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October 27, 2017

चिंता मसान की चिता समान : मोरारी बापू | Don't Worry Be Happy : Morari Bapu

बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी में आयोजित मानस मसान कथा में अंतर्राष्ट्रीय संत मोरारी बापू ने कहा कि हर घर मसान है क्योंकि मसान की वस्तुएं घर में है। जैसे मसान में चिता, काष्ठ और अग्नि है वैसे ही घर में चिंता, कष्ट और ईर्ष्या की आग है। चिंता चिता के समान है। इससे दूर रहने के लिए रामकथा का आश्रय करें। रामकथा जीव को शिव बनाने वाली कथा है। रामकथा सभी समस्याओं का समाधान है। यह वर्तमान का जवाब और भविष्य का मार्गदर्शन है। अहंकार से बचने के लिए राम नाम अत्यंत आवश्यक है।
बापू ने कहा कि राम परमतत्व है जो शिव को भी परमप्रिय है। सदाशिव के लिए भी आदरणीय है। कृष्ण भी किसी दूसरे तत्व का नाम नहीं है। कृष्ण भी शिव को उतने ही प्रिय हैं जितने राम हैं। यदि कृष्ण प्रिय न होते तो मानव रूप में अवतार के बाद स्वयं भगवान शंकर उनके दर्शन पूजन को गोकुल न गए होते। उन्होंने कहा कि कृष्ण बनना कठिन है। दुनिया के ताने सहने पड़ते हैं। भले ही मंदिर जाओ मगर घर में कोई कृष्ण हो तो उसकी भावनाओं को भी समझो। परमात्मा के हाथ न्याय के प्रतीक और चरण करूणा के प्रतीक हैं। परमात्मा अपना लेते हैं तो आश्रित की भूल माफ कर देते हैं। संत कृपा सनातन संस्थान की ओर से आयोजित रामकथा में काशीराज कुंवर अनंतनारायण सिंह, मुख्य यजमान मदन पालीवाल, भाजपा राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय, सतुआ बाबा, मंत्रराज पालीवाल सहित कई देशभर से आए हजारों श्रद्धालु धर्मलाभ ले रहे हैं। -सुमित सारस्वत, मो.09462737273


सौभाग्य से मिलता है मसान
बापू बोले, जीवित जीवों को तो मैं बरसों से कथा सुनाता आ रहा हूं मगर काशी की मानस मसान कथा मणिकर्णिका महाश्मशान के मुर्दों को समर्पित है। जीवन की कोई निश्चितता नहीं है परंतु मृत्यु तय है। अगर जीवन सुख है तो मृत्यु सुख का सार है। मसान का सौभाग्य मुर्दे को ही मिलता है। मसान में काम नहीं, राम होता है। क्रोध नहीं बल्कि बोध होता है। लोभ नहीं, क्षोभ व ग्लानि होती है। वहां मद नहीं, विष्णुपद होता है। मोह नहीं होता मगर मेह संवेदना होती है। मत्सर नहीं, ईश्वर होता है। मसान में श्रम नहीं होता, विश्राम होता है।


कांड से मिलती है शिक्षा
रामचरितमानस का हर कांड हमें शिक्षा देता है। मानस के बालकांड में काम नहीं है। अयोध्या कांड में क्रोध नहीं बल्कि बोध है। अरण्य कांड में लोभ नहीं है। यह मुनियों व त्यागियों का कांड है। किष्किन्धा कांड में मद व अभिमान नहीं है। सुन्दरकांड में मोह नहीं है और लंका कांड में मत्सर नहीं है।

भय से मुक्त हो वो साधु
बापू ने कहा कि जीव को तीन प्रकार का भय सताता है। पहला वियोग, जो मिला वो छूट जाएगा। दूसरा हानि, नुकसान तो नहीं हो जाएगा। तीसरा अपमान, कोई अपमानित ना कर दे। जो इन तीनों भय से मुक्त हो वो साधु होता है। साधु भले ही मत बनो, साधु का संग तो करो। जीजस ने कहा था, ‘दस्तक दो, दरवाजा खुलेगा।’ परमात्मा का सामीप्य न हो मगर सानिध्य है।
सत्य की राह कठिन
‘मजा देखा सत्य का, जिधर तू है उधर कोई नहीं’ यह शेर सुनाते हुए बापू ने कहा कि सत्य की राह कठिन है। गांधी बापू सत्य के मार्ग पर चले तो उन्हें गोली मार दी गई। ‘हमको बारिशों का कोई खौफ नहीं, क्योंकि हम पतंगें नहीं परिन्दे हैं’ इस शेर के जरिए संदेश दिया कि सत्य को अपनाए, किसी से डरें नहीं।

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कथा सीखा रहा हूं

बापू ने कहा, मुझे कभी-कभी महसूस होता है कि मैं कथा सुना नहीं रहा बल्कि सीखा रहा हूं। जैसे टीचर क्लास लेता है वैसे मैं भी आपकी क्लास ले रहा हूं। मैं ऐसा इसलिए करता हूं क्योंकि मैं चाहता हूं कि रामचरितमानस आपके अंदर उतर जाए।


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भारत के इस महाश्मशान में 24 घंटे जलती है चिताएं | Manikarnika Ghat

हिंदू मान्यताओं के मुताबिक भारत में सूर्यास्त के बाद दाह संस्कार निषेध है मगर देश में एक ऐसा श्मशान भी है जहां चौबीस घंटे चिताएं जलती है। बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी में गंगा तट पर मणिकर्णिका घाट भारत का एक मात्र ऐसा घाट है जहां चिता की अग्नि कभी ठंडी नहीं पड़ी। इस महाश्मशान में दिन-रात यानि 24 घंटे शवों का दाह संस्कार किया जाता है। 
यहां सैकड़ों सालों से चिताएं जलती आ रही हैं। माना जाता है कि यहां मोक्ष प्राप्त करने वाला कभी दोबारा गर्भ में नहीं पहुंचता है। सिर्फ बनारस और आसपास से ही नहीं बल्कि देश के दूरदराज से भी लोग इसी घाट से अपने प्रियजनों को अंतिम विदाई देते हैं। औसतन 30 से 35 चिताएं रोज जलती हैं।

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मणिकर्णिका घाट को धरती का महाश्मशान कहा जाता है। यहां के लोग बताते हैं कि भगवान शंकर की पत्नी पार्वती की मणि यहां गिरी थी। इसलिए इसका नाम मणिकर्णिका है। यहां कई बार शवों को भी अपनी बारी का इंतज़ार करना पड़ता है। जितने शव जल रहे होते हैं, उससे ज्यादा शव दाह संस्कार की कतार में रहते हैं। मणिकर्णिका घाट पर शवों को शव को अग्नि देने से पहले गंगा में स्नान कराने की परंपरा है। शव को अर्थी समेत गंगा में डुबकी लगवा दी जाती है।

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October 26, 2017

International Pushkar Fair to start on Oct 28

The popular Pushkar Fair will commence from October 28, 2017 in Pushkar near Ajmer. The fair will be eight-day-long and conclude on November 4. Pushkar Fair is organised by Rajasthan Tourism and District Administration every year, for celebrating the years old traditions and treasures of the state. This vibrant festival, also known as the Pushkar Camel Fair or Pushkar Fair, is a colourful and vibrant display of unique exhibitions, competitions and events. Besides, the fair is renowned for being one of the world’s largest cattle fair.



The eight-day festival will witness a melange of cultural and adventure activities like Harmony Marathon (From Dargah Shareef in Ajmer to Brahma Temple in Pushkar) in the morning, hot air balloon flights, Nagada Vadan, Pooja at different temples, Mandana competition, football match with foreigners, adventure sports and activites at adventure zone, Shilgram handicrafts bazaar, Deepdaan, Rangoli, Maha Arti, Pushkar Abhishek at Pushkar Sarovar, spiritual walks, rural sports, exhibitions, cultural performances by the locals, as well as live musical performances by famous local and international artists.
Pushkar Fair is among the most visited festivals in India and attracts domestic and foreign tourists with its presentation of culture, adventure and rural economy. During the fair, lakhs of people from rural India flock to Pushkar, along with camel and cattle for several days of livestock trading, pilgrimage and religious festival.



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तीन सूत्री फॉर्मूला अपनाओ, घर में जन्मेंगे राम : मोरारी बापू | Morari Bapu's Three Point Formula for Ram



राजा दशरथ और कौशल्या का दांपत्य पावन था तो उनके घर राम का जन्म हुआ। आज भी राम प्रतीक्षा में हैं मगर दशरथ और कौशल्या नहीं मिलते। हनुमानजी को साकार रूप में आने के लिए माता अंजना नहीं मिल रही। राम का अर्थ विश्राम, विराम व अभिराम है। पत्नी पति को आदर दे, पति प्रेम बरसाए और दोनों मिल कर श्रद्धा-भक्ति करें। यह तीन सूत्रीय फॉर्मूला जहां साकार हो गया वहां राम नवमी हो जाएगी। यह बात अंतर्राष्ट्रीय संत मोरारी बापू ने काशी में आयोजित मानस मसान में कही।
रामकथा के पंचम दिवस भगवान राम का जन्म प्रसंग सुनाते हुए बापू ने चिंता जताई कि हिंदुस्तान के दांपत्य को नजर लग गई है। अब रिश्ते लंबे नहीं चलते। घर में राम नाम का सुमिरन किया जाए तो सुधार आ सकता है। उन्होंने कहा, पुरूषार्थ करो, प्रार्थना करो, प्रतीक्षा करो, प्रभु आएंगे। अहिल्या, सुग्रीव, जटायु, जानकी और शबरी प्रमाण है जिन्होंने प्रतीक्षा की तो प्रभु खुद आए। बापू ने प्रभु जन्मोत्सव की चौपाइयां सुनाकर श्रोताओं को भावों से भर दिया। पांडाल में भजन और चौपाइयों के साथ जब बापू ने श्रीराम जन्म की घोषणा की तो हजारों श्रोता भाव विभोर होकर नाचने लगे।ऐसा अनूठा नजारा दिखा मानो बाबा विश्वनाथ की धरती पर राम ने फिर से जन्म ले लिया हो। पूरा वातावरण राममय हो गया। ‘भये प्रकट कृपाला दीनदयाला..’ दोहराते हुए हजारों की संख्या में मौजूद श्रद्धालु एक साथ खड़े होकर बधाइयां गाने लगे। कथा में संत कृपा सनातन संस्थान के अध्यक्ष मदन पालीवाल, काशी नरेश अनंत नारायण सिंह, भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन, यूपी प्रदेशाध्यक्ष डॉ. महेंद्रनाथ पांडेय, संत संतोष दास, पं.आशीष मिश्र, चेतन कृष्ण सहित देशभर से आए हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। -सुमित सारस्वत, मो.09462737273


मृत्यु मेहमान और मसान यजमान
बापू ने कहा कि उज्जैन और बनारस परंपरा में मसान सिद्धपीठ और यजमान हैं। व्यासपीठ पर बैठकर बोलना चिता पर बैठकर बोलने के समान है। मसान हमारी प्रतीक्षा करता है। यजमान कोई पंक्ति भेद नहीं करता है। मसान ऐसा यजमान है कि एक बार मेहमान आ जाए तो सदा के लिए रख लेता है। मेहमान का भी कर्तव्य होता है कि जो मिले, उसका शुक्रिया अदा करे। उन्होंने कहा, मृत्यु वाले घर में बैठकर उत्तरकांड का पाठ करें। मसान में बैठकर एक बार सुंदरकांड का पाठ कर लिया जाए तो संसार की सभी क्रियाएं पूर्ण हो जाती हैं। जब तक राम हैं तब तक पुत्र पुत्र है, हितैषी हितैषी है और मित्र मित्र है। जब राम तत्व चला जाता है तब पुत्र, मित्र और हितैषी यमदूत लगने लगते हैं। सूत्र दिया कि मानस या हृदय जब मसान बन जाता है तब मुक्ति मुट्ठी में आ जाती है। मृत्यु सत्य है और वह प्रेम को प्रकट करती है। सत्य का एकमात्र दायित्व है कि वह विश्व में प्रेम का सर्जन करे।



किसी को सफाई मत दो
बापू ने जीवन में सफलता का सूत्र बताते हुए कहा कि अच्छे व्यक्ति की सदैव आलोचना होती है। आलोचनाओं को स्वीकार करो। अगर सत्य हो तो किसी को सफाई मत दो। सफाई वो देता है जो थोड़ा भी झूठा हो। जवाब नहीं दोगो तो आलोचक का मुंह बंद हो जाएगा।


पद्मभूषण गिरिजा देवी को श्रद्धांजलि
कथा प्रारंभ करने से पूर्व बापू ने पद्मभूषण भारतीय शास्त्रीय संगीत गायिका गिरिजा देवी के निधन पर संवेदना प्रकट की। उन्होंने कहा, बनारस घराने की गिरिजा देवी ने ठुमरी गायन को संवारकर लोकप्रिय बनाने में बहुत बड़ा योगदान दिया। बापू ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए ठुमरी संगीत का वादन भी करवाया।


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October 25, 2017

योगी बोले, अयोध्या दीपावली में मुस्लिम बने थे राम और हनुमान | Yogi Adityanath speech in Kashi


देश में भले ही मुसलमानों को भगवान राम का दुश्मन माना जाता हो मगर इस साल राम जन्म भूमि अयोध्या में आयोजित भव्य दीपावली महोत्सव में भगवान राम और हनुमान बनने वाले कलाकार मुसलमान थे। यह बात खुद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बताई है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में आयोजित रामकथा में संत मोरारी बापू के जिक्र करने पर गोरख पीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि दीपावली अयोध्या ने ही देश-दुनिया को दी। दीपावली के इस आयोजन को अदभुत रूप में प्रस्तुत कर सकें यह हम सबके लिए चुनौती थी, क्योंकि सरकार इसमें शामिल हो तो सांप्रदायिकता का आरोप लगता। इसके बावजूद हमने इसे मनाया और सांप्रदायिकता के कलंक से मिटने के लिए काम किया। दुनिया के जिन देशों में रामलीला होती है उन्हें भी आमंत्रित किया। हमने इंडोनेशिया और श्रीलंका की रामलीला को भी बुलाया। इंडोनेशिया इसलिए क्योंकि यह दुनिया में सबसे बड़ा मुस्लिम देश है। जितने भी रामायण के पात्र बने थे वे सभी मुस्लिम थे। मैंने उनसे पूछा, क्या रामलीला में हनुमान, राम, सीता बनने में संकोच नहीं तो उन्होंने कहा कि इस्लाम हमारी उपासना विधि है लेकिन राम हमारे पूर्वज हैं। अपने पूर्वज के साथ कैसे संबंध विच्छेद कर सकते हैं। रामलीला इंडोनेशिया का राष्ट्रीय पर्व है। वहां नोट पर गणपति छपते हैं। विष्णु की सवारी गरूड़ को नेशनल एयरलाइंस बनाया है। उन्होंने कहा, उपासना बदलने से पूर्वज नहीं बदलते हैं और इसलिए वहां के मुस्लिम श्रद्धा भाव के साथ रामलीला करते हैं। दूसरा हमने श्रीलंका की रामायण को आमंत्रित किया क्योंकि बहुत सारे लोगों को यह लगता होगा कि श्रीलंका में रामलीला नहीं होती होगी क्योंकि रावण तो वहां का था। श्रीलंका की रामायण में सिंहली भाषा के साथ संस्कृत में संवाद हुआ। देश और दुनिया ने उसे देखा और सराहा। हमने अयोध्या में अगले माह होने वाले रामायण मेले में छह देशों की नई रामलीला को आमंत्रित किया है।

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