता नहीं हो। पति-पत्नी को संग मिलकर भजन करना चाहिए। पतिव्रता स्त्री सदैव पति से प्रेम करती है। स्त्री को पति धर्म परायण होकर रहना चाहिए।
कथावाचक ने कहा कि बच्चों को गायत्री मंत्र व वेदों का ज्ञान कराएं। अगर बच्चे कार्टून नेटवर्क देखेंगे तो खुद कार्टून बन जाएंगे। माता-पिता व्हाट्सएप पर समय बिताने की बजाय बच्चों पर ध्यान दें। अगर एक सुपुत्र भक्त हो जाए तो सात पीढ़ी का जीवन सफल कर देता है। पुत्र भक्त बना तो माता-पिता और परिवार की सेवा भी करेगा। भक्त नहीं बना तो चोर, डाकू या नेता बनेगा। इंद्रियों को वश में रखें। वश में ना रहे तो संतों की शरण में जाएं। -सुमित सारस्वत, मो.09462737273

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December 20, 2017

रामस्नेही संत ने दिया मुस्कुराने का मधुर संदेश | Smile Forever

बड़ौदा से पधारे अंतर्राष्ट्रीय रामस्नेही संप्रदाय के संत रामप्रसाद महाराज ने मुस्कुराने का संदेश दिया। ‘गुलिस्तां वालों तुम गुलों से मुस्कुराना सीख लो, हर एक दिल में तुम अपना घर बनाना सीख लो। खुद-ब-खुद झुक जाएंगे तालीब-ए-दुनिया सब, शर्त इतनी सी पहले अपना सर झुकाना सीख ले।’ यह शेर सुनाते हुए कहा कि कृष्ण कथा मुस्कुराने की प्रेरणा प्रदान करती है। वे ब्यावर में श्री बालाजी व जानकी महिला मंडल की ओर से आयोजित संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा में संबोधन दे रहे थे।
उन्होंने कहा कि चेहरे पर मुस्कुराहट कभी कम न होने देना। खुद हंसते रहना और दूसरों को हंसाते रहना। हंसी बांटने से दोगुनी होती है। जब तक तन में प्राण है तब तक हंसते मुस्कुराते रहो। कभी समस्या आए या तनाव हो तो भी मुस्कुराना न छोड़ें। मुस्कुराना लाखों बीमारियों की दवाई है। कथा में संत केवलराम रामस्नेही, संत गोपालराम रामस्नेही, संत उदयराम का भी आगमन हुआ। कथावाचक पंडित रविशंकर शास्त्री ने संतों के आगमन पर प्रसन्नता प्रकट की। निम्बार्क संप्रदाय और रामस्नेही संप्रदाय के बुद्धपुरूषों का मिलन हुआ तो हर भक्त आनंदित हो उठा। मंच संचालन कर रहे सुमित सारस्वत ने भी शब्दों की जादूगरी से भक्तों के चेहरों पर मुस्कान बिखेरी। कथा में सैकड़ों भक्त शामिल हुए। -सुमित सारस्वत, मो.09462737273




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